महंगी सब्जियां बनी परेशानी का सबब

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Vegetable Prices

कोरोना महामारी में व्यापार, रोजगार की कमी के बाद सब्जियों की महंगाई ने लोगों को चहुं ओर से घेर लिया है। प्याज 35-40 रुपए और टमाटर 100 रुपए को पार कर गया है। निर्माण कार्य रुकने व उद्योगों की धीमी रफ्तार के कारण मजदूर वर्ग बुरी तरह से फंस गया है। गरीब व मध्यम वर्ग के लिए सब्जियां खरीदना पहुंच से दूर होता जा रहा है। एक माह पूर्व यही प्याज 15-20 रुपए किलो बिक रहा था। यूं तो प्याज की कीमतों में उछाल 80 रुपए तक भी आता रहा है और कई बार यह मुद्दा राजनीति में भी चर्चा का विषय बनता रहा है। निर्यात पर प्रतिबंध के बावजूद प्याज की कीमतों में वृद्धि हो रही हैं। भले ही प्याजों के दाम बढ़ने का कारण फसल खराब होना बताया जा रहा है लेकिन इसका वास्तविक्त कारण जमाखोरी है।

जमाखोर यह जानते हैं कि अगस्त सितम्बर तक बारिश के कारण दक्षिणी भारत में प्याज की आपूर्ति घट जाती है और जमाखोर इसका पूरा फायदा उठाते हैं। भले ही प्याज की कीमतों के कारण सरकारें भी पलटती रही हैं लेकिन आम दिनों में कोई भी राजनीतिक दल इस मुद्दे पर आवाज नहीं उठाता, सब हाथ पर हाथ रखकर बैठे रहते हैं। केवल उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री ने ही जमाखोरी को रोकने के लिए आदेश दिए हैं, अधिकतर राज्यों की सरकारों के लिए यह कोई मुद्दा ही नहीं। विगत वर्षों में किसानों ने प्याज डेढ़ रुपए प्रति किलो की कीमत में भी मुश्किल से बेचा था, किसान बर्बाद हो गए लेकिन जमाखोर मालोमाल हो गए। यह मामला इस कारण भी गंभीर है कि संसद में आवश्यक वस्तुओं से संबंधित नया बिल पास होने के बाद जमाखोरी अपराध नहीं रह जाएगी। नए बिल के अनुसार कीमतों पर नियंत्रण रखना ओर भी मुश्किल हो जाएगा।

अधिक पैसे वाला व्यापारी अधिक स्टाक कर मनमर्जी से पैसे वसूल करने का प्रयास करता रहेगा। कीमतों पर नियंत्रण के लिए नए दिशा-निर्देश तैयार करना और भी मुश्किल हो जाएगा। यदि यह कहा जाए कि प्याजों की कीमतों में मौजूदा वृद्धि तो एक ट्रेलर है, कोई झूठ नहीं होगा। व्यापारियों को सुविधा देना आवश्यक है लेकिन लोगों की लूट रोकना भी चुनौती होगा। इससे सब्जियों के उत्पादन संबंधी नीतियों को मजबूत करने की आवश्यकता है। प्याज उत्पादक हर साल फसल खराब होने या कम कीमतों के कारण बर्बाद होते रहे हैं। सब्जियों के लिए किसान को बीज, तकनीक के साथ-साथ भंडारन की सुविधा को बढ़ाने के लिए सरकार को ज्यादा सब्सिडी देनी चाहिए। सही उत्पादन और भंडारन के साथ फसल की बर्बादी भी घटेगी।

 

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