मनमते लोगों का संग कभी न करें

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Anmol Vachan

सरसा। पूज्य गुरु संत गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां फरमाते हैं कि मालिक से प्यार लगाना आसान है लेकिन ओड़ निभाना बड़ा मुश्किल है। प्रत्येक इन्सान मालिक से प्यार करने के लिए कह तो देता है लेकिन जब आखिर तक ओड़ निभानी होती है तो मन और मनमते लोगों का टोला उस इन्सान को मालिक से ओड़ नहीं निभाने देता। वह उसकी राह में रुकावटें व परेशानियां खड़ी कर देते हैं। इन्सान पर मन इतना हावी हो जाता है कि मनमते लोगों व मन की बातों में आकर वह एक पल में सतगुरु से मन मोड़ लेता है।

मालिक का प्यार पाना आसान

पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि मन बड़ी जालिम ताकत है और उसको मनमते लोग हवा देने के लिए तैयार बैठे हैं। पहले तो इंसान को उसका मन हवा देता है लेकिन वह सुमिरन व भक्ति करता है जिस कारण सतगुरु का प्यार उसको यह करने से रोकता है। फिर मनमते लोग आ जाते हैं जिनका खुद का कोई ईमान व कोई आधार नहीं होता। वो न किसी के परोपकार को मानते हैं और न ही मालिक का अहसान मानते हैं। पूज्य गुरु जी फरमाते हैं कि इस जालिम मन से लड़ो। मालिक का प्यार पाना आसान है लेकिन उससे ओड़ निभाना काफी मुश्किल है क्योंकि ओड़ निभाने में काफी समय होता है।

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इन्सान का पता नहीं कब वह इस संसार से चला जाए लेकिन वह जब तक इस नश्वर संसार को त्यागकर नहीं जाता तब तक मनमते लोग उस इन्सान को टोकते रहते हैं। फिर भी जो लोग उस मालिक का दर पकड़े हुए हैं और उस मालिक के प्यार में चलते रहते हैं, वो खुद और उनके मां-बाप धन्य होते हैं व उनकी कुलें भी धन्य हो जाती हैं क्योंकि मां-बाप के संस्कार ही बताते हैं कि आपके अंदर कैसी आदतें हैं।

 

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