CBSE New Rule: नई दिल्ली/हिसार, सच कहूँ/संदीप सिंहमार। केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने दसवीं कक्षा की बोर्ड परीक्षा प्रणाली में बड़ा बदलाव किया है। इसके तहत 2026 से 10वीं की बोर्ड परीक्षाएं साल में दो बार आयोजित की जाएँगी। यह नया ड्राफ्ट रेगुलेशन देश के शिक्षा क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण परिवर्तन का संकेत है, जो न केवल छात्रों के लिए बल्कि सभी संबंधित हितधारकों के लिए भी लचीलापन और चुनौतियाँ लेकर आएगा। सीबीएसई द्वारा प्रस्तावित यह नया नियम 2025-26 सत्र से लागू होगा। शैक्षणिक सत्र 2026 में, पहली बार बोर्ड परीक्षाएं दो चरणों में आयोजित की जाएंगी। पहला चरण 17 फरवरी से 6 मार्च 2026 तक और दूसरा चरण 5 मई से 20 मई 2026 तक होगा। यह बदलाव छात्रों को परीक्षा के प्रति अधिक लचीलापन प्रदान करेगा, जो कि शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक पहल मानी जा रही है। यह महत्वपूर्ण सवाल उठता है कि क्या सभी छात्रों को साल में दो बार परीक्षा में बैठना अनिवार्य होगा। वर्तमान में उपलब्ध सूचनाओं के अनुसार, छात्रों को दोनों परीक्षाओं में बैठने की आवश्यकता नहीं होगी। अर्थात्, वे चाहें तो केवल एक परीक्षा में भाग लेकर अपने परिणाम प्राप्त कर सकते हैं। यह विकल्प छात्रों को उनकी तैयारी और व्यक्तिगत स्थिति के अनुसार निर्णय लेने की स्वतंत्रता देगा।
फाइनल रिजल्ट कैसे तय होगा? CBSE New Rule
छात्रों के फाइनल रिजल्ट की गणना के लिए दोनों परीक्षाओं के परिणाम को ध्यान में रखा जाएगा। सीबीएसई इस बात पर विचार कर रहा है कि किस तरह से छात्रों के प्रदर्शन का संकलन किया जाए ताकि उनके तात्कालिक ज्ञान और अध्ययन के स्तर का सही आंकलन किया जा सके। दोनों परीक्षाओं में प्राप्त अंक एक विशेष अनुपात में मिलाए जाएंगे, जिससे छात्रों का अंतिम परिणाम सुनिश्चित होगा। इससे छात्रों को अपनी कमजोरियों को पहचानने और उन्हें सुधारने का अवसर भी मिलेगा।
9 मार्च तक मांगा फीडबैक
सीबीएसई ने सभी स्टेकहोल्डर्स से इस ड्राफ्ट पर 9 मार्च तक फीडबैक देने का अनुरोध किया है। यह प्रक्रिया सुनिश्चित करती है कि सभी हितधारक, जिनमें छात्र, माता-पिता, शिक्षक और शैक्षणिक संस्थाएँ शामिल हैं, अपनी राय व्यक्त कर सकें। यह पारदर्शिता शिक्षा के क्षेत्र में एक सकारात्मक कदम है और इससे यह सुनिश्चित होगा कि सभी समुदायों की धारणाएं और चिंताएं ध्यान में रखी जाएँगी। यह निर्णय स्पष्ट रूप से भारतीय शिक्षा प्रणाली में एक नई दिशा का संकेत देता है। छात्रों के लिए दो बार बोर्ड परीक्षा देने की संभावना उनके लिए एक अवसर और चुनौती दोनों है। इससे न केवल परीक्षा के प्रति छात्रों के मानसिक दबाव को कम करने में मदद मिलेगी, बल्कि वे अपनी परफॉरमेंस में सुधार करने के लिए अधिक अवसर प्राप्त करेंगे। आखिरकार, शिक्षा का उद्देश्य केवल ज्ञान का संचार करना नहीं बल्कि छात्रों को समग्र विकास की दिशा में अग्रसर करना भी है। इसलिए, इस नए नियम पर सभी हितधारकों की सक्रिय भागीदारी इस प्रक्रिया के सफल क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।