कृषि बिल के खिलाफ सड़कों पर किसान

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Agricultural Bill Protest

आक्रोश। किसानों के समर्थन में उतरे पंजाबी गायक, दिल्ली बॉर्डर पर किसानों का प्रदर्शन (Agricultural Bill Protest)

  • किसान संगठनों ने कहा-26 सितंबर से होगा आंदोलन में बदलाव

  •  किसानों की राष्ट्रपति  से अपील-बिल पर हस्ताक्षर न करे

चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। केंद्र सरकार द्वारा संसद में पारित तीन कृषि विधेयकों के विरोध में किसान संगठनों के भारत बंद के आह्वान पर कृषि प्रधान पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तर प्रदेश और अन्य राज्यों में शुक्रवार को बड़ी संख्या में किसान और आढ़तिये सड़कों पर उतर आए और इन्होंने अनेक राष्ट्रीय राजमार्गों और रेल रूट को जाम कर दिया। किसानों ने केंद्र सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर संसद में पारित कृषि विधेयक वापिस लेने की मांग की। हरियाणा-पंजाब में भारत बंद का असर साफ देखा गया। किसान संगठनों को कांग्रेस, आरजेडी, समाजवादी पार्टी, अकाली दल, आप पार्टी, टीएमसी समेत कई पार्टियों का साथ भी मिला है।

इससे पहले पंजाब में तीन दिवसीय रेल रोको अभियान की गुरुवार से शुरूआत हो गई है। पंजाब में कई पंजाबी गायक भी किसान आंदोलन के समर्थन में आ गए हैं। इस बीच बीजेपी ने किसानों को जागरूक करने के लिए 15 दिन तक जनसंपर्क अभियान चलाने का फैसला किया है। उधर किसान संगठनों का कहना है कि अगर केंद्र सरकार ने ये विधेयक वापिस नहीं लिए तो 26 सितम्बर से आंदोलन की रूपरेखा में बदलाव किया जाएगा।

कोरोना नियमों की उड़ीं धज्जियां

हरियाणा-पंजाब राज्यों में किसान आंदोलन के दौरान कोविड-19 नियमों की जम कर धज्जियां उड़ीं। सड़कों पर उतरे किसानों ने न तो मास्क पहने और न ही सामाजिक दूरी का पालन किया गया। ऐसे में इन धरना प्रदर्शनों में कोरोना संक्रमित किसी व्यक्ति के शामिल होने से बड़ी संख्या में लोग इस संक्रमण की चपेट में आ सकते हैं। पहले से ही इन राज्यों में हर रोज बड़ी संख्या में कोरोना के मामले आ रहे हैं।

पंजाब में रेलवे ट्रैक पर डटे हैं किसान

पंजाब में हालांकि किसानों ने वीरवार से ही अपना आंदोलन शुरू दिया था और वे राज्य के गुजरने वाली अनेक रेल लाईनों पर अनिश्चितकालीन धरनों पर बैठ गए। पंजाब में अमृतसर, फिरोजपुर और नाभा में किसान रेल लाईनों पर बैठ गए हैं। अमृतसर के जंडियाला के देवीदासपुर गांव के निकट अमृतसर-दिल्ली रेल ट्रैक पर तथा फिरोजपुर छावनी स्टेशन के निकट बस्ती टैंकवाली और नाभा स्टेशन के निकट टेंट लगाकर किसानों ने अनिश्चितकालीन धरना शुरू कर दिया है। धरना स्थलों पर किसानों के खाने पीने की व्यवस्था के लिए लंगर भी शुरू किए गए हैं।

हरियाणा-पंजाब में रेल लाईनों की सुरक्षा बढ़ी

रेलवे ने दोनों राज्यों से गुजरने वाली 20 से ज्यादा रेलगाड़ियों का आवागमन शनिवार तक रद्द कर दिया गया है। अमृतसर से चलने वाली 12 गाड़ियां रद्द कर दी गईं और अमृतसर पहुंचने वाली ट्रेनों को अम्बाला में ही रोक दिया गया है। कुछ गाड़ियों के रूट में परिवर्तन किया गया है। दोनों राज्यों में रेल लाईनों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है और वहां पुलिस, केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल(सीआरपीएफ) और सादी वर्दी में सुरक्षाकर्मी तैनात किए गए हैं। दोनों राज्यों में बंद के दौरान कानून व्यवस्था बनाए रखने तथा संवेदनशील स्थलों पर बड़ी संख्या में पुलिसकर्मी तैनात किए गए हैं।

क्या है किसानों की चिंता

किसानों की असली चिंता एमएसपी और कृषि मंडियों को लेकर है। उन्हें डर है कि नए बिल के प्रावधानों की वजह से कृषि क्षेत्र पूंजीपतियों और कॉर्पोरेट घरानों के हाथों में चला जाएगा। कुछ संगठन और सियासी दल चाहते हैं कि एमएसपी को बिल का हिस्सा बनाया जाए ताकि अनाज की खरीदारी न्यूनतम समर्थन मूल्य से नीचे ना हो।

इन बिल के कारण बवाल

संसद के दोनों सदनों ने जिन दो विधेयकों पर मुहर लगाई है, उनमें पहला कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) विधेयक 2020 और दूसरा कृषक (सशक्तिकरण व संरक्षण) कीमत आश्वासन और कृषि सेवा पर करार विधेयक 2020 शामिल हैं। इन्हीं दोनों बिल को लेकर किसान सड़क पर हैं।

आजादी के बाद किसानों के उत्थान के नाम पर खोखले नारे दिए गए

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने शुक्रवार को कहा कि आजादी के बाद दशकों तक किसान और श्रमिकों के उत्थान के नाम पर देश और राज्यों में अनेक सरकारें बनीं लेकिन उनकी समस्याओं का समाधान नहीं किया गया। प्रधानमंत्री ने जनसंघ के स्थापकों में से एक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की जयंती के अवसर पर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ताओं को सम्बोधित करते हुए कहा कि किसानों, मजदूरों और महिलाओं के उत्थान के नाम पर खोखले नारे दिए गए।

पश्चिम उत्तर प्रदेश: यहां के किसान मंडियों पर निर्भर नहीं

पश्चिमी उत्तर प्रदेश में किसान आंदोलन का असर हरियाणा और पंजाब जैसा नहीं दिख रहा है, इसके जवाब में भारतीय किसान यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष और महेंद्र सिंह टिकैत के बेटे राकेश टिकैत कहते हैं, ‘जिस तरह हरियाणा और पंजाब में किसान मंडियों पर निर्भर है उस तरह यहां किसान मंडियों पर निर्भर नहीं है क्योंकि इस इलाके में अधिकतर किसान गन्ने की खेती करते हैं। उन्होंने कहा लेकिन यहां के किसान पंजाब और हरियाणा के किसानों के साथ है और किसानों के भारत बंद में हिस्सा ले रहे हैं।’

हरियाणा: भारत बंद का दिखा असर

केन्द्र सरकार द्वारा पारित तीन कृषि विधेयकों के खिलाफ किसानों के भारतबंद का सरसा, हिसार, पानीपत, गुरुग्राम, कैथल, जींद, अम्बाला में व्यापक असर देखने का मिला। भारत बंद के तहत शहर की अधिकतर दुकानों के शटर डाउन रहे। किसानों के भारत बंद का कांग्रेस पार्टी के अलावा विभिन्न कर्मचारी संगठनों, महिला संगठनों ने भी अपना समर्थन दिया।

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