अर्थव्यवस्था व स्वदेशी को प्रोत्साहन सराहनीय

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Encouragement of economy and indigenous is commendable
केन्द्र सरकार ने कोविड-19 के कारण बुरी तरह त्रस्त हो चुकी आर्थिकता को गति देने के लिए 20 लाख करोड़ के वित्तीय पैकेज की घोषणा की है। बंद पड़ी फैक्ट्रियों व कंपनियों को दोबारा चालू करने के लिए वित्तीय मदद की आवश्यकता थी। नए कारोबारियों के लिए और विशेष तौर पर 100 करोड़ से कम टर्न ओवर वालों को ऋण की सुविधा देना लाभदायक साबित होगा। लॉकडाउन के कारण सरकार की जीएसटी वसूली बुरी तरह प्रभावित हुई है। मार्च से पहले जीएसटी वसूली एक लाख करोड़ की उम्मीद थी, जो अब घटकर 28000 करोड़ रह गई है।
इससे स्पष्ट है कि उत्पादन और बिक्री बंद होने से सरकारी खजाने में पैसा आना बंद हो रहा था। इससे पहले सरकार ने बाजार खोलने की मंजूरी दे दी है, जिससे मांग बढ़ेगी और उत्पादन भी बढ़ने लगेगा। उत्पादन शुरू होने से बेरोजगारी में गिरावट आनी शुरू होगी। लेकिन यह भी आवश्यक है कि ऋण का दुरुपयोग भ्रष्ट लोग न कर जाएं। केंद्रीय वित्त मंत्री ने 20 लाख करोड़ के पैकेज की पूरी जानकारी अभी देनी है, अत: अभी विपक्षी पार्टियां कोई टिप्पणी करने के लिए पूरी घोषणाओं का इंतजार करेंगी। भारतीय कंपनियों को बाजार में अवसर मिलेगा यहां सरकार ने एक ही समय पर एक तीर से दो निशाने साधने का प्रयास किया है। स्वदेशी के माध्यम से चीन को साधने की भी कोशिश की है। यहां यह आवश्यक है कि केंद्र सरकार आर्थिक पैकेज की घोषणा जल्द से जल्द करे ताकि व्यापारियों /उद्योगपतियों में पसरा निराशा का आलम समाप्त हो। नि:संदेह 20 लाख करोड़ रूपये का पैकेज सरकार का एक बड़ा फैसला है जोकि जीडीपी का दस प्रतिशत के बराबर है।
परन्तु यहां सरकार का तंत्र थोड़ा धीमा है, जब पूरा बजट कुछ घंटों में ही पेश हो जाता है तब महामारी के वक्त में राहत की घोषणाओं को लटका-लटकाकर क्यों पेश किया जा रहा है? क्या सरकार की तैयारी पूरी नहीं है? ऐसे तो पूरी घोषणा करने के लिए कई दिनों का वक्त राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप में ही घिरा रहेगा, लोग कब समझेंगे। फिर भी सरकार ने आत्मनिर्भर भारत का नारा देकर स्वदेशी को प्रोत्साहन देने की कोशिश की है, वह सराहनीय है। अब आर्मी कैन्टीन्स पर स्वदेशी सामान ही बेचा जाएगा। आमजन को भी चाहिए कि वह खुलकर स्वदेश निर्मित वस्तुएं खरीदें एवं विदेशी को तब खरीदें जब स्वदेशी न मिले।

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