हरियाणा : ‘नरकों की नानी’ को बेचने पर पाबंदी लगाने को तैयार 704 पंचायतें

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Manohar Lal Khattar

ग्राम पंचायतों और सामाजिक संस्थाओं के सहयोग से 704 गांवों में शराब के ठेके बंद करेगी सरकार (704 panchayats )

चंडीगढ़ (अनिल कक्कड़)। धार्मिक गंरथों एव संतों महापुरुषों ने शराब को ‘नरकों की नानी’ की संज्ञा दी है। संत अक्सर अपने संबोधन में फरमाते हैं कि गंभीर पापों की जड़ में शराब होती है। यह इंसान को नरकों में ले जाने के लिए मां की मां यानि नानी का काम करती है। वहीं संत-फकीरों, प्रदेश की महिलाओं और सामाजिक संस्थाओं कोशिशें रंग लाती नजर आ रही हैं। हरियाणा प्रदेश (704 panchayats ) की 704 ग्राम पंचायतें अपने गांवों से शराब के ठेके बंद करने को राज़ी हो गई हैं। इन 704 ग्राम पंचायतों ने राज्य सरकार को लिखित में शराब के ठेके बंद करने की अपील की है। वहीं सरकार पंचायतों द्वारा की गई इस मांग को जल्द पूरा करने के संबंध में कदम उठाने शुरू कर दिए गए हैं।

हरियाणा : ‘नरकों की नानी’….

इस बाबत जानकारी प्रदेश के उप मुख्यमंत्री दुष्यंत चौटाला ने दी। बता दें कि प्रदेश की भाजपा-जजपा सरकार ने प्रदेश की सभी ग्राम पंचायतों से शराब के ठेके बंद करने संबंधी अर्जियां मांगी थी। सरकार ने कहा था कि जिन गांवों में आपसी सहमति से ग्राम पंचायत यह चाहती है कि गांव में शराब के ठेके बंद हों, वे सरकार को लिखित में दें। इस प्रक्रिया में प्रदेश की 704 ग्राम पंचायतों ने सरकार से अपने-अपने गांव में शराब के ठेके बंद करने की अपील की है।

दुष्यंत चौटाला ने अपनी माता को दिया श्रेय

वहीं प्रदेश की 704 ग्राम पंचायतों द्वारा शराब की ब्रिकी बंद करने के प्रस्ताव पर मोहर लगाने की श्रेय दुष्यंत चौटाला ने अपनी माता नैना चौटाला को दिया। उन्होंने कहा कि ‘‘आप सब हरियाणवी लोगों ने प्रदेश में शराब की बिक्री को ग्राम पंचायत और सामाजिक भागीदारी से निर्धारित करने के लिए सैकड़ों बार ‘हरी चुनरी चौपाल’ के माध्यम से मेरी माताजी श्रीमती नैना चौटाला जी के समक्ष अपनी भावना रखी थी। इसलिए इस बार आप सब की सोच को सर्वोपरी मानकर हरियाणा सरकार शराब के ठेकों में आपकी इच्छा अनुसार कमी करने जा रही है।’’

रोहतक और मेवात में एक भी पंचायत ने ठेके बंद करने की अर्जी नहीं दी

वहीं प्रदेश के रोहतक और मेवात जिलों में एक भी पंचायत ऐसी नहीं मिली जो कहे कि शराब के ठेके बंद होने चाहिए। बता दें कि दोनों जिले प्रदेश में अहम स्थान रखते हैं लेकिन महिलाओं के लिए आवाज उठाने वाले लोगों की कमी के चलते एक भी ग्राम पंचायत ठेके बंद करने का साहस नहीं दिखा पाई।

महिलाएं भोगती हैं नर्क

ग्रामीण आंचल में शराब के सेवन के बाद पुरुषों के आतंक से घरेलु महिलाएं जीवित रहते नरक भोगती हैं। पैसा और स्वास्थ्य की बर्बादी के साथ-साथ सामाजिक तौर पर भी शराबी इंसान की इज्जत तार-तार होती रहती है। ऐसे में घर की महिलाएं पुरुषों से ज्यादा पीड़ित होती हैं, उनके साथ शराब के नशे में पुरुष मार-पीट करते हैं, असामाजिक व्यवहार करते हैं। ऐसे में महिलाओं के सम्मान और उन्हें इज्जत की जिंदगी जीने देने के लिए शराब के ठेकों की बंदी जरूरी है। ऐसे में सरकार द्वारा दिए गए प्रस्ताव को 704 ग्राम पंचायतों ने स्वीकार किया है और अब इन गांवों में शराब नहीं बेची जाएगी। जिससे खास तौर पर महिलाओं के जीवन स्तर में काफी सुधार होने की संभावना है।

सबसे ज्यादा भिवानी में ग्राम पंचायतों ने कहा बंद करो ठेके

सरकार को प्राप्त हुई अर्जियों में सबसे ज्यादा 122 अर्जियां भिवानी जिले की ग्राम पंचायतों ने दी हैं। इसके बाद जींद जिले की 90 व रेवाड़ी की 85 ग्राम पंचायतें ठेके बंद करने की अर्जी दे चुकी हैं।

जिला ठेके बंद करवाने वाली पंचायतें (704 panchayats )

1. अंबाला 11
2. भिवानी 22
3. फरीदाबाद 8
4. फतेहाबाद 30
5. गुरुग्राम(ईस्ट) 2
6.गुुरुग्राम (वैस्ट) 23
7. हिसार 56
8. जगाधरी 20
9. झज्जर 34
10. जींद 90 11. कैथल 27
12. करनाल 64
13. कुरुक्षेत्र 7
14. मेवात 0
15. नारनौल 69
16. पलवल 34
17. पंचकूला 3
18. पानीपत 50
19. रेवाड़ी 85
20. रोहतक 0
21. सिरसा 11
22. सोनीपत 37

 

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