डेरा श्रद्धालु ने गुम हुआ पर्स वापिस कर दिया ईमानदारी का सबूत

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Dera devotee returned the lost purse as proof of honesty

पर्स में थी बीस हजार रुपये की नगदी व गहने (Returned the Lost Purse)

सच कहूँ/अनिल लुटावा/अमलोह। जहां आज के दौर में एक हाथ दूसरे हाथ को खाए जा रहा है और जहां आज कई लोग उधार ले कर भी वापिस नहीं करते उस दौर में भी डेरा श्रद्धालु मानवता भलाई के साथ-साथ ईमानदारी की अनोखी मिसाल पेश कर रहे हैं। ऐसी ही एक मिसाल पेश की है अमलोह के डेरा प्रेमी मेघ सिंह इन्सां ने, जिसने पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते आज ही (Returned the Lost Purse) गुम हुआ पर्स वापिस कर इमानदारी का सबूत दिया, उस पर्स में बीस हजार रुपये व गहने आदि थे।

प्राप्त की जानकारी अनुसार बीते दिनों डेरा श्रद्धालु मेघ सिंह इन्सां निवासी अमलोह हर रोज की तरह शाम को सैर पर निकला तो उसे मानगढ़ रोड नजदीक हलवाई की दुकान के नजदीक उसकी नजर एक पर्स पर पड़ी जिस पर डेरा श्रद्धालु ने उस पर्स को उठाकर संभाल लिया और इसकी जानकारी तुरंत बलतेज सिंह इन्सां शहरी भंगीदास को दी, जिस पर तुरंत कार्यवाही करते उनकी तरफ से पर्स के असली मालिक को ढूँढने की कोशिशें शुरू कर दी गई। बलतेज सिंह इन्सां शहरी भंगीदास ने बताया कि कुछ समय बाद ही उन्होंने उस पर्स के असली मालिक का पता लगा लिया जो कि सुरिन्दर पाल एसपी आप्टिकल मैन बाजार अमलोह के मालिक का था। उनकी तरफ से पर्स के मालिक के साथ संपर्क कर और उसकी दुकान पर जाकर उसे उसका पर्स वापिस कर दिया।

क्या कहना है पर्स के मालिक सुरिन्दर पाल का

इस संबंधी सुरिन्दर पाल के साथ बातचीत करने पर उस ने कहा कि जहां आज के दौर में कोई उधार पैसे लेकर वापिस नहीं करता, वहीं डेरा सच्चा सौदा के श्रद्धालु मेघ सिंह इन्सां की ओर से उनका पर्स सही सलामत वापस किया। वह मेघ सिंह इन्सां और खासकर उनके पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां का कोटिन कोटि धन्यवाद करते हैं, जो अपने सेवादारों को मानवता भलाई के कार्य और इमानदारी की प्रेरणा दे रहे हैं।

क्या कहना है मेघ सिंह इन्सां का

इस संबंधी बातचीत करने पर मेघ सिंह इन्सां ने बताया कि वह पिछले 15 सालों से डेरा सच्चा सौदा के साथ जुड़ा हुआ है और हमें हमेशा ही पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सांं की ओर से मानवता भलाई के कार्य करने की प्रेरणा दी जाती है व आज पर्स वापस करने का कार्य भी पूज्य गुरू जी प्रेरणा से ही संभव हुआ है। उसने कहा कि पर्स वापिस करने पर उसे आत्मिक खुशी महसूस हो रही है।

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