नई दिल्ली (सच कहूँ न्यूज)। दिल्ली विधानसभा के अध्यक्ष विजेन्द्र गुप्ता ने नियंत्रक एवं महालेखा परीक्षक (कैग) रिपोर्ट को दबाने पर गहरी चिंता जताते हुए कहा कि पूर्ववर्ती सरकार ने कैग रिपोर्टों को सदन में प्रस्तुत न करके जानबूझकर और सुनियोजित रूप से संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया है। गुप्ता ने कैग रिपोर्ट पर सदन में अल्प चर्चा के बाद आज कहा, ‘रिपोर्ट को प्रस्तुत करने की एक पृष्ठभूमि है जिसे उजागर किया जाना आवश्यक है ताकि इस सदन के हमारे सदस्य रिपोर्ट पर विचार-विमर्श में प्रभावी रूप से भाग ले सकें जो आज सदन में विचाराधीन है। यह इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि हमारे कई सदस्य पहली बार निर्वाचित हुए हैं और यह पृष्ठभूमि उन्हें विचार-विमर्श में रचनात्मक रूप से भाग लेने में सहायता करेगी।
उन्होंने कहा कि कैग जवाबदेही, पारदर्शिता और सुशासन को बढ़ावा देता है। इसे ह्यसंवैधानिक प्रहरीह्ण कहा जाता है और सर्वोच्च न्यायालय ने इसके कार्य को संविधान की मूल संरचना का हिस्सा बताया है। कैग जनता, विधायिका और कार्यपालिका को स्वतंत्र और विश्वसनीय आश्वासन प्रदान करता है कि सार्वजनिक धन की वसूली और उसका उपयोग प्रभावी एवं दक्षता से किया जा रहा है।
अध्यक्ष ने कहा,ह्ल मुझे इस बात से गहरी चिंता और आक्रोश है कि कैग रिपोर्टों को दबाया गया और पूर्ववर्ती सरकार द्वारा रिपोर्टों को सदन में प्रस्तुत न करके जानबूझकर और सुनियोजित रूप से संवैधानिक प्रावधानों का उल्लंघन किया गया। कैग रिपोर्ट पेश नहीं किये जाने के मामले में दिल्ली उच्च न्यायालय की ओर कठोर टिप्पणियां की है।
उल्लेखनीय है कि दिल्ली की मुख्यमंत्री रेखा गुप्ता ने मंगलवार विधानसभा में कैग की रिपोर्ट सदन के पटल पर रखी जिसमें दिल्ली की पूर्ववर्ती आम आदमी पार्टी सरकार के कार्यकाल की विवादास्पद आबकारी नीति के बारे में विभिन्न अनियमितताओं को रेखांकित करते हुये कठोर टिप्पणियां की गयी हैं। कैग की रिपोर्ट विधानसभा के सत्र के दूसरे दिन सदन के पटल पर रखी गयी, जिसमें कहा गया है कि दोषपूर्ण 2021-22 आबकारी नीति के कारण दिल्ली सरकार को दो हजार करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ।