कोरोना की दोहरी मार और भारत की अर्थव्यवस्था

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America Economy
वर्ष 2019 में भारत चीन का द्विपक्षीय व्यापार करीब 87 अरब डॉलर था, जिसमें चीन से भारत को आयात 70 अरब डॉलर रहा। चीन से आयातित कच्चे माल एवं वस्तुओं पर देश के कई उद्योग कारोबार निर्भर हैं। चीन से आने वाली कई वस्तुओं के आयात में भी कमी आई है। इससे खासतौर से दवा उद्योग,वाहन उद्योग, स्टील उद्योग, खिलौना कारोबार, इलेक्ट्रॉनिक्स,केमिकल्स एवमं डायमंड आदि से जुड़े कारोबार मुश्किलों का सामना करते हुए दिखाई दे रहे हैं।
ध्यान से देखा जाए तो चीन से शुरू हुए कोरोना वायरस का कहर अब इटली आदि देशो से होते हुए हमारे देश में भी दस्तक दे चुका है, जो बहुत ही चिंता का विषय है। देखा जाए तो शुरू में इसके मरीज दिल्ली में ही पता लग पाए। लेकिन धीरे-धीरे देश के कई अन्य इलाको मे भी कोरोना के मरीजों की पहचान होने की खबरें लगातार आ रही हैं। जिससे कि देश के सभी नागरिकों में व्यापक रूप से डर का माहौल बना हुआ है। इस वैश्विक समस्या से वैज्ञानिकों को कारगर तरीके से निपटने में अभी वक्त लगने की आशंका जताई जा रही है। ऐसे में हम सबको स्वयं ही इस बीमारी के प्रति सतर्क और जागरूक होना पड़ेगा, ताकि इसका प्रसार होने से रोका जा सके। खुद मैं स्वयं भी जागरूकता कैंप और अपनी लेखनी के माध्यम से अपने सभी साथियों के साथ जागरूकता लाने का प्रयास कर रहा हूं। वैसे तो सरकारी स्तर पर इसे रोकने के तमाम उपायों पर जोर दिया जा रहा है, लेकिन विभागों में आपसी तालमेल में खामी के कारण कई बार लापरवाही भी उजगार होती हैं ।
वहीं एक तरफ देखा जाए तो दुनिया पर कोरोना की दोहरी मार पड़ रही है। कोरोना वायरस के प्रकोप से वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई है। हालांकि इस आपदा के बीच भारत के लिए वैश्विक बाजार में धमक बढ़ने का एक आसार भी दिख रहा है। देखा जाए तो चीन के वुहान शहर से फैला कोरोना वायरस (कोविड 2019) इंसानों को ही नहीं बल्कि अर्थव्यवस्था को भी अपनी गिरफ्त में ले रहा है। एक महामारी की तरह कोरोना का संक्रमण दुनिया के अनेक देशों को प्रभावित कर चुका है। इस प्रकोप के चलते दुनिया भर की अर्थव्यवस्थाओं पर भी बुरा असर पड़ रहा है। दुनिया के बाजारों में निराशा आ रही है। शेयर बाजार लगातार गिर रहे हैं। पर्यटन उद्योग कराह रहा है। विगत दो मार्च को आर्थिक सहयोग एवं वैश्विक संगठन ने अपनी रिपोर्ट में कहा कि कोरोना के प्रकोप से दुनिया में 2008 की वैश्विक मंदी जैसा दृश्य सामने आ रहा है। इसी तरह विश्व प्रसिद्ध ऑक्सफोर्ड इकोनॉमिक्स ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि कोरोना वायरस अगर नियंत्रित नहीं होता है तो इससे वर्ष 2020 में वैश्विक अर्थव्यवस्था को 78 लाख करोड़ रुपए का नुकसान हो सकता है।
वही कुछ विद्वानों का कहना है कि कोरोना वायरस 2003 में फैली सांस की बीमारी “सार्श” बीमारी से भी घातक है। 2003 में इसने चीन की विकास दर को जोरदार झटका दिया था और वैश्विक अर्थव्यवस्था भी प्रभावित हुई थी। तब चीन की विश्व की जीडीपी में हिस्सेदारी महज 4 फीसदी थी, लेकिन अब यह 16 फीसदी है। देखा जाए तो कोरोना वायरस के प्रकोप ने चीनी अर्थव्यवस्था की कमर फिर से तोड़ दी है और वहां उत्पादन गतिविधियां तकरीबन ठप है। आलम यह है की जिन प्रांतों से चीन का 90 फिसद निर्यात होता है वहां बड़ी संख्या में कारखाने बंद है या कम क्षमता से चल रहे हैं। चीन में कई बड़ी कंपनियों ने चीन में कारोबार बंद कर दिया है। कोरोना का बढ़ता प्रकोप दुनिया की अर्थव्यवस्था को भी प्रभावित कर रहा है और भारत इससे अछूता नहीं है। इससे निपटने की तैयारियों के तहत वित्त मंत्रालय ने कोरोना को प्राकृतिक आपदा घोषित करते हुए उद्योग-कारोबार जगत को राहत देने के मद्देनजर सकारात्मक संकेत दिए हैं। वही बदले माहौल में चीन से आने वाले इंटरमीडिएट गुड्स का विकल्प मेक इन इंडिया के तहत तैयार करने की रणनीति है।
