
जंगलों के आस-पास लगे चिप्पर, छीन रहे है जंगलों की हरियाली, डीएफओ ने कहा खुद जाएंगे मौका देखने
खिजराबाद (सच कहूँ/राजेंद्र कुमार)। Khizrabad News: खैर के अवैध कटान की घटनाओं के अलावा रिर्जव फारेस्ट व वाइल्ड लाइफ सेंचुरी एरिया कासंली के जंगल में पेड़ों पर पत्तियां व टहनियां तक नहीं दिखाई दे रही है। आस-पास के चिप्परों पर इनको काट कर बेचने का धंधा खूब चल रहा है। जिनको जंगल की निगेहबानी की जिम्मेदारी दी गई है उनका कहीं अता पता नहीं है। जंगल की एंट्री प्वायंट पर खैर समेत अन्य प्रजातियों के पेड़ों की टहनियां व पत्ते काट उन्हें पूरी तरह से खाली कर दिया गया है वहीं छोटे-छोटे सैकड़ों पौधे नीचे से ही काट लिए गए हैं। वही कई जगह मिटटी के अवैध खनन के निशान भी नजर आते हैं इस मामले में जब डीएफओ से बात की गई तो उनका कहना था कि वह खुद मौके पर जाकर चेक करेंगे व उसके बाद कार्रवाई करेंगे। Khizrabad News
नेशनल पार्क, रिर्जव फारेस्ट एरिया व वाइल्ड लाइफ सेंचुरी एरिया के समीप चिप्परों का कारोबार जंगलों को खाली करता जा रहा है। वन विभाग द्वारा अनुमति लेकर जंगलों के समीप लगाए जा रहे चिप्पर जंगलों को ही उजाड़ रहे हैं। जंगल क्षेत्र के आस-पास रहने वाले गांव के लोग बुग्गी व रेहडियों के माध्यम से सारा दिन इसी प्रकार पेड़ों की टहनियों व पत्तों को काट कर उनकी सप्लाई चिप्परों पर कर रहे हैं। Khizrabad News
कलेसर रेंज के कांसली जंगल का दौरा कर ऐसा लगता है कि जैसे मानों यह मात्र कहने को रिर्जव फारेस्ट रह गया हो। चिक्कन रोड पर कांसली के समीप फारेस्ट चौंकी के साथ वाले रास्ते से जैसे ही कांसली गांव की ओर जाया जाता है तो थोड़ी दूरी पर गांव की सीमा समाप्त होने पर एक सूखी नदी के बाद जंगल का एरिया शुरु हो जाता है। जो यहां के सरकारी स्कूल के बिल्कुल सामने हैं। यहां खुले समतल मैदान में खैर समेत जितनी भी प्रजातियों के पेड़ खडे है उनकी टहनियों व पत्तियों को पूरी तरह से नोच डाला गया है। यानी पेड़ पूरी तरह से गंजे हो चुके है। इसके साथ ही जो कुछ नई प्लांटेशन कुछ वर्ष पहले की गई होगी उन पतले पतले सैकड़ों पौधों को नीचे से काट डाला गया है।
समतल मैदान के साथ ही पूर्व की ओर जो पहाड़ियां है जिन पर इक्का- दुक्का पेड़ नजर आते हैं। वह भी ऊपर से काटे गए है यानी कहीं से यह एरिया कोई रिर्जव फारेस्ट नजर नहीं आता है। जंगल की एंट्री प्वायंट यानी नदी के बीच रेत-बजरी व गंजे हो चुके पेड़ों के साथ मिटटी का अवैध खनन नजर आता है जिसके गडड़ों के निशान साफ दिखाई देते हैं। जंगल के बीच से मिटटी का खनन कर उसको कहां ले जाया जा रहा है। मगर पूरे एरिया में कोई फारेस्ट कर्मी नजर नहीं आता, यानी पूरे एरिया को खुला छोड़ा गया है।
आस-पास के लोग बताते है कि यहां से पत्ते व टहनियां काट कर आस-पास के चिप्परों यानी पत्ता व टहनियां काटने की मशीनों पर ले जाया जाता है। इस कारोबार की वजह से जंगल लगभग खाली होते जा रहे हैं।
खुद मौके पर जाकर देखेंगे उसके बाद करेंगे कार्रवाई: डीएफओ
इस बारे में डीएफओ यमुनानगर वीरेंद्र गिल से बात की गई तो उनका कहना था कि कुछ शिकायतों के बाद उन्होंने लगभग दो तीन दिन पूर्व छछरौली में कार्यरत ट्रेनी आईएफएस को जांच के लिए भेजा था तो कुछ ऐसे मामले पकड़े गए है शायद वह इसके साथ लगता ही क्षेत्र है। एक चिप्पर की शिकायत भी मिली है जो इन कार्यों में शामिल है। उसको जल्द ही सील यानी बंद कर दिया जाएगा। बाकी कांसली में वह खुद जाकर जांच करेंगे व मौके का जायजा लेंगे। उसके बाद जो भी उचित कार्रवाई होगी की जाएगी। किसी को भी जंगलों से इस प्रकार की अवैध गतिविधियों की इजाजत नहीं दी जाएगी। Khizrabad News
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