लेख

सभी टीमें कंफर्ट जोन में खेल रही हैं

All teams are playing in the Conflict Zone
  • इस विश्व कप में टीम इंडिया को कहां देखते है?

विश्व की बेहतरों टीमों में से एक है। हमारी टीम और सबसे प्रथम दावेदार है। लेकिन इस विश्व कप में खेल रही सभी टीमों के प्रदर्शन ने खेल को इतना सुसुज्जित कर रखा है कि कुछ भी संभव है। जिस तरह का प्रदर्शन की उम्मीद थी उससे भी बढ़कर हो रहा है। यदि टीम इंडिया की बात करें तो पिछले कुछ समय से वो ऐसा रिजल्ट लगातार दे रहे हैं कि उन देश की जनता का भरोसा बन चुका। जीत की कतार में हम सबसे आगे हैं।

  • कुछ विशेषज्ञों के अनुसार इंग्लैंड की पिचों पर बड़े स्कोर संभव नही थे, एलेकिन हर दूसरे मैच में बड़े स्कोर देखे जा रहे हैं। आपका क्या मानना है?

यहां सभी अचंभित है लेकिन बदलते परिवेश में सब बदला तो स्वभाविक बात है क्रिक्रेट भी बदला। अब एक दशक पूर्व भी क्रिकेट इतने आक्रमक तरीके से नहीं खेला जाता था लेकिन जब से टी.20 फॉर्मेट आया है तब से इस खेल में किसी भी चीज की गारंटी व वारंटी खत्म हो चुकी है मतलब अब कुछ संभव है। किसी पिच, किसी टीम और किसी खिलाड़ी के विषय में अब कुछ नहीं कहा जा सकता इसलिए यह हो रहा है। दरअसल अब क्रिकेट इतना खेला जाता है कि जिस वजह से खिलाड़ी इतने परफेक्ट हो चुके हैं कि अब विश्व कप जैसे खिताब को भी वह छोटे टूनार्मेंट की तरह खेल रहे हैं साथ ही सब कंफर्ट जोन में दिख रहे हैं।

  • इस बार आपको कौन कौन सी बात प्रभावित कर रही हैं?

सभी टीमें अपने स्तर पर बेहतर कर रही हैं लेकिन इस बार बंग्लादेश ने सबसे ज्यादा चौकाया है। बड़ी टीमों की तरह खेल रही है। सबसे बड़ी बात स्कोर चेस करना हो या बनाना हो, दोनों ही स्थिति में अंत तक हार नही मान रही है। मेरे हिसाब से इतना उत्साह पहले कभी नही देखा। बाकी सभी पूर्व विजेता टीमें हर बार की तरह बेहतर प्रदर्शन करके फाइनल की ओर कदम बढ़ा रही हैं।

  • शिखर धवन के जाने से क्या प्रभाव पड़ेगा?

इस बात में कोई संदेह नहीं कि धवन एक शानदार खिलाड़ी हैं और वो जब तक क्रीज पर रहते हैं तो विश्वास नहीं टूटता। अपने करियर में लगातार बेहतर प्रर्दशन देने वाले बल्लेबाजों में बहुत कम होते हैं, धवन उनमे से एक हैं। इसलिए फर्क पड़ना स्वभाविक है लेकिन जैसे की हमारे पास विकल्प के तौर पर एक से बढ़कर एक खिलाड़ी हैं तो घबराने की जरुरत नहीं हैं। डर तब लगता है जब हमारे बैकअप में बहुत अच्छे खिलाड़ी न हों। रिषभ पंत अच्छा करेगें। लेकिन शिखर के मन में यह कुंठा जिंदगी भर रहेगी कि वो इतने बेहतर प्रदर्शन करने के बाद भी बाहर हो गए। सचिन तेंदुलकर ने भी कहा कि यह धवन के लिए बहुत कठिन समय है और वो दर्द मैं समझ सकता हूं। हांलाकि यह खेल है और इसे इतना ही समझना चाहिए।

  • टीम इंडियां की कुछ खूबी या कमी?

कमियां तो कोई भी नहीं हैं। और बात करें खूबियों की तो उसकी लंबी कतार है। सबसे अच्छी बात यह है कि टीम में हर आयु वर्ग का खिलाड़ी है जो एक जैसा प्रदर्शन कर रहा है। यहां धौनी की प्रशंसा करूंगा कि बढ़ती आयु में भी आक्रमकता कम होने की बजाए लगातार बढ़ रही है। कोहली के कप्तान होने के बावजूद भी ग्राउंड पर धोनी ही कप्तान की तरह व्यवहार करते हैं। शानदार तालमेल के साथ बढ़िया प्रदर्शन दिखता है।
-योगेश कुमार सोनी

 

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