50-60 सालों तक काम करेंगे

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Spirituality
पूजनीय परम पिता शाह सतनाम जी महाराज का हुक्म मिलने पर पूज्य हजूर पिता जी अपने सच्चे मुुर्शिद-ए-कामिल के चरणों में सरसा में पधारे। पूज्य हजूर पिता जी ने परम पिता जी के वचनों में प्रार्थना की, ‘‘हे सतगुरू जी मैं इसके काबिल नहीं हूं। आप हमेशा युगों युगों तक अटल रहो जी, ऐसे ही प्यार बख्शते रहना जी।’’ यह सुनकर परम पिता जी ने फरमाया,‘‘आप चिंता न करो हम थे, हम हैं और हम ही रहेंगे। आप जाओ और अपना काम संभालो, कराहा आदि लाओ हम आपको बब्बर शेर बनाएंगे।’’ कुछ समय उपरांत परम पिता जी ने हजूर पिता जी को अपना गद्दीनशीन बनाकर हुक्मनामा तैयार करवाया। 21 सिंतबर 1990 दिन शुक्र्रवार शाम को परम पिता जी ने दरबार में रहने वाले सभी सत् बह्मचारी सेवादारों को तेरा वास में बुला लिया व असली बात का खुलासा करते फरमाया, ‘‘प्यारे बच्चो! जो आप पूरे वर्ष भर बैठकें करते रहे हो उसका मकसद पूरा हो गया है।
परसों 23 सितंबर को सभी बातें सामने आ जाएंगी, जो हम चाहते थे, बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने उससे भी कई गुणा अधिक अच्छा उत्तराधिकारी ढूंढ कर दिया है।’’ जिस तरह एक माली पौधे को कलम चढ़ना करता है। कलम चढ़ाया गया पौधा दूसरे पौधे से अधिक अच्छी किस्म का फल देता है। इसी प्रकार हम भी उसी (पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां) उसी पौधे की तरफ कलम चढ़ाकर ऐसा बब्बर शेर बनाएंगे, जिसका दुनिया में कोई मुकाबला नहीं कर सकेगा जो कम से कम 50-60 सालों तक काम करेगा। किसी ने भी किसी तरह की चिंता नहीं करनी है व हमारे वचनों पर सभी ने फूल चढ़ाने है।
 यह वचन पूजनीय परम पिता जी ने तीन-चार बार दोहराये। उपरोक्त वचनों को सुनकर कई सत् ब्रह्माचारी सेवादार वैराग्य में आ गए। पूजनीय परम पिता जी ने उनको अपना भरपूर प्यार प्रदान करते हुुए फरमाया,‘‘बेटा रोना नहीं है। किसी ने भी दिल छोटा नहीं करना है, हम कहां जा रहे हैं, हम तो हमेशा आपके साथ हैं व हमेशा ही आपके साथ रहेंगे।’’ इसके बाद पूजनीय परम पिता जी ने मोहन लाल को सबकुछ समझाते हुए कहा कि श्री गुरूसर मोडिया वाले लड़के गुरमीत सिंह जी व उनके परिवार को लेकर आओ। परम पिता जी के हुक्म अनुसार मोहन लाल व सेवादार श्री गुरूसर मोडिया के लिए रवाना हो गए।