विशेषज्ञों का कहना है कि यद्यपि कोरोना संकट का भारतीय उद्योग-कारोबार गतिविधियों पर भी प्रतिकूल प्रभाव पड़ रहा है, लेकिन भारत इस वक्त कई वस्तुओं की उत्पादन वृद्धि और निर्यात के मौकों को भी अपने हाथ में ले सकता है। कच्चे तेल की घटी कीमत भी भारत के लिए लाभप्रद रह सकती है। देखा जाए तो इस समय चीन भारत का दूसरा बड़ा व्यापारिक साझेदार है। कहते हैं कि आपदा में अवसर भी छुपा होता है, इसलिए इस समय भारत भी वैश्विक अर्थव्यवस्था में उपजी इन प्रतिकूल परिस्थितियों का लाभ उठा सकता है। इस वक्त देखा जाए तो चीन से निर्यात तकरीबन ठप है। यह भारत के लिए एक अवसर है। ऐसे में भारत कई वस्तुओं का उत्पादन कर निर्यात बढ़ाकर दुनिया को राहत दे सकता है और नए निर्यात करने के मौके को भी अपने हाथ में ले सकता है।
वहीं अभी हाल ही में उद्योग मंडल एसोचैम के द्वारा प्रकाशित रिपोर्ट में भी कहा गया है कि निर्यात बाजार में चीन की जगह भारत ले सकता है। मेरा मत है कि यदि भारत कारोना प्रकोप के बीच रणनीति पूर्वक उत्पादन बढ़ाता है, तो यकीनन इससे भारतीय अर्थव्यवस्था को गति मिलेगी। वहीं दूसरी ओर वह कई वस्तुओं का निर्यात बढ़ाते हुए वैश्विक बाजार में भी चीन की जगह लेते हुए भी दिखाई दे सकेगा। यह मेरा अपना विचार है। हम उम्मीद कर सकते हैं कि सरकार देश के लोगों को कोरोना के बढ़ते प्रकोप से बचाने के लिए हर स्तर पर उत्तम प्रयास करेगी। वहीं देश की अर्थव्यवस्था को भी कोरोना के कहर से बचने व नई संभावनाओं को भुनाने का हर संभव प्रयास करेगी।
एक लेखक होने के नाते और जागरूक भारतीय होने के नाते मेरा विचार है कि समग्र नीति बनाने और सभी संबंधित विभागों द्वारा उसे तत्परता से लागू करने पर इस बीमारी से निपटा जा सकता है। देखा जाए तो जब भारत में कोरोना का पहला मामला दर्ज हुआ और सभी राज्यों को अलर्ट करने के साथ-साथ उसी समय प्रशासन और स्वास्थ्य विभाग को लोगों में जागरूकता लाने के लिये अभियान चलाने की जरूरत थी, लेकिन ऐसा व्यापक रूप से नहीं हुआ। यही वजह है कि कुछ दुकानदारों को भी लोगों में डर पैदा करने का मौका मिल गया और उन्होंने मास्क और सैनिटाइजर ब्लैक बेचना शुरू कर दिया। दुख की बात यह है कि ड्रग कंट्रोल विभाग यह सब देखता रहा और उसने इस पर रोक लगाने के लिए तब तक कुछ नहीं किया जब तक विरोध प्रदर्शन शुरू नहीं हुआ।
देखा जाए तो यह ऐसी बीमारी है जिसके बारे में अभी भी लोग जागरूक नहीं है और इसको लेकर कई भ्रम लिए हुए हैं। मगर भ्रम को दूर करने के लिए कोई आगे नहीं आ रहा है। अधिकारी इस बीमारी को लेकर खुलकर नहीं बोल रहे हैं और अस्पतालों में भी पर्याप्त सुविधा की कमी बनी हुई है। प्रशासन को चाहिए कि वह जिला स्तर पर नियुक्त नोडल अधिकारियों के माध्यम से लोगों को जागरूक करने के लिए अभियान चलाएं और देश के सभी युवाओं को भी जागरूकता अभियान में बढ़-चढ़कर भाग लेने का आवाहन करें। इससे लोगों में भय कम होगा और जो लोग बिना किसी कारण मास्क और सैनिटाइजर खरीदने में लगे हुए हैं, उस पर भी रोक लगेगी।
एहतियातन और जागरूकता से ही कई रोगों पर रोक लगाई जा सकती है। यह हम सभी को समझना होगा और सुनिश्चित करना होगा कि हम प्रभावित देशों से आने वाले हर नागरिक की स्क्रीनिंग और उनसे दूरी बना कर रखें,चाहे वह एयरपोर्ट से आए हैं या फिर रेल मार्ग से। उसके लिए अस्पताल में जाकर अपनी स्क्रीनिंग करवाना अनिवार्य करना चाहिए। अगर हम सब मिलकर जागरूकता लाएं और लोगों को स्वच्छता पर विशेष ध्यान देने के लिए प्रेरित करें, तो हम इस वैश्विक वायरस से बच सकते हैं। अंत में देश के सभी लोगों से मैं यही आवाहन करता हूं कि इस वायरस को खत्म करने और बचने के लिए जागरूकता अभियान चलाएं।

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