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त्यौहार, लोग और सुप्रीम कोर्ट

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दीवाली में पटाखों पर सुनवाई करना सुप्रीम कोर्ट की एक सराहनीय कदम है। एक समय अंतराल तक ही पटाखे फोड़ना पर्यावरण के सेहत में कम असर पड़ेगा। देश में वायु प्रदूषण को गंभीर समझना जरूरी हो चला है। आज पर्यावरण का बिगड़ता स्वास्थ्य काफी गंभीर समस्या बनती जा रही है। लगातार हरियाली में कमी आने के कारण अनुकूल रहने वाला मौसम आज दिन प्रतिदिन बिगड़ रहा है। हवा में घुल चुका प्रदूषण रूपी जहर मानव की सेहत के लिए काफी हानिकारक बनता जा रहा है। इन दिनों प्रदूषण से बचने के लिए सरकार भी गंभीर दिख रही है।लेकिन हालत ज्यादा खराब होने के कारण पर्यावरण में फैल रहे इस जहर को रोकना एक चुनौती बन गई है।शहरों में हालत और ज्यादा नाजुक हंै।

पर्यावरण आज इतना ज्यादा दूषित हो चुका है कि देश का राजधानी दिल्ली में सांस लेना भारी पड़ रहा है। सिर्फ भारत की राजधानी दिल्ली में नही बल्कि देश भर में प्रदूषण की समस्या तेजी से बढ़ रही है।अब तो हालत इतना नाजुक हो चुका है की बढ़ते वायु प्रदूषण हमारी सेहत ही नहीं बल्कि हमारी उम्र को भी घटाने में जिम्मेदार है।वैज्ञानिकों की ओर से कराए गए एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि हवा में घुल चुके प्रदूषण से औसत भारतीय की उम्र डेढ़ साल तक कम हो रही है।वायु प्रदूषण से हर वर्ग के लोग प्राभवित हैं। बूढ़े हो या युवा हो या बच्चे हो।सब उम्र के वर्ग इनसे गहरा प्राभवित होता है। लेकिन बच्चों की बात करें तो उनमें श्वास संबधी रोग ज्यादा है। वायु प्रदूषण के कारण संभावित बच्चों में जन्मदर कम होने के साथ साथ अस्थमा व निमोनिया जैसे अन्य कई श्वास रोग होने की संभावना बढ़ रही है।

सुप्रीम कोर्ट ने दीवाली जैसे त्योहार पर पटाखों पर पूरी पाबंदी ना करते हुए एक समय अंतराल तक ही पटाखों को फोड़ने की अनुमति दी है ताकि भारतीय त्योहारों और धार्मिक उत्सव में ज्यादा खलल ना पड़े। इसलिए सुप्रीम कोर्ट ने ज्यादा छेड़छाड़ ना करते हुए इस मामले की सुनवाई की है,क्योंकि भारत में धार्मिक मामलों में संवैधानिक रूप से कई छूट है। दीवाली आने में अभी सप्ताह बाकी है इसके पहले ही सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में सुनवाई कर दी है अब देखने वाली बात होगी कि पूरे देश में यह किस तरह लागू होती है।भारत में त्योहारों की धूम तो बनते ही देखा जाता है।दीवाली भी एक मुख्य त्योहार है जिसको बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।सम्पूर्ण भारत मे इनकी धूम देखी जा सकती है।लेकिन इस त्योहार में वायु प्रदूषण को बढ़ावा भी कहीं ना कहीं दिया जाता है। सम्पूर्ण देश में व्यापक रूप से पटाखे फोड़े जाते हैं जो उच्च ध्वनि के साथ वायु को प्रदूषित कर वायुमंडल में जहर घोलने का कार्य करते हंै।

सिर्फ दीवाली को देखते हुए ही वायु प्रदूषण पर विचार करना उपाय नही है बल्कि यह एक गंभीर मुद्दा बन चुका है।दीवाली में जो प्रदूषण बढ़ेगा वो तो है ही लेकिन तात्कालित समय में ही वायु प्रदूषण गहराया जा रहा है।हालात यह है कि पर्यावरण आज इतना ज्यादा दूषित हो चुका है कि देश की राजधानी दिल्ली में सांस लेना भारी पड़ रहा है।सिर्फ दिल्ली ही नही भारत के कई राज्यों में वायु प्रदूषण व्यापक रूप से फैली हुई है।बढ़ती विकास की रफ्तार में हम इतने मगन हो गए हैं कि पर्यावरण और अपनी सेहत के प्रति उदासीन दिखते हैं। कुछ ही दिन पहले भारत प्रदूषण फैलाने वालों की सूची में अव्वल आया था। बढ़ते उद्योगों और परिवहन के कारण शहर की हरियाली पूरी तरह तबाह हो चुकी है। लोग खुली और स्वक्ष हवा लेने के लिए तरस गए हैं।

हवाओं में फैली इस जहर के कारण कई रोगों का जन्म होता है। जिनसे कई लोग जिंदगी से हाथ धो बैठते हैं। जिनका प्रतिकूल प्रभाव सभी उम्र के लोगों पर पड़ता है। लेकिन बच्चे सबसे ज्यादा प्राभवित होते हैं। आजकल सांसों का बढ़ता रोग प्रदूषण के कारण ही जोर पकड़ा हुआ है। ऐसा पहली मर्तबा है कि लोगों को पर्यावरण के प्रति चेताया गया है। हर बार विश्व संगठन लोगों को चेताने का काम करता है। लेकिन लोगों में जरा सी चेतना नही नजर आती है। जिसका अंजाम इतना बुरा होगा कि मानव को संभलने का मौका तक नहीं मिलेगा।भारत ही नही बल्कि दुनिया के बहुत सारे देश है जो वायु प्रदूषण को झेल रहा है। खास कर ऐसा देश जो विकाशील हो वहां प्रदूषण की मार ज्यादा है। गौरतलब है कि भारत भी विसकशील देशों की गिनती में आता है। जहाँ विकास को प्राथमिक मानते हुए प्रदूषण को अनदेखा किया जाता है। हालांकि भारत मे भी जागरूकता फैलाई जा रही है।कई बड़े बड़े आयोजन के जरिये भी लोगों को संदेश देने का काम करती है।

लेकिन विडंबना यह है कि ऐसे संदेश बस मंच तक ही सीमित रह जाते हैं। लोगों की चेतना नही होने के कारण आज प्राकृतिक आपदा अपना उग्र रूप दिखाती है। प्रदूषण का बेहद खराब स्तर यह देखने के लिए काफी है कि दिल्ली में बुधवार को ही प्रदूषण का धुंध छाया रहा।बीते दिन में राजधानी के पांच इलाकों में प्रदूषण का स्तर गंभीर दर्ज किया गया है।गौरतलब है कि अभी भी दीवाली आने में सप्ताह बाकी है और प्रदूषण स्तर इतना उच्च है तो दो घंटे में ही हवा कितनी जहरीली हो जाएगी? इनका अंदाजा लगाना भी मुश्किल है। सिर्फ सुप्रीम कोर्ट के आदेश से ही लोगों को इससे बचना जरूरी नहीं है बल्कि खुद के स्वास्थ्य और देश की राजधानी समेत पूरे देश में बढ़ रहे प्रदूषण रूपी मानवी जहर हो रोकना होगा तभी त्योहारों के मजे लिए जा सकते हैं।

नीलेश मेहरा

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