सम्पादकीय

विद्युत वाहन समय की जरूरत

Electric Vehicle Time Requirement

अमेरिकी वैज्ञानिकों ने एक खोज में दावा किया है कि किसी भी वाहन को बिजली से एक बार चार्ज करने के बाद 800 किलोमीटर (Electric Vehicle Time Requirement) तक की दूरी तय कर सकते हैं। भले ही यह अमेरिकी वैज्ञानिकों का दावा है लेकिन इसका विश्व भर के सभी देशों को संज्ञान लेना चाहिए। इस तकनीक को और ज्यादा विकसित करने की आवश्यकता है। भारत, चीन, जापान सहित विश्व के बहुसंख्यक देश न केवल प्रदूषण की मार झेल रहे हैं, बल्कि तेल कीमतों में विस्तार मध्यम वर्ग, व्यापारियों, उद्योगपतियों के लिए मुसीबत बना हुआ है।

दिल्ली, टोक्यो, बीजिंग में हवा प्रदूषण का स्तर बेहद खतरनाक स्तर पर पहुंच जाता है कि लोगों का जीना दुर्भर हो गया है। दिल्ली के (Electric Vehicle Time Requirement) करोड़ों की संख्या में अपने वाहन हैं और लाखों वाहन बाहर के राज्यों से आते हंै। मेट्रो सेवा के बावजूद सड़कों पर वाहन कीड़ों की तरह रेंगते नजर आते हैं, दूसरी तरफ तेल की कीमतें सरकारें बनाने-गिराने में अहम भूमिका निभाती है। हमारे देश के राजनेता आरोप-प्रत्यारोप में तो उलझे रहते हैं किंतु स्वार्थ से ऊपर उठकर देश की भलाई के लिए कोई नई पहल करने की हिम्मत नहीं करते। हालात यह हैं कि यदि तेल सस्ता भी हो जाए तो स्वास्थ्य के पहलू से इसका बढ़ रहा प्रयोग अपने आप में बड़ी समस्या बनेगी।

प्रदूषण से निजात पाने के लिए सोलर व बिजली से चलने वाले वाहनों की जरूरत है। नि:संदेह बिजली वाले कुछ दुपहिया वाहन आए हैं लेकिन उनकी रफ्तार में कमी बार-बार चार्जिंग की समस्या के कारण यह लोगों की पसंद नहीं बन सके। यदि सरकारें तकनीक विकसित करने के लिए अनुदान मुहैया करवाएं और वैज्ञानिकों का हौंसला बढ़ाए तब कोई परिवर्तन संभव है। यदि इस दिशा में कोई ठोस कदम न उठाए गए तो तेल कीमतों में वृद्धि की समस्या के साथ-साथ हवा प्रदूषण की समस्या भारतवासियों के स्वास्थ्य के लिए घातक बन जाएगी। देश में वैज्ञानियों की कमी नहीं। देश में अधिकतर लोगों का हुनर व प्रतिभाएं पैसे की कमी के कारण दबे रहते हैं। मेक इन इंडिया का नारा देने वाली सरकार को विदेशों की तरफ झांकने की बजाए अपने वैज्ञानिकों को उत्साहित करने की जरूरत है।

तेल कीमतों व प्रदूषण की समस्या कोई राजनैतिक समस्या नहीं इसका वैज्ञानिक स्तर पर समाधान किया जाना चाहिए। हजारों अरबों के अनुदान से चलने वाले विज्ञान केंद्र व यूनिवर्सिटियों को देश की समस्याओं के समाधान के लिए ईस्तेमाल किया जाना चाहिए।

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