सम्पादकीय

राहुल गांधी के गढ़ में भाजपा की किलेबंदी

bharatiya janata party

भाजपा मिशन-2019 की तैयारी में जुट गई है। उसने अपनी रणनीति के केंद्र में यूपी व कांग्रेस के सियासी गढ़ अमेठी को रखा है। जबकि (bharatiya janata party) महागठबंधन की चुनावी तस्वीर अभी जमीन पर उतरती नहीं दिखती। भाजपा किसी भी तरह से यूपी को अपने हाथ से नहीं निकलने देना चाहती। अबकी बार उसके निशाने पर गांधी परिवार की राजनीतिक जमींन अमेठी है। स्मृति ईरानी व भाजपा पूरी तरह अमेठी पर कब्जा करना चाहती है। पिछले दिनों पीएम नरेंद्र मोदी ने अमेठी की जनता को पांच हजार करोड़ की योजनाओं का तोहफा दिया है। जिसमें रशिया और भारत के सहयोग से एक आर्डिनेंस फैक्ट्री का उद्घाटन भी किया है।

जहां से एके-203 राइफल का उत्पादन होगा। यूपीए सरकार में 2007 में इसकी नींव रखी गई थी। हालांकि इस (bharatiya janata party) पर राजनीति भी शुरू हो गई है। राहुल गांधी ने एक ट्वीट के जरिए पीएम मोदी पर झूठ बोलने का भी आरोप लगाया है। राहुल गांधी की तरफ से कहा गया है कि गन फैक्ट्री में उत्पादन पहले से हो रहा है। जिस पर ईरानी ने पलटवार किया है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी के सामने 2014 में अमेठी से स्मृति ईरानी चुनाव लड़ीं थी। जिसमें उनकी पराजय हुई थी।

ईरानी अमेठी को अपनी राजनैतिक जमींन के रुप में तैयार करना चाहती हैं। क्योंकि केंद्र और राज्य में भाजपा की सरकार है इसलिए (bharatiya janata party) सरकारी योजनाओं के जरिए विकास का खाका तैयार कर अपनी अहमियत जताना चाहतीं हैं। वह अमेठी से चुनाव भी लड़ना चाहती हैं। अब भाजपा उन्हें हरी झंडी देती है या नहीं यह वक्त बताएगा। यूपी की राजनीति 2014 के मुकाबले 2019 की जमींन काफी बदल चुकी है। 2014 में भाजपा 73 सीटों पर जीत दर्ज कर चुकी थी, जिसमें सहयोगी अपना दल भी शामिल है। चुनावी सर्वेक्षण बता रहे हैं कि इस बार भाजपा के लिए यूपी की राह आसान नहीं होगी।

क्योंकि जातिय गठजोड़ की वजह से उसे भारी नुकसान उठाना पड़ सकता है। जिसकी वजह से अमेठी में भी काफी बदलाव देखने को मिलेगा जो भाजपा के लिए बड़ी चुनौती होगी। गांधी परिवार के लिए अमेठी और रायबरेली की जमींन राजनीतिक लिहाज से बेहद उर्वर रही है। रायबरेली से इंदिरा गांधी का बेहद पुराना लगाव था बाद में सोनिया गांधी ने उसे अपना चुनावी क्षेत्र बनाया। अमेठी से राजीव गांधी लगातार चुने जाते थे। अब उनके बेटे राहुल गांधी ने इसे अपना गढ़ बनाया है। गांधी परिवार के सियासी किले अमेठी को भेदना आसान नहीं लगता है। फिलहाल राजनीति में कुछ कहा नहीं जा सकता है।

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