लेख

धोखेबाज बिल्डरों पर कोर्ट का शिकंजा

Court screws on fraudulent builders

देश में हर जगह आतंकवाद का खतरा है जिस पर सरकार व तमाम एजेंसियों कार्यवाही करती रहती हैं लेकिन (Court screws on fraudulent builders) अब देश में बैठे आर्थिक आतंकवादियों की भी अब खैर नहीं। लोगों की भावनाओं से खेलने वाले बिल्डरों पर अब उच्च न्यायलय ने निगाह टेढ़ी कर ली है। बिल्डरों से परेशान लोगों की संख्या में लगातार इजाफा होता जा रहा है जिसकी वजह से ग्राहक से लेकर निवेशक का विश्वास सभी छोटे बड़े बिल्डरों पर खत्म होने लगा। गौतमबुध्द नगर(नोएडा/ग्रेटर नोएडा) व गुरुग्राम, भारत ही नहीं बल्कि पूरे एशिया की फ्लैटों की सबसे बडी मंडी बन चुकी है। इन दोनों जगहों पर दो दशकों मे एक नए हिन्दुस्तान का एक सबसे नया व खूबसूरत रुप तैयार हुआ है व देश के सबसे क्रीम लोगों की जमात भी यहीं रहती है। इसके अलावा रईस लोगों की पर्सनेलिटी का सिंबल भी है यहां फ्लैट होना। बसावट की प्रारंभिकता में तो सब सही चला लेकिन लगभग पिछले 5-6 वर्षों में ज्यादातद बिल्डर या डीफॉल्टर व धोखेबाज होते चले गए जिस वजह से हर बिल्डर जेल की सलाखों की पीछे पहुंच रहे। इसका एक बड़ा व सजीव उदाहरण विगत दिनों अमरपाली ग्रुप बना। लगभग 200 लोगों और कंपनियों को अदालत द्वारा नियुक्त फोरेंसिक आॅडिटर्स के साथ सहयोग न करने के आरोप पर नोटिस जारी किया गया।

दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने आम्रपाली के सीएमडी अनिल शर्मा और दोनों निदेशकों के खिलाफ आरोप (Court screws on fraudulent builders) पत्र दाखिल किया था। देश के सर्वोच्च न्यायलय ने ग्रुप चेयरमैन और प्रबंध निदेशक अनिल शर्मा और दो निदेशकों को तत्काल गिरफ्तार करने की दिल्ली पुलिस को इजाजत दी व कोर्ट ने कहा है कि दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा आम्रपाली के निदेशक शिव प्रिय और अजय कुमार को भी इस मामले में गिरफ्तार कर सकती है। 28 फरवरी को जस्टिस अरुण कुमार मिश्रा और यूयू ललित की बेंच ने कहा कि हमने यूपी पुलिस की निगरानी में एक होटल में हिरासत में रखे गए किसी भी निदेशक को गिरफ्तार करने से किसी एजेंसी को कभी नहीं रोका। बेंच ने आम्रपाली ग्रुप के सीएमडी अनिल शर्मा के दक्षिणी दिल्ली स्थित बंगले समेत निजी प्रॉपर्टी को भी अटैच करने के निर्देश दे दिए हैं।

बहराहल,यह हाल ही में एक बिल्ड़र की दांस्तां है ऐसी लंबी फेहरिस्त है लेकिन जितने लोगों ने भी इस मंडी में फ्लैट या अन्य तरह की प्रापर्टी ले रखी है उनके विश्वास का खात्मा तो हो चुका है क्योंकि कोई भी आम आदमी घर लेने के लिए अपनी जीवन की वो जमा पूंजी लगा देता जिसको वो अपना मन मारके कमाता है या लोन की किश्त देने के बाद वो रोटी कैसे खा पाता है यह सिर्फ वो और उसका भगवान जानता है। हमारे देश में गरीब व मध्यमवर्ग परिवारों की संख्या ज्यादा है जिसमें से अधिकतर के पास अपना घर नहीं होता। एक आम आदमी के लिए घर लेना या बनाना किसी तपस्या से कम नहीं माना जा सकता। बावजूद इसके धोखेबाज बिल्डर ऐसे लोगों की आस्थाओं को कुचलकर अपना खजाना भरने में लगे हुए हैं जो बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हैं। इसी तर्ज वो फाइनेंसर भी अपने को लुटा व ठगा सा महसूस करने लगे जो हकीकत में इन बिल्डरों के जन्मदाता होते हैं। किसी भी बिल्डर को अपना प्रोजेक्ट लाने के लिए सबसे पहले पूजींपतियों की जरुरत होती है जिससे वह शुरूवात करते हैं।

