बेटी ने बढ़ाया बाप का मान, लीवर देकर बचाई जान

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 जीते जी लीवर दान करने वाली नेहा इन्सां को शाह सतनाम

जी गर्ल्ज स्कूल ने किया सम्मानित |  Liver Donated

सिरसा (सुनील वर्मा, रविन्द्र शर्मा)। आज के दौर में जहां बच्चे अपने माता-पिता को दुत्कार रहे है। (Brave Daughter Who Donated Liver To Her Father) वहीं पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं पर चलते हुए डेरा अनुयायी अपने जन्मदाताओं को नया जीवन दे रहे है। कुछ ऐसा ही कर दिखाया शाह सतनाम जी गर्ल्ज शिक्षण संस्थान की पूर्व छात्रा नेहा इन्सां ने। दिल्ली के ग्रेटर कैलाश निवासी नेहा इन्सां ने मौत के करीब पहुंचे अपने पिता मनमोहन इन्सां को अपना Liver Donated कर उनकी जान बचाई।

नेहा इन्सां के साहस भरे कार्य को समर्पित शाह सतनाम जी गर्ल्ज स्कूल सिरसा में सोमवार को उनके सम्मान में एक सम्मान समारोह का आयोजन किया गया। जिसमें प्रो. गुरदास इन्सां, गेस्ट्रोइन्टेरोलोजिस्ट डॉ. भंवर सिंह, शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल के ज्वाइंट सीएमओ डॉ. गौरव इन्सां ने विशेषअतिथि के रूप में शिरकत की।

जबकि कार्यक्रम की अध्यक्षता शाह सतनाम जी गर्ल्ज स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. शीला पूनिया इन्सां ने की। सभी मेहमानों ने नेहा इन्सां को शॉल पहनाकर, गोल्ड बैच लगाकर व स्मृति चिन्ह देकर सम्मानित किया तथाउनके इस कार्य की काफी प्रशंसा की।

लीवर डोनेट कर बहादुरी का कार्य किया : डॉ. भंवर सिंह

शाह सतनाम जी गर्ल्ज स्कूल के प्रांगण में आयोजित सम्मान समारोह में उपस्थित विद्यार्थियों व स्टॉफ सदस्यों को संबोधित करते हुए गेस्ट्रोइन्टेरोलोजिस्ट डॉ. भंवर सिंह ने कहा कि नेहा इन्सां ने अपने पिता के लिए लीवर डोनेट कर बहादुरी का कार्य किया है। ऐसे बच्चे दुनियां के लिए मिसाल बनते है। उन्होंने लीवर डोनेट के बारे में फैली भ्रांतियों पर कटाक्ष करते हुए कहा कि लीवर डोनेशन से शरीर में किसी भी प्रकार की परेशानी नहीं आती। इसका जीता जागता उदारण आपके सामने बैठी नेहा इन्सां है। जिन्होंने दो महीने पूर्व अपने पिता को अपना लीवर डोनेट किया था।

लीवर डोनेट करने का यह साहस भरा कार्य किया : प्रो. गुरदास इन्सां |  Liver Donated

प्रो. गुरदास इन्सां ने नेहा इन्सां के इस बहादुरी (Brave Daughter) भरे कार्य को सलाम करते हुए कहा कि एक ओर जहां बच्चे अपने माता-पिता को ठुकरा रहे है, वहीं नेहा इन्सां ने लड़की होकर भी लीवर डोनेट करने का यह साहस भरा कार्य किया है। उन्होंने कहा कि डेरा सच्चा सौदा के पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की पावन शिक्षाओं का ही कमाल है कि जहां दुनियादारी में अभिभावकों को ही अपने बच्चों के भविष्य की चिंता रहती है। जबकि डेरा श्रद्धालुओं की संताने अपने माता-पिता की संभाल के साथ-साथ जरूरत पड़ने पर अपने अंग भी दान कर रहे है। हमें ऐसे बच्चों पर गर्व है। प्रो. इन्सां ने कहा कि नेहा इन्सां के इस साहसिक कार्य से अन्य बच्चों को भी सीख लेनी चाहिए।

60 हजार से अधिक डेरा श्रद्धालु गुदार्दान करने के लिए तैयार : डॉ. गौरव इन्सां

शाह सतनाम जी स्पेशलिटी अस्पताल के ज्वाइंट सीएमओ डॉ. गौरव इन्सां ने कहा कि कुछ साल पूर्व तक सिर्फ ब्रेन डेड का ही लीवर डोनेट किया जाता था। लेकिन अब लाइव डॉनर का भी लीवर डोनेट होता है। उन्होंने कहा कि पूज्य गुरु जी की पावन प्ररेणाओं से प्रभावित होकर आज 60 हजार से अधिक डेरा श्रद्धालु गुर्दादान करने के लिए तैयार बैठे है। जोकि समाज के सामने एक उदाहरण है। भारत जैसे देश में अंग डोनेट करने से लोग कतराते है। वहीं नेहा इन्सां ने अपने पिता के लिए 65 प्रतिशत लीवर दान कर एक बहादुर बच्ची होने का परिचय दिया है।

मुझे मान है अपनी इस स्टूडेंट पर : डॉ. शीला पूनियां इन्सां

शाह सतनाम जी गर्ल्ज स्कूल की प्रधानाचार्या डॉ. शीला पूनियां इन्सां ने अपने संबोधन में नेहा इन्सां के इस कार्य को सलाम करते हुए कहा कि मुझे मान है अपनी इस स्टूडेंट पर। जिन्होंने पूज्य गुरु जी की प्रेरणा पर चलते हुए इतनी बड़ी हिम्मत जुटाई। उन्होंने कहा कि शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थानों में बच्चों को पढ़ाई के साथ-साथ इन्सानियत का पाढ़ भी पढ़ाया जाता है।

पूज्य गुरु जी की प्रेरणा से किया लीवर डोनेट |  Liver Donated

जन्मदाता को नया जीवन देने वाली नेहा इन्सां ने कहा कि उनके पिता मनमोहन इन्सां का लीवर में ट्यूमर था और डाक्टरों ने जल्द से जल्द लीवर बदलवाने की सलाह दी थी। इसके बाद लीवर डोनेट के लिए भाई-भाभी व माँ सहित सभी पारिवारिक सदस्य तैयार थे और सभी की जाँच करवाई गई। लेकिन मेरी इच्छा थी कि मैं अपने पिता को अपना लीवर डोनेट करूं।  चिकित्सकों की जांच के पश्चात 27 दिसंबर 2019 को दिल्ली के मैक्स अस्पताल में उनका 65 प्रतिशत लीवर प्रतिरोपित किया गया।

नेहा ने बताया कि पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां की रहमत से लीवर डोनेट करने से पहले मुझे किसी भी प्रकार का कोई डर नहीं लगा और करीब एक महीने बाद बिल्कुल स्वस्थ हो गई। अब मेरी जांच की गई तो उसमें मेरा लीवर 85 प्रतिशत रिकवर हो गया। उन्होंने बताया कि जब उनके पिता के खराब लीवर को निकाला गया और जांच की गई तो पता चला कि उसमें कैंसर था।

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