चंडीगढ़ (सच कहूँ न्यूज)। अकाली दल के पूर्व मंत्री बिक्रम सिंह मजीठिया की अग्रिम जमानत अर्जी आज मोहाली की जिला अदालत ने खारिज कर दी। उनके खिलाफ कांग्रेस सरकार ने नशा तस्करी के मामले में मोहाली जिले में प्राथमिकी दर्ज की थी और मजीठिया की गिरफ्तारी के लिये एसआईटी गठित कर अनेक स्थानों पर छापेमारी की गई लेकिन अब तक वह पुलिस की गिरफ्त से बाहर हैं। उनके खिलाफ लुक आउट नोटिस जारी किया गया। मजीठिया ने कल अदालत में जमानत अर्जी दायर की जिसमें उन्होंने उन सभी बातों का जिक्र किया जिनको लेकर कांग्रेस सरकार उनको निशाना बनाना चाहती है। श्री मजीठिया ने कहा कि यह केस महज चुनावी स्टंट है तथा चुनाव से पहले उनके खिलाफ केस दर्ज करना इस बात की ओर इशारा करता है कि सरकार अकाली दल की छवि को धूमिल करने पर तुली है ।
क्या है मामला
उन्होंने कहा कि यह सब राजनीति से प्रेरित है और जब मेरे खिलाफ कोई सबूत ही नहीं तो यह सब बवंडर क्यों किया जा रहा है। मेरे खिलाफ मामला दर्ज करने के लिये तीन -तीन डीजीपी बदले गये हैं। जब स्थायी डीजीपी की नियुक्ति जल्द होनी है तो डीजीपी सहोता को क्यों हटाया गया और चटोपाध्याय को डीजीपी क्यों बनाया गया। चटोपाध्याय अकाली दल के दुश्मन हैं और वो कांग्रेस के प्रदेश अध्यक्ष नवजोत सिद्धू को खुश करने के लिये यह सब कर रहे हैं। ज्ञातव्य है कि मजीठिया के खिलाफ एफआईआर मादक पदार्थ निरोधी विशेष जांच दल की रिपोर्ट के आधार पर दर्ज की गई । यह रिपोर्ट पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय में नवंबर 2017 में सीलबंद लिफाफे में दाखिल की जा चुकी है।
एसआईटी का दावा है कि सीलबंद रिपोर्ट में मजीठिया का नाम नशा तस्करी रैकेट में संलिप्त आरोपी के रूप में दर्ज है। एसटीएफ के प्रमुख एडीजीपी हरप्रीत सिद्धू की ओर से दायर रिपोर्ट के आधार पर एनडीपीएस की धाराओं के तहत मजीठिया के खिलाफ मामला दर्ज किया गया है।
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