सार्थक प्रयासों से ही बचेंगी बेटियां

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Save daughters

देश 21वीं सदी के 20वें वर्ष मेें प्रवेश कर गया है लेकिन भारत में बेटियों की सुरक्षा एक चिंतनीय विषय बना हुआ है, शर्म आती है जब यहां सूदखोर स्टाम्प पेपर पर लिखकर मजदूर की मासूम बेटियों को गिरवी रख लेता है। दुष्कर्म, मारपीट, हत्या तो ऐसे हो गए है जैसे कि अखबार की कोई खबर। देश में कन्या भ्रूण हत्या जैसे मामलों को रोकने के लिए हालांकि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पानीपत से ‘बेटी बचाओ बेटी पढ़ाओ’ मुहिम चलाकर पूरे भारतवासियों का ध्यान इस गंभीर विषय की ओर आकर्षित किया हुआ है परन्तु जहां तक लिंगानुपात का सवाल है, लड़कियों की घटती दर समाज के लिए एक बहुत बड़ी समस्या बनती जा रही है।

घटते लिंगानुपात से अपराध का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। दरअसल प्रकृति के नियमों से छेड़छाड़ का ही यह परिणाम है कि आज समाज अनचाहे खतरे की ओर बढ़ रहा है। दरअसल, सुगम व सुखद जीवन की चाह के लिए इजाद संसाधनों का छोटी सोच के कई भारतीय परिवारों ने गलत इस्तेमाल शुरू कर दिया है। वैज्ञानिकों के अविष्कारित यंत्रों को आज गर्भ में पल रहे भ्रूण की जांच के रूप में इस्तेमाल करने लगा है, जोकि मानवीय नजरीये से किसी भी रूप में सही नहीं ठहराया जा सकता। ऐसा घृणित कार्य करने वाले परिजन न केवल खुद का घात कर बैठते हैं, अपितु सामाजिक असंतुलन भी पैदा कर रहे हैं।

अफसोसजनक है कि शिक्षित वर्ग भी बेटे की चाह में बेटी को गर्भ में कत्ल करने जैसा घिनौना कार्य कर रहे हैं। आज भी देश के बहुत से वर्गों में लड़की को उसकी इच्छानुसार पढ़ने तक के अवसर भी मुहैया नहीं करवाए जाते, जिसे एक विडंबना ही कहा जाएगा। यद्यपि देखने में आता है कि महिलाएं सामाजिक, प्रशासनिक, शैक्षिक सहित विभिन्न क्षेत्रों में पुरूषों के साथ कंधे से कंधा मिलाकर अपने पूर्ण सामर्थ्य से सेवाएं दे रही हैं। राजनीति में भले ही महिलाओं की भागीदारी कम है, लेकिन फिर भी ये प्रधानमंत्री, मुख्यमंत्री और लोकसभा स्पीकर की जिम्मेवारी निभाती रही हैं। सामाजिक संस्थाएं भी बेटियों के सम्मान व समृद्धि के लिए समय-समय पर आगे आती रही हैं, जिनमें डेरा सच्चा सौदा के प्रयास बेहद सराहनीय रहे हैं।

पूज्य गुरू संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने बेटियों के वास्ते कई मुहिमें चलाई हैं जिनमें ‘कुल का क्राउन’ के द्वारा रूढ़िवादी विचारधारा को बदलने का बीड़ा उठाया गया है। इस मुहिम के तहत अब बेटी से भी वंश चलने लगा है। आमतौर पर वंश चलाने का जिम्मा बेटों पर ही था। ‘शाही बेटियां बसेरा’ में उन बेटियों को आश्रय दिया गया है जिन्हें कोख में ही मार दिया जाना था। प्रधानमंत्री मोदी भी डेरा सच्चा सौदा द्वारा चलाई जा रही समाज भलाई के अभियानों की मुक्तकंठ से प्रशंसा कर चुके हैं। आज भी देश के 130 करोड़ लोगों की उम्मीदें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बेटी बचाओ-बेटी पढ़ाओ के अभियान पर टिकी हुई हैं, ऐसे में मोदी जी को देश की संस्कृति बचाने के साथ-साथ बेटियों के अस्तित्व को भी बचाने के लिए सार्थक प्रयास करने होंगे, क्योंकि बिना बेटियों के देश की तरक्की संभव नहीं।

 

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