दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित थी उनकी बेटी
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कश्मीर की रहने वाली महिला का गुरुग्राम में किडनी व लीवर प्रत्यारोपित
सच कहूँ/संजय मेहरा, गुरुग्राम। कश्मीर के रहने वाले एक माता-पिता ने अपनी बेटी को किडनी व लीवर (Kidney and Liver) डोनेट करके उम्र के इस पड़ाव पर एक बार फिर से माता-पिता होने का फर्ज अदा किया है। चिकित्सकों के लिए यह बड़ी चुनौती थी। दोनों अंगों का एक साथ प्रत्यारोपण और बुजुर्गों से अंग लेना काफी जटिल काम था। आम तौर पर एक अंग प्रत्यारोपण की तुलना में संयुक्त (दो अंग) प्रत्यारोपण कठिन है। इसमें रोगियों की मृत्यु दर भी बहुत अधिक है। फिर भी यहां दुर्लभ आनुवांशिक बीमारी से पीड़ित महिला के दोनों अंग प्रत्यारोपित किए गए।
कश्मीर के सोपोर की रहने वाली 37 वर्षीय महिला मरीज को लगातार सिर दर्द और उल्टी होती थी। शुरूआत में यह पता लगाना मुश्किल था कि समस्या क्या है। जांच के बाद पता चला कि वह आनुवांशिक गंभीर बीमारी से पीड़ित है। जन्म के समय से ही वह दुर्लभ अनुवांशिक बीमारी हाइपरॉक्सालुरिया से पीड़ित थी। महिला मरीज के माता-पिता ने कहा कि वे अपनी बेटी के लिए वे कुछ भी करने को तैयार थे।
उसकी जान बचाना ही उनके जीवन का मकसद था। अपनी आँखों के आगे बेटी को बीमारी से जूझते नहीं देख सकते थे। ऐसे में उन्होंने अपनी पत्नी (महिला मरीज के माता-पिता) के साथ किडनी और लीवर (Kidney and Liver) बेटी को डोनेट करने का निर्णय लिया। यहां आर्टेमिस अस्पताल में 16 घंटे की चुनौतीपूर्ण सर्जरी करके महिला की किडनी व लीवर का ट्रांसप्लांट किया गया।
इस बीमारी से लीवर व किडनी होते हैं प्रभावित
यहां आर्टेमिस अस्पताल के किडनी ट्रांसप्लांट के सीनियर कंसल्टेंट डॉ. वरुण मित्तल व चीफ लीवर ट्रांसप्लांट डॉ. गिरिराज बोरा इस बीमारी से लीवर शरीर की आवश्यकता से अधिक मात्रा में ऑक्सालेट नामक एक प्राकृतिक रसायन का उत्पादन करता है, जो एक एंजाइम दोष की वजह बनता है। इस बीमारी से लीवर व किडनी सीधे प्रभावित होते हैं। अतिरिक्त ऑक्सालेट कैल्शियम के साथ मिलकर किडनी में पथरी और क्रिस्टल बनाता है, जो उन्हें नुकसान पहुंचा सकता है। काम करना बंद कर सकता है। रोगी वर्षों तक अपनी स्थिति से अनजान रही।
नहीं तो उम्र भर डायलिसिस की होती जरूरत
श्रीनगर के एक अस्पताल के डॉक्टरों ने मरीज की किडनी की बीमारी के अंतिम चरण के रूप में निदान किया और उसे डायलिसिस पर रखा। उन्होंने सिफारिश की कि वह एक प्रत्यारोपण का विकल्प चुनें और एक नया लीवर (ऑक्सालेट के अधिक उत्पादन को रोकने के लिए) और एक नई किडनी लगवाएं। किडनी प्रत्यारोपण नहीं होने की स्थिति में उसे जीवन भर के लिए डायलिसिस की आवश्यकता होती। डॉ. गिरिराज बोरा के मुताबिक लीवर और किडनी का एक साथ प्रत्यारोपण चिकित्सा क्षेत्र में सबसे जटिल और जोखिम भरी प्रक्रियाओं में से एक है। फिर भी उन्होंने अपनी कुशलता से काम किया और इस जटिल काम में सफलता हासिल की। चीफ मेडिकल सर्विसेज एवं चेयरपर्सन नेफ्रोलॉजी डॉ. मंजू अग्रवाल के मुताबिक रोगी अब अच्छा महसूस कर रही है। किडनी प्रत्यारोपण के बाद उसे अब डायलिसिस की आवश्यकता नहीं है।
ऐसे केस में मृत्यु दर है अधिक
डॉक्टर्स के मुताबिक लिवर-किडनी ट्रांसप्लांट में एक मरीज की मृत्यु दर बहुत अधिक होती है। संयुक्त लीवर-किडनी प्रत्यारोपण चिकित्सा क्षेत्र में सबसे जटिल सर्जरी प्रक्रिया में से एक है। मरीज, डोनर और चिकित्सकों की पूरी टीम के अथक प्रयासों के बाद इस जटिल काम में सफलता मिली। डॉक्टर्स ने बुजुर्ग माता-पिता की हिम्मत को भी सलाम किया है, जिन्होंने उम्र के इस पड़़ाव पर आकर इतना बड़ा निर्णय लिया। महिला मरीज ने ट्रांसप्लांट के बाद कहा कि यह वास्तव में वरदान है। उसे एक नया जीवन देने के लिए वह अपने माता-पिता और अस्पताल के डॉक्टर्स की आभारी हैं।
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