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    गोरक्षा से जुड़ी हिंसा रोकने के लिए केंद्र कानून बनाए : सुप्रीम कोर्ट

    Gauraksha Narendrarmodi:

    सुप्रीम कोर्ट का गोर रक्षा पर बड़ा फैसला |Gauraksha Narendrarmodi

    कोई भी नागरिक कानून को अपने हाथ में नहीं ले सकता

    नई दिल्ली (एजेंसी)। उच्चतम न्यायालय ने गोरक्षा के नाम पर होने वाली हिंसक घटनाओं की रोकथाम  (Gauraksha Narendrarmodi) के लिए अलग से कानून बनाने का केंद्र सरकार को निर्देश दिया है। मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा की अध्यक्षता वाली खंडपीठ ने मंगलवार को गोरक्षा के नाम पर हिंसा की बढ़ती घटनाओं पर चिंता जताते हुए कहा कोई भी नागरिक अपने हाथ में कानून नहीं ले सकता। न्यायालय ने स्वयंभू गोरक्षकों पर अंकुश लगाने एवं संबंधित घटनाओं की रोक थाम के लिए कुछ दिशानिर्देश भी जारी किये और इन पर अमल के लिए चार सप्ताह का वक्त दिया। न्यायालय ने अपनी सिफारिशों में कहा है कि केंद्र सरकार गोरक्षा से जुड़ी हिंसा की घटनाओं की रोकथाम के लिए अलग से कानून बनाये।

    तीन जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था |Gauraksha Narendrarmodi

    पीठ ने कहा कि ‘भीड़तंत्र’ पर अंकुश लगाना और कानून व्यवस्था लागू करना सरकार का काम है। पीठ की ओर से फैसला सुनाते हुए न्यायमूर्ति मिश्रा ने कहा, ‘भय और अराजकता की स्थिति में सरकार कोसकारात्मक कदम उठाना होता है। हिंसा की अनुमति किसी को भी नहीं दी जा सकती। कोई भी नागरिक कानून अपने हाथ में नहीं ले सकता। शीर्ष अदालत ने तहसीन पूनावाला और महात्मा गांधी के परपौत्र तुषार गांधी की याचिकाओं की विस्तृत सुनवाई के बाद गत तीन जुलाई को फैसला सुरक्षित रख लिया था।

    कुछ राज्यों के खिलाफ मानहानि याचिका भी दायर |Gauraksha Narendrarmodi

    तुषार गांधी ने शीर्ष अदालत के इस मामले के पहले के आदेशों का पालन नहीं करने का आरोप लगाते हुए कुछ राज्यों के खिलाफ मानहानि याचिका भी दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया था कि इन तीन राज्यों ने शीर्ष अदालत के छह सितंबर , 2017 के आदेशों का पालन नहीं किया है। शीर्ष अदालत ने पिछले साल छह सितंबर को सभी राज्यों से कहा था कि गौ-रक्षा के नाम पर हिंसा की रोकथाम के लिये कठोर कदम उठाये जायें।

     

     

     

     

     

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