हरियाणा के पानी में कटौती की फिराक में पंजाब

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पंजाब की सर्वदलीय बैठक में नया ट्रिब्यूनल बनाने की उठी मांग (Demand)

  • इंटर स्टेट रिवर वॉटर डिस्प्यूट एक्ट में संशोधन करने की करेगा मांग

अश्वनी चावला चंडीगढ़। यमुना सतलुज लिंक नहर के तहत हरियाणा को मिलने वाले पानी को पंजाब की तरफ से देने की जगह अब मौजूदा समय में मिल रहे पानी को भी पंजाब सरकार छीनने की फिराक में है। जिसके चलते उन्होंने पंजाब में सर्वदलीय बैठक करते हुए प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलने का ऐलान कर दिया है। पंजाब की सर्वदलीय बैठक में नया टर्मिनल बनाने की मांग की गई है। अगर इस तरह का कोई नया ट्रिब्यूनल बन जाता है और पहले से चल रहे पानी के बंटवारे को लेकर फिर से बंटवारा किया जाता है तो इसका सबसे ज्यादा नुकसान हरियाणा को हो सकता है। जिसके चलते पहले से ही पानी की कमी से जूझ रहे दक्षिण हरियाणा का हाल बद से बदतर हो सकता है।

 दक्षिण हरियाणा में पानी की किल्लत, नए सिरे से बंटवारा तो बढ़ेंगी मुश्किलें (Demand)

सर्वदलीय बैठक में प्रस्ताव पास किया गया है कि इंटर स्टेट रिवर वॉटर डिस्प्यूट एक्ट में उपयुक्त संशोधन करने के साथ-साथ ने ट्रिब्यूनल की स्थापना की जाए। जिसमें मौजूदा समय में आने वाले पानी का बंटवारा फिर से करने के लिए पूरी कार्रवाई होनी चाहिए। पंजाब राज्य का तर्क है कि जिस समय पानी का बंटवारा हरियाणा, पंजाब, राजस्थान और दिल्ली के बीच में हुआ था, उस वक्त 17 मिलियन एकड़ फीट (एमएएफ) पानी की उपलब्धता थी।

  • आज पानी की उपलब्धता 13 एमएएफ रह गई है।
  • जिसमें से हरियाणा को 3.50 एमएएफ व राजस्थान को 8.60 से ज्यादा एमएएफ पानी जा रहा है।
  • दिल्ली को 0.20 व जम्मू को 0.65 एमएएफ पानी दिया जा रहा है।
  • जिसके चलते पंजाब के पास पानी कम रह रहा है।

रावी ब्यास के पानी पर फिर मंथन तो बिगड़ेंगे हालात (Demand)

सर्वदलीय बैठक में लिए फैसले के अनुसार अगर पानी के बंटवारे को लेकर फिर से ट्रिब्यूनल का गठन करते हुए बंटवारे पर मंथन हुआ तो हरियाणा पंजाब सहित राजस्थान में हालात काफी बिगड़ सकते हैं। क्योंकि आने वाले समय में लगातार जमीन के नीचे वाला पानी खत्म हो रहा है, जिसके चलते नदियों का पानी ही एकमात्र ऐसा विकल्प है, जिससे पानी की जरूरत को पूरा किया जा सकता है। परंतु अब रावी ब्यास के पानी पर फिर से बंटवारे की बात करने के चलते हरियाणा सहित राजस्थान को झटका लग सकता है। ट्रिब्यूनल के गठित होने के चलते एसवाईएल के जरिए मिलने वाला पानी का मुद्दा खत्म होने के आसार पर पहुंच जाएगा।

  • जिस कारण दो दशकों से सुप्रीम कोर्ट में लड़ाई लड़ने के बाद भी ।
  • हरियाणा के हाथ में कुछ भी नहीं आने के आसार होंगे।
  • जबकि मौजूदा समय में आ रहे पानी में भी कटौती के आसार बन सकते हैं।