जब बुधरवाली में बरसी रहमत

यह दरबार रेलवे लाईन हनुमानगढ़ से श्रीगंगानगर वाया सादुलशहर के साथ जुड़ा हुआ है। इस गांव को चक्क फतेह सिंह वाला रेलवे स्टेशन लगता है जो डेरे के बिल्कुल ही सामने है। पूजनीय मस्ताना जी महाराज ने साध-संगत की प्रार्थना पर इस गांव में सत्संग किया। गांव की साध-संगत की ओर से बेनती करने पर मस्ताना जी महाराज ने वहां डेरा मंजूर कर दिया। डेरे के लिए जमीन का प्रबंध भी कर लिया।
पूज्य शहनशाह जी के हुक्म अनुसार डेरा का निर्माण कार्य शुरू हो गया। काफी साध-संगत श्री गंगानगर से सेवा के लिए सुबह आती और शाम को वापिस चली जाती। उस समय सड़क भी नहीं थी। एक दिन साध-संगत ने अपने सच्चे मुर्शिदे कामिल जी की पवित्र हजूरी में डेरे के पास ही रेलवे स्टेशन बनाने की प्रार्थना की, ‘‘सच्चे पातशाह जी! अगर रेलवे स्टेशन आश्रम के नजदीक बन जाए तो सेवा के लिए काफी समय बच जाएगा जी। सार्इं जी ने उनकी विनती स्वीकार की। बेपरवाह जी ने इधर तो आश्रम का निर्माण कार्य शुरू करवाया और उधर उन दिनों आंधी ऐसी चलने लगी की रूकने का नाम ही नहीं ले रहे थी।
बारिश का तो नामों निशान ही नहीं था। आखिर आसपास के गांवों में चर्चा चल पड़ी कि इधर ही बारिश हो रही है और इधर ही बाबा जी ने आश्रम बनाना शुरू कर दिया है। अब न तो बारिश होगी और न ही आंधी रूकेगी। उन गांवों के कुछ लोग एकत्रित होकर आप जी के पास आए और अर्ज की,‘‘बाबा जी! कितने दिन से अंधेरी चल रही थी। आप बारिश करवा दो। हमारी फसलें ही खराब हो रही हैं।’’ दातार जी ने फरमाया, ‘‘वरी! हम यहां बारिश करवाने नहीं आए।
मालिक की रजा में रहना चाहिए। बारिश हो जाए तो उसकी मर्जी और न हो तो भी उसकी मौज।’’ रेलवे स्टेशन संबंधी बेपरवाह जी ने हुक्म फरमाया, ‘‘सतगुरू के आगे प्रार्थना करेंगे कि रेलवे स्टेशन डेरा के सामने ही बन जाए ताकि श्री गंगानगर, लुधियाना, दिल्ली व सरसा से आने वाली साध-संगत बड़े ही आराम के साथ दरबार में पहुंच जाया करे।’’ पूजनीय बेपरवाह जी वचन फरमाते हुए रेलवे स्टेशन की तरफ चल पड़े। उस समय कुछ सेवादार भी पूजनीय बेपरवाह जी के साथ थे। पूजनीय दातार जी ने रेल पटड़ी के साथ-साथ चलते अचानक एक जगह पर रूक गए। आप जी ने अपने डंडे से ईशारा करते हुए वचन फरमाए,‘‘भाई! यहां स्टेशन बनेगा और गाड़ी रूका करेगी।’’ उस दिन भी बहुत ही आंधी चली। इतनी तेज आंधी में रेत के बड़े बडेÞ टीले हिल गए।
सारा आश्रम भी रेत के साथ भर गया। वहां सेवा कर रही साध-संगत को बहुत मुश्किल हुई। साध-संगत भी मन ही मन में बारिश होने के लिए अरदास करने लगी कि अगर बारिश आ जाए तो गीली रेत हटानी आसान हो जाएगी। अगर भक्त की मांग जायज हो तो मालिक जरूर पूरी करता है। थोड़ी देर बाद ही बारिश शुरू हो गई। सारा वातावरण एक दम से ठंडा हो गया। हवा भी बहुत तेज व बरसात भी मुसलाधार। रात भर बारिश होती रही। हवा भी इतनी तेज थी कि बड़Þे बड़े पेड़ भी जड़ से उखड़ गए। डेरे के सामने रेलवे लाईन की तरफ बड़े बड़े पेड़ थे। तेज हवा के कारण वह भी जड़ से उखड़ गए। उन पेड़ों के रेलवे लाईन पर गिरने से रेल यातायात भी बहुत प्रभावित हुआ।
इस तरह लगातार कई घंटों तक बारिश होती रही। पूजनीय बेपरवाह शाह मस्ताना जी महाराज ने लंगर में पुड़े बनवाए व साध-संगत को खूब भोजन करवाया गया। बारिश होने से सारा वातावरण बहुत ही सुहावना हो गया। बारिश रूकने पर चारों तरफ खुशी की लहर दौड़ गई। मौसम भी एकदम से साफ हो गया। पूजनीय बेपरवाह जी मुस्कुराते हुए बाहर आए। बेपरवाह जी घूमने के लिए डेरे के बाहर रेलवे लाईन की तरफ आ गए। पवित्र कर कमलों के साथ अपना डंडा घुमाते हुए जब रेलवे पटड़ी की तरफ आगे बढ़े तो देखा कि सामने रेलवे लाईन पर बड़े बड़े पेड़ गिरे हुए थे। सामने देखा तो मटीली (सादुलशहर) की तरफ से रेलगाड़ी आ रही थी। पूजनीय बेपरवाह जी उन गिरे हुए पेड़ों के पास जाकर रूक गए। उधर से रेलगाड़ी भी धीरे-धीरे आते हुए वहां आकर रूक गई। बाद में वहीं रेलवे स्टेशन का भी निर्माण हो गया।

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