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Friday, April 3, 2026
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    किसानों ने सरकार का प्रस्ताव किया खारिज

    Farmers

    नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। कृषि कानूनों के विरोध में दिल्ली की सीमाओं पर डटे किसान संगठनों ने सरकार के प्रस्ताव को खारिज किया और सर्वोच्च राजनीतिक स्तर पर वार्ता की मांग करते हुए आने वाले दिनों में दिल्ली की सभी पांचों सीमाओं पर विरोध प्रदर्शन तेज करने की बात कही है। किसान संगठनों ने बैठक के बाद केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के उस प्रस्ताव भी रविवार को ठुकरा दिया है, जिसमें उन्होंने बुराड़ी में मुहैया कराई गई जगह पर सभी किसानों के इकट्ठा होने के बाद बातचीत शुरू करने की बात कही थी। इतना ही नहीं किसान संगठनों ने यह भी फैसला किया है कि बुराड़ी पहुंचे किसान भी वापस सिंघु बॉर्डर लौटेंगे। किसानों ने कहा कि टिकरी बॉर्डर और सिंघु बॉर्डर तो सील कर दिया गया है।

    दिल्ली जाने वाले रास्ते करेंगे ब्लॉक

    इसके अलावा आने वाले दिनों में हापुड़, आगरा और जयपुर रोड को भी सील किया जाएगा। पंजाब, हरियाणा और राजस्थान से आए हजारों किसान सिंघु और टीकरी बॉर्डर पर विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं। शाह ने किसानों से धरने के लिए निर्धारित बुराड़ी स्थित संत निरंकारी मैदान में पहुंचने की अपील की थी। उन्होंने कहा था कि निर्धारित स्थल पर पहुंचने के अगले ही दिन वार्ता होगी वहीं, किसानों ने अमित शाह की इस शर्त को ठुकरा दिया है। किसान नेताओं ने गृह मंत्रालय और खुफिया एजेंसियों के माध्यम से आंदोलनकारियों से वार्ता के प्रयास की निन्दा कर सर्वोच्च राजनीतिक स्तर पर वार्ता की मांग करते हुए कहा कि सरकार तीन किसान विरोधी, जनविरोधी कानूनों को तत्काल रद्द करे।

    उन्होंने कहा कि देश के किसानों ने तय करके दिल्ली में भारी संख्या में विरोध जताया क्योंकि सरकार ने सितम्बर से जारी किये गये उनके ‘दिल्ली चलो’ आह्नान के बाद हुए देशव्यापी विरोध कार्यक्रमों पर कोई ध्यान नहीं दिया। उन्होंने स्थानीय स्तर पर देश भर में बहुत सारे विरोध आयोजित किये, जबकि दिल्ली के आसपास के किसान राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली की ओर आगे बढ़ रहे हैं। किसानों ने दिल्ली पहुंचने की बहुत विस्तारित तैयारी की हुई है पर उन्हें एक दमनकारी अमानवीय व असम्मानजनक हमलों का सामना करना पड़ा है, जिसमें सरकार ने उनके रास्ते में बहुत सारी बाधाएं डालीं, पानी की बौछारें की, आंसू गैस के गोले दागे, लाठीचार्ज किया और राजमार्ग खोद दिये। सरकार में पैदा हुए अविश्वास और भरोसे की कमी के लिए सरकार खुद भी जिम्मेदार है।

     

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