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    अमेरिका ने दिया विश्व बंधुत्व का संदेश

    America

    अमेरिका के ह्यूुस्टन में एक सिख पुलिस अधिकारी संदीप सिंह धालीवाल नस्लीय हमले (हैट क्राइम) में मारा गया। भले ही यह घटना टेक्सास राज्य के ह्यूस्टन में घटी, लेकिन घटना ने अमेरिका वासियों को झकझौर दिया। नस्लीय हमलावरों ने जिस प्रकार सन्दीप पर हमला किया, उससे कहीं ज्यादा करारा जवाब अमेरिका ने नस्लीय हमलावरों को दिया। हमलावरों को अमेरिका की अदालत ने कठोर सजा दी। अमेरिका ने नस्लीय हिंसा के खिलाफ संदेश देते हुए एक पोस्ट आफिस का नाम संदीप सिंह धालीवाल रखने का निर्णय लिया है।

    सन्दीप सिंह इसी वर्ष 27 सितम्बर को हैट क्राइम का शिकार होकर मारा गया था। सन्दीप की याद में पोस्ट आफिस का नाम रखने का निर्णय अमेरिका की संसद में लिया जाना एक एतिहासिक निर्णय है जिसने स्पष्ट कर दिया है कि नस्लीय हिंसा के लिए अमेरिकी कानून व संस्कृति में कोई स्थान नहीं है।

    यही नहीं अमेरिका ने इस घटना के बाद नक्सलवाद को पराजित करने के लिए अधिकारियों को अपने सांस्कृतिक चिह्न धारण करने की मंजूरी भी दे दी। धालीवाल ने अपनी ड्यूटी दौरान जिस प्रकार की धार्मिक सद्भावना, समानता, बच्चों के प्रति प्यार व ड्यूटी प्रति जिम्मेदारी दिखाई वह अमेरिका वासियों के दिलों में बस गए थे। यह घटनाक्रम भारतीयों के लिए भी प्रेरणादायक है। हम धर्म, क्षेत्रों, भाषाओं के नाम पर बंटे हुए हैं। हम विदेशी लोगों को तो क्या सहन करेंगे, भारतीयों को ही सहन नहीं कर पा रहे।

    महाराष्टÑ में कुछ संगठन उत्तरी भारत के लोगों को ही सहन करने के लिए तैयार नहीं। अपने ही देश में लोग बेगाने की तरह महसूस करते हैं। एक देश-एक कानून का नारा दिए जाने के बावजूद राज्य के हितों के नाम पर बाहरी राज्यों के लोगों को बेगाना समझा जाता है। दरअसल इस रुझान की जड़ें राजनीति में हैं। वोट की खातिर राजनीतिक पार्टियां राज्य के हितों की सुरक्षा का प्रचार इस तरह करती हैं, जो राज्य के लोगों को एक दूसरे का शत्रु बना देती हैं।

    यदि कनाडा की बात करें तो वहां एक दर्जन से अधिक सांसद भारतीय मूल के हैं। यदि ऐसा हमारे देश में होता तो स्वदेशी का नारा जरूर शुरू हो जाता। लुधियाना में गत समय पूर्व प्रवासी मजदूरों की बढ़ रही संख्या को पंजाबी संस्कृति के लिए खतरा बताया गया था। यही हाल असम में रहते बिहारी का होता रहा है। भारतीय संस्कृति विश्व बंधुत्व की संस्कृति है जिसे फिर जीवित करने की आवश्यकता है।

     

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