लेख

गांवों और गरीबों को ध्यान में रखकर तैयार किया बजट

Budget prepared by keeping in mind the villages and the poor
  •  क्या केंद्रीय बजट आर्थिक सर्वेक्षण पर आधारित किया गया है?

बजट से पूर्व देश के प्रत्येक क्षेत्रों का सर्वे किया गया। इसमें राज्य सरकारों का सहयोग लिया गया। सभी राज्यों से रिपोर्ट मिलने के बाद बजट को अंतिम रूप दिया गया। कांग्रेसशासित राज्यों से कुछ निराशा जरूर हुई पर वहां हमने अपने कैडरस् का सहारा लिया। देखिए, बजट में हमने बिना किसी भेदभाव के समूचे भारत के गरीबों के कल्याण और विकास में संतुलन साधने का प्रयास किया है। मुल्क की तरक्की में सबसे बड़ा रोल निभाने वाले गांव, गरीब व किसानों पर ज्यादा फोकस किया गया। इसके अलावा आधरभूत ढांचे और उद्योगों के विकास पर भी जोर दिया। पूरा बजट आर्थिक सर्वेक्षण करके बनाया गया है। हमारी हर क्षेत्र को साधने की कोशिशें हो रही है।

  •  नई योजनाओं को लागू करने में धन की काफी जरूरत पड़ेगी, कहां से होगी पैसों की भरपाई?

कर देने वालों की संख्या में इजाफा हो रहा है। देश के लोग समझ चुके हैं कि भारत की तरक्की में उनका योगदान किस तरह से हो सकता है। योजनाओं के लिए पैसा उच्च आय वर्ग वालों से वसूला जाएगा। दो करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर तीन फीसदी और पांच करोड़ से ज्यादा कमाने वालों पर सात प्रतिशत का सरचार्ज लगाए जाने का प्रावधान किया गया है। मेरे ख्याल से इतना सरचार्ज किसी को चुभेगा भी नहीं। नए भारत के विकास में अपने श्रम का योगदान सभी देने के लिए तैयार हैं। देश की जनता को अब ठीक से पता है कि उनके द्वारा दिया जाने वाला पैसा सही जगह पर लग रहा है। लोगों को प्रधानमंत्री पर अटूट विश्वास है।

  •  प्रदूषण बड़ा मुद्दा है, ई-वाहन पॉलिसी कितनी कारगर साबित होगी?

देखिए, हमारा जोर किसी भी सूरत में प्रदूषण को कम करना है। इस क्षेत्र को प्रधानमंत्री अपनी प्रथम प्राथमिकताओं एक मानकर चल रहे हैं। सरकार का जोर हिंदुस्थान को इलेक्ट्रिक व्हीकल मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने पर है। इलेक्टिृक वाहनों के लिए कर्ज पर डेढ़ लाख तक ब्याज पर आयकर छूट देने की है। ई-वाहन पोलिसी की जरूरत पिछले दस-पंद्रह सालों से है लेकिन पूर्ववर्ती सरकारों ने इस ओर ईमानदारी से कदम नहीं उठाया। अगर उठाया होता तो शहर आज इतने पॉल्यूटेड नहीं होते। प्रदूषण के खात्मे के लिए और भी जरूरी नियमित कदम उठाए जाएंगे।

  •  कांग्रेस का आरोप कि सबसे वास्ता रखने वाले हेल्थ सेक्टर की अनदेखी की गई है?

स्वास्थ्य सेक्टर के लिए 19 फीसद की वृद्वि की गई है। पुराने स्वास्थ्य तंत्र को आधुनिक बनाने पर जोर दिया जाएगा। चिकित्सीय ढांचे को दुरूस्त करने पर बल दिया जाएगा। चमकी नामक जैसी अचानक उत्पन्न होने वाली बीमारियों से निपटने के लिए नेशनल रिसर्च हेल्थ विंग पर जोर रहेगा। योग के जरिए जिस तरह से मोदी सरकार ने देश की आवाम का ख्याल रख रही है। उसी तर्ज पर चिकित्सीय तंत्र को भी मजबूत किया जाएगा। आयुष्मान भारत के माध्यम से क्रांति आएगी।

  •  रेल बजट खत्म होने के बाद आम बजट में रेलवे का ज्यादा जिक्र नहीं होता?

रेलवे के विकास, विस्तार और आधुनिकीकरण पर हमारा का जोर है। रेलवे के विकास के लिए निजी क्षेत्र को भी शामिल किया जा रहा है। इस बजट में रेलवे के लिए 3423 हजार निर्धारित किए हैं। जबकि पिछली बार रेलवे को 2423 करोड़ दिया गया था। रेलवे तंत्र में सन् 2030 तक पचास करोड़ निवेश करने की दरकार रहेगी। उस पर भी काम किया जाएगा। पूरे देशभर में 7255 करोड़ लागत की नई लाइनें बिछाई जाएंगी। रेलवे को एक वर्ष के अंतराल में यात्री एंव माल भाड़े से 2,16675 करोड़ की आमदनी करने को कहा जाएगा।

  •  बजट में नई शिक्षा नीति को लागू करने की बात कही गई है, लेकिन विजन साफ नहीं किया गया?

पिछले साल उच्च शिक्षा के लिए 33 हजार करोड़ का बजट था जिसे बढ़ाकर 38 हजार करोड़ कर दिया गया है। नई शिक्षा नीति के तहत हमारा जोर एक सामान्य शिक्षा पर रहेगा। प्राथमिक स्तर की शिक्षा को हमें गुणवत्ता में तब्दील करना है इसलिए इस बार 56 हजार करोड़ का बजट दिया गया है। नई शिक्षा नीति को इसी साल से अमल में लाया जाएगा। क्योंकि हमारा टारगेट है कि उच्च शिक्षा में फिर से गौरव हासिल करना। स्टडी इन इंडिया के तहत लुभाए जाएंगे विदेशी छात्र। विदेशी छात्रों के लिए हम भारत को शिक्षा का हब बनाना चाहेंगे।

रमेश ठाकुर

 

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