गौसेवा का धर्म निभा रहे डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु
कुरुक्षेत्र। (सच कहूँ, देवीलाल बारना) बेशक गाय को माता का दर्जा हिंदुस्तान की संस्कृति में दिया गया हो, लेकिन इस बात से भी इन्कार नहीं किया जा सकता कि ज्यादा दुर्गति का शिकार भी गाय माता ही हो रही है। रोजाना सड़कों किनारे गंभीरावस्था में गायों को देखा जा सकता है और ज्यादातर लोग अनेदखा कर अपने गंतव्य को निकल जाते हैं, लेकिन इन्सानियत धर्म के चलते डेरा सच्चा सौदा के सेवादार घायल पशुओं को ईलाज भी बाखूबी करवा रहे हैं। गत दिवस जब डेरा सच्चा सौदा के मधेड़ी ब्लॉक के सेवादार अमन कुरुक्षेत्र से झांसा होकर गुजर रहे थे तो गांव झांसा में एक गाय सड़क किनारे तड़प रही थी। हालांकि इस वक्त अमन जरूरी काम से जा रहे थे, लेकिन उसने गऊ सेवा को ही सबसे जरूरी काम समझा।
उन्होंने तुरंत रूककर अन्य सेवादारों को मौके पर बुलाया व पशुओं के डॉक्टर को भी मौके पर बुलाया।काफी मशक्कत के बाद गाय का इलाज शुरू किया गया। इस दौरान सभी सेवादार गाय की सेवा में लगे रहे। काफी देर में गाय को होश आया तो गाय खड़ी हो पाई। इसके बाद ही सेवादार अमन, नरेंद्र इन्सां, अविनाश बिजड़पुर, नितेश मंधेरी, नाजिम खान व गगन दीप और अभिषेक अपने गतंव्य को आगे चले।
गौसेवा की पूज्य गुरु जी ने दी है शिक्षा
जिला के 25 मैंबर मा. ओमप्रकाश ने कहा कि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने सभी श्रद्धालुओं को शिक्षा दी है कि गऊ सेवा सबने करनी है। इतना ही नही पूज्य गुरु जी ने पिछले दिनों पहली रोटी गऊ के नाम निकालने की भी साध-संगत को शिक्षा दी है। पूज्य गुरु जी की शिक्षाओं पर अम्ल करते हुए समस्त साध-संगत गऊओं की सेवा कर रही है।
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