किसानों का फैसला, अब खुद लड़ेंगे विधानसभा चुनाव

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संसद में उठाएंगे किसानों की समस्याएं

चंडीगढ़ (सच कहूँ/ अश्वनी चावला)। पारंपरिक पार्टियों द्वारा किसानों की अनदेखी करने व संसद में किसानों की समस्याओं के समाधान के लिए आवाज नहीं उठाने से किसान बेहद नाराज हैं। अब किसानों ने अपने दम पर ही अपनी समस्याओं को हल करवाने की ठान ली है। उन्होंने ऐलान किया है कि अब यूनियन अपने उम्मीदवारों को चुनाव में उतारेगी।
जानकारी के अनुसार वीरवार को चंडीगढ़ में किसान सम्मेलन का आयोजन किया गया, जिसमें किसान नेताओं ने लोकसभा चुनावों में देरी के चलते किसी उम्मीदवार की घोषणा नहीं की, वहीं विधानसभा चुनावों में अपने उम्मीदवार खड़े करने का ऐलान किया। नेताओं ने कहा कि किसान उम्मीदवारों को विजेता बनाकर वह विधानसभा में अपनी समस्याओं को लेकर आवाज बुलंद करेंगे।

हालांकि किसानी संसद तो इसी लोक सभा चुनाव में अपने उम्मीदवार घोषित करना चाहती थी लेकिन समय कम रहने के कारण इस फैसले को विधान सभा से लागू किया जाएगा। किसानी मुद्दों पर गंभीर चर्चा करने व किसानों के साथ हो रहे भेदभाव संबंधी किसानी संसद बुलाई गई थी, जिसमें विशेषज्ञ दविन्दर शर्मा को स्पीकर बनाया गया था तो समूह पार्टियों के नुमायंदों को अपना-अपना पक्ष रखने के लिए बुलाया गया था।

किसानों का सबसे बड़ा सवाल था कि उनकी फसल को तय मूल्य क्यों नहीं दिया जा रहा है और अमीर लोगों के कर्ज माफ किए जा रहे हैं लेकिन किसानी कर्ज के बारे में कोई नेता बात तक नहीं करता। पंजाब ने भी कर्ज माफी की लेकिन इसमें धोखा ही किया है, क्योंकि कर्ज माफी की समय सीमा तय कर दी गई है। किसानी संसद में बड़े स्तर पर सवाल उठाए गए। किसानी संसद में कांग्रेस पार्टी तो गायब ही रही, जिस कारण किसानों ने कांग्रेस पार्टी को भगौड़ा घोषित करते हुए किसानों के साथ धोखा करने वाली पार्टी भी कह दिया।

किसानों को पहुंचाया 45 लाख करोड़ रुपए. का नुकसान

किसान विशेषज्ञ दविन्दर शर्मा ने कहा कि एक स्टडी के अनुसार 2001 से लेकर 2017 तक किसानों द्वारा पैदा की जा रहे अनाज की कीमतों में उनका विस्तार नहीं किया गया जिस कारण किसानों को इस समय केवल भारत में ही 45 लाख करोड़ रुपए का नुक्सान हुआ है। जिस कारण किसानों की यह हालत है। आज पंजाब सहित देश का किसान खुदकुशी कर रहा है, जिसके लिए सरकारें जिम्मेदार हैं।

कांग्रेस ने किया किसानों के साथ धोखा: अकाली दल

अकाली दल की तरफ से किसानी संसद में पहुंचे दलजीत सिंह चीमा ने कहा कि कांग्रेस पार्टी ने सीधे तौर पर किसानों के साथ धोखा किया है, क्योंकि कर्ज माफी का वायदा 90 हजार करोड़ रुपए का था, जब किसानों का केवल 2 लाख रुपए तक का ही कर्ज माफ किया जा रहा है। किसानों के साथ धोखा करते हुए कांग्रेस पार्टी ने वोट बटोरकर सत्ता हासिल की थी। उन्होंने कहा कि किसानों के साथ धोखा करने वाली कांग्रेस का आज कोई भी नुमाइंदा इस किसानी संसद में इसी कारण नहीं आया है, क्योंकि उनके पास कोई जवाब नहीं है। आम आदमी पार्टी के पास भी इस मुद्दे पर कोई जवाब नहीं है।

सभी माफिया को जेलों में डालना था: कुलतार संधवा

आम आदमी पार्टी के विधायक कुलतार संधवा ने किसानी संसद में कहा कि यदि उनकी सरकार आ जाती तो उन्होंने रेत माफिया, ट्रांसपोर्ट माफिया, केबल माफिया और नशा माफिया को जेल भेजना था, जिससे मिलने वाले करोड़ों रुपए की कमाई से किसानों का कर्ज माफ करना था लेकिन सत्ता में नहीं आने के कारण आज भी माफिया चल रहा है। उन्होंने कहा कि किसान ज्यादा खुदकुशी बेरोजगारी व बीमारी के साथ कर रहे हैं। किसानों को अच्छा मूल्य नहीं मिलने के कारण किसान कर्ज उठाकर अपने पुत्रों को विदेश भेज रहा है।

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