बिल्डर माल बिकते हुए या बिकने के बाद इनवेस्टरों को मुनाफे के साथ उनकी रकम वापिस दे देते हैं लेकिन बिल्डर ज्यादा पैर पसारने के चक्कर में या जल्दी अमीर बनने की होड़ में सब को दांव पर लगा देता है। छोटे बिल्डरों ने बड़े बिल्डरों के फार्मेट को कॉपी करने के चक्कर में जनता को बर्बाद कर दिया व बड़े बिल्डरों ने जरुरत से ज्यादा बड़े बनने के लिए ग्राहकों व निवेशकों को कहीं को भी नही छोड़ा। लेकिन शुक्र है कि इस देश की जनता को कोर्ट पर भरोसा है व कोर्ट ने वो बरकरार रखते हुए दोषी बिल्डरों पर शिकंजा कसते हुए लोगों के पैसे ब्याज समेत वापिस दिलवाने का काम किया जो लगातार अभी भी प्रयासरत है।

ग्राहकों व निवेशकों में बढ़ते अविश्वास की वजह से सही व ईमानदार बिल्डर भी चपेट में आ रहे हैं। एक कहावत है कि एक गंदी मछली पूरे तालाब को गंदा कर देती है लेकिन यहां तो उल्टाहो गया बहुत सारी गंदी मछलियों की वजह से चुनिंदा मछली भी गंदी पड़ने लगी। हमारे देश में कृषि के बाद दूसरा सबसे बड़ा व्यवसाय है रिएल एस्टेट का जिसको सरकार से बहुत बड़ा रेवन्यू प्राप्त होता है लेकिन लगातार धोखेबाज बिल्डरों से सब कुछ बेकार होता जा रहा है। अब यदि कोई बिल्डर कंपनी अपने प्रमोशन के लिए किसी को कॉल भी करती है तो लोग उसे हल्के में ले लेते हैं। क्योंकि अब लोगों के साथ धोखा इतना हो चुका कि वो पिछली घटनाओं से उभर ही नहीं पा रहे हैं। कुछ बिल्डरों ने तो सिर्फ प्रोजेक्ट के नाम पर ग्राहकों से पैसा उठाया और उन्हें बदले में कुछ भी नहीं दिया। ऐसे बिल्डरों को लगता था कि ऐसे मामलों में केवल 50-60 प्रतिशत ही कोर्ट जाते हैं और केस सालों तक चलता है। इतनें में सैंकड़ों लोगों की रकम का ब्याज इतना हो जाता है कि वापिस भी करना पड़ा तो कोई नुकसान नही होगा।

लगातार हो रही बिल्डरों की धोखेधड़ी से हमें भी एतिहाद बरतने की जरुरत है। संबंधित वकील से सभी जानकारियों के साथ अपनी प्रापर्टी बुक कराएं या लें क्योंकि कुछ बिल्डरों ने तो एक यूनिट(फ्लैट/दुकान) कई लोगों को बेची हुई होती है।हालांकि बिल्डरों पर लगातार शिकंजा कसने से नए व कुछ पुराने बिल्डर सतर्क हो रहे हैं जिस वजह से ग्राहकों के फ्लैट या पैसा वापिस दे रहे हैं। कोर्ट में यदि कोई पीड़ित अपनी फरियाद लेकर जाता है तो ऐसे मामलों में कोर्ट में अब तुरंत प्रभाव के साथ कार्यवाही होने लगी है जबकि पहले सब इतना जल्द होना संभव नहीं पाता था।
योगेश कुमार सोनी

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