सम्पादकीय

ऊर्जा को सही दिशा देनी होगी

Energy must be given the right direction

दुनिया में तेजी से हो रहे विकास की वजह से ऊर्जा की मांग लगातार बढ़ती जा रही है। उद्योग, स्वास्थ्य सेवाएं, शिक्षा, विज्ञान, रिसर्च आदि क्षेत्रों में हो रहे विकास और लोगों की बढ़ती महत्वकांक्षाओं को मूर्त रूप देने के लिए संसाधनों का तेजी से दोहन हो रहा है। यह एक चिंता का विषय है, क्योंकि हम रोजमर्रा से जुड़ी तमाम कार्यकलापों के लिए ऊर्जा के विभिन्न स्रोतों पर पूरी तरह से आश्रित हो चुके हैं और इनमें से अधिकतर संसाधन असीमित नहीं हैं। चूंकि ऊर्जा सीमित है इसलिए हमें अपनी आवश्यकताएं भी सीमित करनी पड़ेंगी। साथ ही, लोगों को यह भी समझना होगा कि जितना ज्यादा से ज्यादा वह ऊर्जा स्रोतों की बचत करेंगे, भविष्य में वह उतना ही उनके काम आएगी। आज जीवन का शायद ही कोई ऐसा क्षेत्र है जहां विद्युत की आवश्यकता न पड़ती हो। आज आजादी के सात दशकों के बाद भी हिन्दुस्तान के करोड़ों लोग अंधेरे में जीवन यापन करने पर मजबूर हैं। बिजली का उत्पादन बढ़ने के बावजूद जिस प्रकार से जनसंख्या तीव्र गति से बढ़ रही है और संसाधनों का दोहन हो रहा है, उससे हर घर तक बिजली पहुंचाने का लक्ष्य मुश्किल है।

सितंबर 2017 के दौरान लगभग 77.2 प्रतिशत थर्मल से, 12.8 प्रतिशत हाइड्रो से, परमाणु ऊर्जा से 2.4 प्रतिशत और 7.6 प्रतिशत अन्य स्रोतों से (जिनमें बायो मास, सोलर और विंड प्रमुख हैं) बिजली का उत्पादन हुआ। आज संपूर्ण विश्व में थर्मल पावर से निर्मित बिजली, ग्लोबल वार्मिंग और वातावरण में उत्सर्जित होने वाली कई हानिकारक गैसों के चलते होने वाले वायु प्रदूषण के कारण एक गहन चिंता का विषय बनी हुई है, यहां तक कि जीवाश्म ईंधन होने के कारण कोयले के भंडार भी सीमित हैं, हाइड्रो को भी हमने पूरी तरह से लगभग दोहन कर लिया है, साथ ही पवन और सौर ऊर्जा की अपनी अपनी सीमाएं हैं। सौर और पवन की उत्पादन क्षमता, ज्यादा जगह, धूप और हवा के प्रवाह की समुचित उपलब्धता पर निर्भर हैं।

ऐसे में परमाणु ऊर्जा एक स्वच्छ और हरित ऊर्जा का किफायती विकल्प साबित हो रहा है, जो बिना किसी प्रदूषण के बड़े पैमाने पर 24 घंटे बिजली का उत्पादन करने में सक्षम है। इसके लिए बहुत ही कम मात्रा में ईंधन की आवश्यकता होती है जिससे अपशिष्ट (कचरा) भी बहुत कम मात्रा में निकलता है। जहां दिल्ली और मुंबई सरीखे महानगरों के लिए कोयले से एक दिन के बिजली के निर्माण में लाखों टन कचरा उत्पन्न होता है वहीं दूसरी ओर परमाणु ऊर्जा से बनने वाली बिजली से नगण्य मात्रा में हाई लेवल रेडियो एक्टिव कचरा निकलता है। आज भारत में 22 परमाणु बिजली घर कई वर्षों से सुरक्षित तरीके से चलाए जा रहे हैं जिनसे लगभग 6780 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो रहा है। ऐसे में, ऊर्जा उत्पादन, उपलब्ध ऊर्जा का संरक्षण और ऊर्जा को सही दिशा देना जरूरी है। ऊर्जा को बचाने के लिए हमेशा छोटे कदमों की जरूरत होती है, जिनके असर बड़े होते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि ऊर्जा संरक्षण उपायों से देश भर में 25,000 मेगावाट बिजली की बचत की जा सकती है।

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