संगरूर : बुनियादी सुविधाओं को तरस रहा हलका लहरागागा

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Town-Lehragaga

समस्या: एमरजैंसी में सुनाम या संगरूर से मंगवाई जाती है फायर ब्रिगेड (Town Lehragaga)

सच कहूूँ/राज सिंगलासंगरूर/लहरागागा। कस्बा लहरागागा कई मूलभूत सुविधाओं से वंचित है। हलका लहरा जिला संगरूर का एक खास और प्रसिद्ध हलका है क्योंकि इसी हलके से बीबी राजिन्द्र कौर भट्ठल मुख्यमंत्री भी रह चुके हैं। लहरा हलके में तकरीबन 22,500 के तकरीबन आबादी है। शहर लहरागागा में कुल 15 वार्ड आते हैं परंतु इस हलके में बहुत सी कमियां हैं जो कि हर वक्त चर्चा का विषय बनी रहती हैं। शहर निवासियों के साथ बातचीत की तो उन्होंने बताया कि शहर में अनेकों प्राईवेट डिग्री बीएड के कालेज हैं परंतु लहरागागा में कोई भी सरकारी कॉलेज नहीं है, जिस कारण शहर के बच्चों को लहरा से दूर अपनी पढ़ाई के लिए जाना पड़ता है, जिससे बच्चों को बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

जब तक फायर ब्रिगेड आती है तब तक लाखों का नुक्सान हो चुका होता है।

आज-कल हम देखते ही हैं कि कितनी वारदातें हो रही हैं। पढ़ाई के लिए बाहर भेजने में बच्चों के माता-पिता को डर सताता रहता है। शहर निवासियों ने मांग की है कि शहर लहरागागा में बीएड का सरकारी कालेज होना लाजिमी है, जिस कारण कई हजारों बच्चे जो पढ़ाई करने के लिए बाहर जाते हैं वह अपने शहर में अपनी पढ़ाई पूरी कर सकें। इससे वह अपनी पढ़ाई को पूरा समय दे सकें। शहर में कुछ दिन पहले एक करियाणा होलसेल की दुकान को आग लग गई थी उस समय उस दुकानदार का बहुत नुक्सान हुआ था।

  • करियाणा एसो. ने एकत्रित होकर डीसी संगरूर को भी इस बारे ज्ञापन दिया था।
  • परंतु इस बात को भी तकरीबन दो महीने बीत चुके हैं ।
  • अब तक कोई भी फायर ब्रिगेड का पुख्ता प्रबंध नहीं हो सका है।
  • स्थानीय निवासियों ने बताया कि लगता है कि प्रशासन किसी अनहोनी के इन्तजार में है।
  • जब कोई अनहोनी हो जाती है तो फायर ब्रिगेड सुनाम या संगरूर से मंगवानी पड़ती है
  • जब तक फायर ब्रिगेड आती है तब तक लाखों का नुक्सान हो चुका होता है।

मौके पर मरीज को कोई सुविधा न मिलने कारण कई मरीजों ने अपनी जान भी गवाई है

(Town Lehragaga)

प्रशासन से शहर निवासियों की यह पुरजोर मांग है शहर निवासियों की सबसे बड़ी समस्या शहर में अनाज मंडी की है जो कि शहर के बीच होने के कारण सीजन के समय बहुत हादसों को न्योता देती रहती है अनाज मंडी की मांग कई बार प्रशासन को की जा चुकी है कि अनाज मंडी शहर से बाहर होनी चाहिए परंतु अनाज मंडी का अभी तक किसी भी प्रशासन की ओर से कोई भी इस बात की तरफ बिल्कुल भी ध्यान नहीं दिया गया है। शहर निवासियों को यहाँ अस्पताल एमरजैंसी डाक्टर न होने के कारण भी बहुत मुश्किलों का सामना करना पड़ता है।

  • कई बार एमरजैंसी डॉक्टरों के न होने के कारण कई हादसे हुए है।
  • मौके पर मरीज को कोई सुविधा न मिलने कारण कई मरीजों ने अपनी जान भी गवाई है।
  • अस्पताल में डॉक्टर और स्टाफ की कमी भी हमेशा चर्चा का विषय बनी रहती है।
  • सरकारी अस्पताल की अपनी कोई भी सरकारी एम्बूलैंस न होने के कारण प्राईवेट या 108 के द्वारा मरीज को रैफर किया जाता है ।
  • न ही अस्पताल में रात समय पर किसी एमरजैंसी होने पर लैबारेट्ररी अटेंडेट।
  • न ही कोई एक्सरे आॅपरेटर होता है।
  • जिस कारण मरीज को रैफर करना पड़ता है।

चौराहों व पब्लिक जगह पर कैमरों की मांग

शहर निवासियों की ओर से लंबे समय से चौराहों में कैमरों की मांग लटकती आ रही है, जिसे अभी तक पूरा नहीं किया गया। रात के समय पर शहर के अधिकतर मौहल्लों की स्ट्रीट लाईटें या तो खराब रहती हैं या रात के समय बंद रहती हैं शहर निवासियों की मांग है कि शहर में पुरानी स्ट्रीट लाईटों को हटाकर नयी तकनीक वाली एलईडी लाईटें लगवाई जाएं। बरसात के दिनों में शहर की सब से बड़ी समस्या शहर में सीवरेज का न शुरू होना भी है।

  • सरकार ने करोड़ों रूपये खर्च कर शहर के चारों तरफ सीवरेज का काम करवाया है।
  • सीवरेज को बनाए हुए को भी कई साल हो गए।
  • अब तक सीवरेज ने काम करना शुरू नहीं किया।
  • बारिश समय पर बारिश का पानी सड़कों पर जमा हो जाता है।
  • दो बार तो शहर और गांव वाली साईड को मिलाने वाला अंडरब्रिज भी पूरी तरह से पानी से भर गया था।
  • जिस कारण शहर से गांव की तरफ जाने वाला यातायात भी ठप्प हो जाती था।

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