पानी के बंटवारे को लेकर आए कई फैसले

स्वतंत्र विशेषज्ञों की उच्च स्तरीय समिति की तरफ से फरवरी 1971 में हरियाणा राज्य को पानी आवंटन में 3.79 मिलियन एकड़ फीट पानी आवंटित किया गया था, जबकि उसके पश्चात योजना आयोग के तत्कालीन उपाध्यक्ष डी.पी. धरे के नेतृत्व में बनी कमेटी ने काफी ज्यादा रिसर्च करने के पश्चात हरियाणा के पानी में कुछ कटौती करते हुए 3.74 मिलियन एकड़ फीट पानी देने की सिफारिश की थी। इसके पश्चात केन्द्र सरकार की तरफ से 24 मार्च 1976 को एक अधिसूचना जारी करते हुए पंजाब और हरियाणा को एक जैसा पानी का बंटवारा करते हुए 3.5-3.5 एमएएफ पानी को आबंटित किया गया था।

  • इस पानी के आवंटन के लिए एसवाईएल नहर का प्रस्ताव किया गया।
  • पंजाब सरकार की तरफ से केन्द्र की अधिसूचना को सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर करते हुए चैलेंज किया था।
  • जिसके बाद से दोनों राज्यों के बीच में पानी के बंटवारे को लेकर विवाद चलता रहा है।

हरियाणा को 6.90 एमएएफ पानी की जरूरत

पिछले 5 दशकों से हरियाणा ज्यादा पानी आवंटित करने की मांग को लेकर कई बार पंजाब से लेकर केन्द्र सरकार तक का दरवाजा खटखटा चुका है। परंतु कहीं से भी राहत नहीं मिलने के चलते हरियाणा राज्य में सुप्रीम कोर्ट की तरफ अपना रुख किया हुआ है। हरियाणा अपने राज्य में अधिक सिंचित क्षेत्र होने के आधार पर 6.90 एमएएफ पानी लेने का दावा कई बार पेश कर चुका है।

  • परंतु हरियाणा के इस दावे पर आज तक गौर नहीं फरमाया गया है।
  • जिसके चलते ही 5 दशकों से हरियाणा राज्य आधे से कम पानी को लेकर ही अपना काम चला रहा है।

अब हरियाणा बुलाएगा सर्वदलीय बैठक

पंजाब की तरफ से की गई सर्वदलीय बैठक के बाद अब हरियाणा सरकार भी सर्वदलीय बैठक बुलाने पर विचार कर रही है। ताकि पंजाब की तरफ से इस तरह की मांग केन्द्र में पहुंचने से पहले ही हरियाणा सरकार पानी की डिमांड और मौजूदा स्थिति पर श्वेत पत्र तैयार करके केन्द्र सरकार तक पहुंचे कि वह पंजाब की तरफ से आने वाली किसी भी मांग को स्वीकार न करें। हरियाणा सरकार पंजाब की मांग को गैर वाजिब और गलत करार दे रही है।

सुप्रीम कोर्ट के आदेश को लटकाने की फिराक में पंजाब

हरियाणा की तरफ से सुप्रीम कोर्ट में किए गए केस को पंजाब अभी लंबे समय तक लगाना चाहता है, जिसके चलते ही वह इस तरह की हरकत कर रहा है। क्योंकि पंजाब पूरी तरह से इस पहलू को जानता है कि सुप्रीम कोर्ट में पंजाब के खिलाफ कई आदेश जारी हो चुके हैं और आने वाले दिनों में पंजाब सरकार को एक और झटका देते हुए सुप्रीम कोर्ट ने आदेश जारी कर सकती है। जिसके तहत पंजाब को यमुना सतलुज लिंक नहर के जरिए हरियाणा को पानी देना होगा। पंजाब इस तरह की कार्रवाई से बचने के लिए सर्वदलीय बैठक करने के बाद केन्द्र के पास ट्रिब्यूनल की मांग को लेकर जा रहा है।

  • अगर केन्द्र सरकार ट्रिब्यूनल बनाने के मामले में विचार करना शुरू करती है।
  • यह मामला सुप्रीम कोर्ट में लटक सकता है।
  • सुप्रीम कोर्ट में पंजाब सरकार की तरफ से इस तरह के तर्क दिए जाएंगे।
  • जिसको लेकर कहीं न कहीं पंजाब को कुछ समय के लिए राहत मिलने के आसार बन सकते हैं।

 

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