किसानों ने लिया फसल अवशेष न जलाने का प्रण

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Farmers took a pledge sachkahoon

एक दिवसीय कार्यशाला का हुआ आयोजन

  • प्रदेश सरकार पराली प्रबंधन मशीनों पर दे रही 50 से 80% तक सब्सिड़ी : कृषि अधिकारी

सच कहूँ/इन्द्रवेश, भिवानी। अब हरियाणा के किसान एयर क्वालिटी इंडेक्स यानि वायु गुणवत्ता सूचकांक को समझने लगे हैं। आज भिवानी के पंचायत भवन में कृषि विभाग द्वारा फसलों के अवशेष न जलाने को लेकर एक दिवसीय कार्यशाला का आयोजन किया गया। जिसमें पहुंचे किसानों को वायु गुणवत्ता सूचकांक की जानकारी भली-भांति थी। भिवानी जिले से 250 के लगभग किसानों ने इस दिवसीय कार्यशाला में पहुंचकर फसलों के अवशेष प्रबंधन को लेकर विशेष ट्रेनिंग ली तथा वायु की गुणवत्ता को बनाए रखने का प्रण लिया व फसल अवशेष न जलाने की बात कही।

जिला उप कृषि निदेशक डॉ. आत्माराम गोदारा व एडीओ डॉ. अनिल बिबियान ने बताया कि कार्यशाला का उद्देश्य जिले के किसानों को गेहूं, धान व अन्य फसल अवशेष न जलाने को लेकर किया गया है। उन्होंने बताया कि आधुनिक मशीनों रोट्रोवेटर, सुपरसीडर, जीरो ड्रिल आदि मशीनों का प्रयोग करके किसान फसलों के अवशेष का प्रबंधन दो तरीकों से कर सकता है। पहले तरीके में फसल अवशेषों को काटकर जमीन के अंदर दबाकर खाद बनाने के रूप में तथा दूसरे फसल अवशेष के बंडल बनाकर उनका प्रयोग गत्ते, फट्टे व पशु चारा बनाने में कर सकता है। इससे फसल अवशेष के उचित प्रबंधन से किसानों का प्रति एकड़ उत्पादन पांच से सात मण बढ़ता है तथा वातावरण भी स्वच्छ रहता है। इसके लिए अब तक भिवानी जिला में 470 किसानों को फसल अवशेष प्रबंधन की मशीनें 50 से 80 प्रतिशत सब्सिडी पर दी गई हैं तथा जो किसान मशीनें नहीं खरीद सकते, वे जिले में बनाए गए 10 कस्टम हायर सैंटर से किराये पर लेकर प्रयोग कर सकते हैं।

किसान नरेंद्र, प्रदीप, धर्मबीर, माईराम व सज्जन कुमार ने बताया कि कार्यशाला से उन्हें गेहूं व धान के भूसे सहित अन्य फसलों के अवशेष की उचित प्रबंधन की जानकारी प्राप्त हुई हैं। किसानों ने बताया कि वे एयर इंडेक्ट क्वालिटी को अब समझने लगे हैं तथा उन्हें पता है कि फसल अवशेष जलाने से भारी प्रदूषण होता है, जिसका खामियाजा उन्हीं के परिवार के बड़े, बूढ़ों व बच्चों को होता है तथा सांस संबंधी बीमारियों का सामना करना पड़ता है।

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