जलालआणे आये जलाल जिओ…

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एक इलाही ज्योत आती है जो अज्ञान, स्वार्थों व बुराइयों में फंसे लोगों का मार्ग रोशन करती है व उन्हें सीधा मार्ग...

101वां अवतार दिवस | Shah Satnam Ji Maharaj

Shah Satnam Ji Maharaj | एक इलाही ज्योत आती है जो अज्ञान, स्वार्थों व बुराइयों में फंसे लोगों का मार्ग रोशन करती है व उन्हें सीधा मार्ग दिखाती है। बिना किसी स्वार्थ, बिना पैसा-पाई लिए जब संत इन्सान को नेकी-भलाई का मार्ग दिखाते हैं तो ये किसी चमत्कार से कम नहीं।

ऐसी ही इलाही ज्योत सच्चे मुर्शिद-ए-कामिल पूजनीय परम पिता Shah Satnam Ji Maharaj के रूप में प्रकट हुई, जिन्होंने मानवता को नफरत, ईर्ष्या व अज्ञानता के अंधकार से बाहर निकालकर भगवान को पाने का सच्चा व आसान मार्ग दिखाया। आपजी ने लोगों में भाईचारा, आपसी प्रेम और सौहार्द उत्पन्न करके जात-पात, ऊंच-नीच का भेदभाव मिटाया।

पूज्य पिता सरदार वरियाम सिंह जी सिद्धू के घर इकलौती संतान

पूूज्य परम पिता Shah Satnam Ji Maharaj गांव श्री जलालआणा साहिब, तहसील डबवाली वर्तमान में (कालांवाली) जिला सिरसा के रहने वाले थे। आप जी ने आज ही के दिन 25 जनवरी 1919 को पूज्य माता आसकौर जी की पवित्र कोख से पूज्य पिता सरदार वरियाम सिंह जी सिद्धू के घर इकलौती संतान के रूप में अवतार धारण किया। ईश्वरीय स्वरूप पूज्य परम पिता जी के पावन अवतार धारण करने के वक्त जुड़ा एक दिलचस्प वाक्य है।

Shah Satnam Ji Maharaj : इंसानियत की सच्ची मिसाल 

पूज्य पिता वरियाम सिंह जी सिद्धू गांव के जैलदार और बहुत बड़ी जमीन जायदाद के मालिक थे और घर में किसी भी चीज की कोई कमी नहीं थी। हर दुनियावी सुख सुविधा घर में उपलब्ध थी परन्तु उन्हें एक पीड़ा थी।

वह थी संतान की कमी। पूज्य सरदार वरियाम सिंह जी धार्मिक विचारों के धनी थे, गरीबों, जरूरतमंदो ंकी मदद भी बराबर की जाती थी, एक बार पूज्य माता-पिता जी की मुलाकात रब्ब के सच्चे फकीर से हुई। वो फकीर पूज्य माता-पिता जी के साधु स्वभाव और सच्चाई व ईमानदारी की सेवा भावना से बहुत खुश थे।

वो जब तक गांव श्री जलालआणा साहिब में रहे भोजन – पानी केवल यहीं पर इसी घर से ही लिया करते थे। उस फकीर – बाबा ने पूज्य माता-पिता जी से कहा भाई भगतो! आपकी सेवा परमेश्वर को मंजूर है। परमेश्वर आपकी मनोकामना जरूर पूरी करेंगे।

आप जी के लाडले में मुझे दिखते है ईष्टदेव (परमेश्वर) | Shah Satnam Ji Maharaj

एक दिन पूज्य माता जी ने ऐसे टकटकी लगाकर खड़े उस भाई को टोक भी दिया कि तुम रोजाना इतनी-इतनी देर तक क्या देखते हो? उस भाई ने नम्रता पूर्वक उत्तर दिया माता जी, आप जी के लाडले में मुझे ईष्टदेव (परमेश्वर) के दर्श-दीदार होते हैं।

मैं किसी गलत-भावना से नहीं श्रद्धापूर्वक दीदार करता हूं। पूज्य माता-पिता जी ने अपने लाडले का नाम सरदार हरबंस सिंह जी रखा और परम पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी (डेरा सच्चा सौदा के संस्थापक) से मिलाप के बाद सरदार हरबंस सिंह जी से बदलकर आप जी का नाम सरदार सतनाम सिंह जी (पूजनीय परम पिता Shah Satnam Ji Maharaj) हो गया।

 

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