पंजाब

कंबाईन मालिकों ने नहीं  माना सरकार का आदेश, प्रशासन ने प्रदूषण को रोकने के लिए उठाया था कदम

Combined owners did not believe the order of the government

बिना एसएमएस यंत्रों से कंबाईनें चला कर रहे धान की कटाई Combined owners did not believe the order of the government

बठिंडा/संगत मंडी(मंजीत नरुआणा)।

राज्य सरकार की ओर से धान की पराली को आग लगाने साथ पैदा होते प्रदूषण से निजात पाने के लिए धान की कटाई करते समय कम्बाईनों पर कम्बाईन मालिकों को सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट व्यवस्था (एसएमएस) लगाने के सख्त निर्देश दिए गए थे परंतु कम्बाईन मालिकों की ओर से राज्य सरकार के आदेशों की धज्जियां उड़ाते एसएमएस व्यवस्था से बिना ही धान की कटाई की जा रही है। एकत्रित की जानकारी अनुसार धान की पराली को आग लगाने साथ जहां वातावरण प्रदूषित हो रहा वहीं धरती बीच वाले जीव जंतू भी आग की चपेट में आकर मर रहे हैं। ग्रीन ट्रिब्यूनल की ओर से धान की पराली को आग लगाने के साथ पैदा होते प्रदूषित होते वातावरण को लेकर राज्य सूबा सरकार को सख़्त फटकार लगाई गई थी।

इसी के चलते राज्य सरकार की ओर से धान की पराली को जमीन में ही नष्ट करने के लिए कम्बाईनों पर सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट व्यवस्था (एसएमएस) लगाना जरूरी कर दिया। इस यंत्र के साथ कम्बाईन की ओर से धान की पराली को खेत में नष्ट कर फेंका जाता है। सरकार की ओर से यह हिदायतें तो जारी कर दीं परंतु इसे अमली जामा पहनाने के लिए जमीनी स्तर पर कुछ भी नहीं किया गया। किसानों के खेत में कम्बाईन मालिकों की तरफ से बिना किसी डर भय के एसएमएस के बिना ही धान की कटाई की जा रही है।

कोई भी विभाग उनको रोकने तक नहीं आया। बेशक कृषि विभाग की ओर से एसएमएस यंत्र को लगाने के लिए 50 प्रतिशत सब्सिडी दी जा रही है परंतु फिर भी कम्बाईन मालिकों की ओर से यह यंत्र नहीं लगाया गया। अतिरिक्त जिला मैजिस्ट्रेट बठिंडा सुखप्रीत सिंह सिद्धू की ओर से विवरण फौजदारी संहिता 1973 की धारा 144 के अधीन यह आदेश जारी कर दिए कि जिले में जो भी कम्बाईन मालिक बिना सुपर स्ट्रा मैनेजमेंट व्यवस्था (एसएमएस) से धान की कटाई करेगा तो उसके विरुद्ध सख्त कार्रवाई करते उस की कम्बाईन को जब्त कर लिया जाएगा। उन्होंने बताया कि पंजाब में धान की पराली को जलाने के कारण पैदा होने वाले प्रदूषण को रोकने के लिए पंजाब सरकार व राष्ट्रीय ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों अनुसार पंजाब एग्रीकल्चरल यूनिवर्सिटी की सिफारिशों को मद्देनजर रखते हुए ही ऐसे सख्त कदम उठाए गए हैं।

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