- सरपंच एसोसिएशन की प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष बैनीवाल खुद ट्रैक्टर चला कर धरना स्थल पर पहुंची।
- चौपटा तहसील कार्यालय में किसानों ने सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर किया प्रदर्शन
चौपटा भगत सिंह। नाथुसरी चौपटा में किसानों ने मांगों को लेकर बुधवार को ट्रैक्टर मार्च निकलकर रोष प्रदर्शन किया। इसके बाद किसानों ने तहसील कार्यालय में प्रदेश सरकार के खिलाफ नारेबाजी कर प्रदर्शन किया। ट्रैक्टर मार्च गांव दड़बा से चौपटा तहसील कार्यालय तक निकाला गया। ट्रैक्टर मार्च का नेतृत्व भारतीय किसान यूनियन महासचिव अमन बैनीवाल व सरपंच एसोसिएशन की प्रदेश उपाध्यक्ष संतोष बैनीवाल ने किया। संतोष बैनीवाल खुद ट्रैक्टर चला कर धरना स्थल पर पहुंची।
किसानों की बीच पहुंच कृषि विभाग के अधिकारी
नाथूसरी चौपटा तहसील कार्यालय में बुधवार को किसानों ने मांगों को लेकर धरना जारी रखा। किसानों के बीच कृषि विभाग के एसडीओ डा. सुखदेव सिंह मौके पर पहुंचे। उन्होंने किसानों को आश्वासन दिया। उन्होंने किसानों को जल्द ही बीमा क्लेम दिलाने की बात कही। मगर किसानों ने कहा कि जब तक मांग पूरी नहीं होगी। किसानों का संघर्ष जारी रहेगा। बता दें कि इससे पहले भी कृषि विभाग के उपनिदेशक डा. बाबूलाल चार दिन पहले किसानों के बीच पहुंचे थे। उन्होंने जैसे ही बीमा कंपनी के कर्मचारियों को मौके पर बुलाना चाहा। उन्होंने धरना स्थल पर आने से जहां मना कर दिया। वहीं कर्मचारियों ने कहा कि हम आपके अधीन नहीं है। इससे किसानों का भी बीमा कंपनी के प्रति रोष बढ़ा गया।

जब तक मांग पूरी नहीं होगी किसानों का धरना जारी रहेगा
भारतीय किसान यूनियन के जिला अध्यक्ष भरत सिंह झाझड़ा व महासचिव अमन बैनीवाल ने कहा कि किसानों की मांगों पर कोई ध्यान नहीं दिया जा रहा है। किसानों की हालत दिन प्रतिदिन दयनीय होती जा रही है। जबकि सरकार कोई ध्यान नहीं दे रही है। उन्होंने कहा कि किसानों की मांग 2022 का बीमा क्लैम व मुआवजा जारी किया जाए, सीएससी सेंटर के द्वारा रद्द हुए बीमे को बहाल करें, गेहूं व सरसों की समय पर खरीद व समय पर भुगतान किया जाए। हर साल बीमा व मुआवजा देने की निश्चित तिथि तय की जाए। जब तक मांग पूरी नहीं होगी। तब तक धरना प्रदर्शन जारी रहेगा। इस अवसर पर किसान नेता दिवान सहारण, नरेंद्र, जगदीश चाड़ीवाल, जगत पाल चाहरवाला, संदीप कासनियां, सुंदर शाहपुरिया, नेशी औलख, देव कुमार, रोहताश कुमार, सुरेंद्र कासनिया, रविंद्र कासनिया मौजूद रहे।