मिट्टी में न मिल जाए ‘पीला सोना’ कच्ची मंडियां बनी परेशानी

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Froblems of Farmers

चिंताजनक। मुख्य अनाज मंडी व खरीद केंद्रों के बीच ज्यादा दूरी से बढ़ रहा किसानों का खर्चा (Problems of farmers)

  • फर्रूखनगर क्षेत्र में खरीद केंद्रों पर सुविधाओं का अभाव

संजय मेहरा/सच कहूँ  गुरुग्राम। अपने देश की धरती का सीना चीरकर फसल रूपी सोना उगाने वाले किसान को जब अपनी फसल मिट्टी में मिलती दिखी तो उसने माँ, बहनों की चुनरी फसल के नीचे बिछा दी। वह अपनी फसल की दुर्गति पर दुखी है पर कोई सुनने वाला नहीं है। कोरोना संक्रमण को लेकर सोशल डिस्टेंस के चलते मंडियों बाहर बनाए गए खरीद केंद्रों में जमीन कच्ची है और आसपास झाड़ियां खड़ी हैं। ऐसे में किसान परेशान है।

फर्रूखनगर मार्केट कमेटी की ओर से ग्रामीण क्षेत्रों में पांच नए खरीद केंद्र बनाए गए हैं। इन खरीद केंद्रों को बनाने से पहले शायद वहां जाकर किसी ने देखा नहीं। अगर जाकर देखते तो शायद ही वहां केन्द्र बनाए जाते। पाँच केन्द्रों में से एक केन्द्र यहां बिरहेड़ा मोड़ पर गांव के खेल स्टेडियम में बनाया गया है। स्टेडियम की जगह कच्ची है, यहां तक तो ठीक है, लेकिन वहां कांटेदार पेड़ यानी काबली किक्कर उगी हुई हैं।

  • वहां कोई अपनी फसल डाले तो भी कैसे।
  • कच्ची जमीन में रेत ही रेत है।
  • नीचे बिछाने का भी कुछ उपलब्ध नहीं कराया गया है।
  • जिससे कि किसान अपनी गेहूं की फसल उस पर डाल सकें।
  • ऐसे में वे अपने घरों से मां, बहनों की चुनरियां लेकर आ रहे हैं।
  • और उन्हें जोड़कर बिछाते हुए अपनी फसल डाल रहे हैं।
  • कुछ किसान अपने घरों से तिरपाल लेकर आ रहे हैं।

15 किलोमीटर का आना-जाना भी अखर रहा

बिरेहड़ा के स्टेडियम में समस्याओं के साथ एक और समस्या है, वह है किसानों को अपनी फसल का वजन कराने के लिए फर्रूखनगर कस्बे के भीतर आने-जाने की। (Problems of farmers) किसानों को करीब 15 किलोमटीर चलकर वजन के लिए आना पड़ता है और फिर वजन कराकर 15 किलोमीटर ही वापस। ऐसे ही फिर ट्रॉली खाली करके खाली का वजन कराने आना पड़ता है। इस तरह से किसानों का यह 60 किलोमीटर का चक्कर और खर्चा बेकार में ही लग रहा है। यह सीधे तौर पर उन्हें नुकसान ही है।

पातली स्टेडियम में बने केंद्र में भी दिक्कत

दूसरा केंद्र पातली गांव के स्टेडियम में बनाया गया है। वहां पर भी इसी तरह की समस्याएं हैं। फर्रूखनगर से पांच किलोमीटर दूर है। चार चक्कर लगाने से यह 20 किलोमीटर का सफर हो जाता है। पातली स्टेडियम में भी सुविधाओं का अभाव है। यहां दो-तीन तिरपाल है, जिस पर कुछ ही किसानों की फसल डाली गई है।

  • बाकी के किसानों की फसलें राम भरोसे हैं।
  • कुछ ऐसा ही हाल बाकी के तीन केंद्रों सुल्तानपुर, डाबोदा और मुशेदपुर का है।
  • यहां से किसानों को फसल का वजन कराने को 24 किलोमीटर का सफर तय करना पड़ता है।

क्या कहते हैं मार्केट कमेटी के चेयरमैन

फर्रूखनगर मार्केट कमेटी के चेयरमैन विरेंद्र यादव से किसानों की समस्याओं को लेकर जब बात की गई तो उन्होंने कहा कि मंडी में कब, क्या हो रहा है, उन्हें ऐसी कोई जानकारी दी ही नहीं जाती। कब किस गांव की सरसों खरीदी जाएगी, इस सूची को बनाते समय उनसे कोई सलाह नहीं ली जाती। किसान लगातार उन्हें फोन करते रहते हैं। उन्होंने कहा कि इस बारे में उन्होंने मुख्यमंत्री, कृषि मंत्री, मार्केट बोर्ड के अधिकारियों को अवगत करा दिया है।

  • किसानों की एक-एक समस्या को उन्होंने मुख्यमंत्री को पत्र क्रमांक नंबर-240 भेजा है।
  • उम्मीद है सरकार की ओर से राहत मिलेगी।

मना किया था यहां ना बनाएं केन्द्र

किसानों और शासन-प्रशासन के बीच चेयरमैन विरेंद्र यादव ने एक और खुलासा करते हुए कहा कि उन्होंने बिरहेड़ा मोड़, पातली और सुल्तानपुर में बनाए गए खरीद केंद्रों को न बनाने के लिए उच्च अधिकारियों को पत्र लिखकर कहा था। यहां की समस्याओं से अवगत कराया गया था। (Problems of farmers) फिर भी अधिकारियों ने मनमानी करके यहां पर केंद्र बना दिए। इससे किसानों की सुविधा की बजाय दुविधा हो गई है।

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