लेख

राजनीतिक उथल-पुथल के साथ बीता 2018

2018 with political upheaval

वर्ष 2018 कुछ खट्टी, कुछ मीठी और कुछ कड़वी यादों के साथ हम सभी को अलविदा कह रहा है और हम नए साल का स्वागत करने को तैयार हैं। 2018 में देश में बहुत कुछ घटित हुआ, राजनीतिक दृष्टि से यह साल बहुत महत्वपूर्ण रहा तो सालभर में कई बड़े हादसे भी हुए, घाटी में आतंकी और पत्थरबाज खूनी खेल खेलते रहे तो राज्यपाल शासन के दौर में आतंकियों के सफाये का व्यापक अभियान भी चलता रहा, खेल जगत में कुछ नई प्रतिभाएं उभरकर सामने आई तो कुछ बड़ी हस्तियां सदैव के लिए हमारा साथ छोड़ चिरनिद्रा में लीन हो गई। 2018 में अदालतों के कुछ बेहद महत्वपूर्ण फैसले सामने आए तो कुछ बड़ी शादियों ने सुर्खियां बटोरी। 2018 की विदाई बेला के इस विशेष अवसर पर वर्षभर की इन मिश्रित यादों को स्मरण करना, अच्छी यादों को सहेजना और सालभर की गलतियों को स्मरण कर उनसे सबक लेना बेहद जरूरी हो जाता है।

सर्वप्रथम बात करते हैं सालभर की राजनीतिक हलचल पर। सियासी घटनाओं और राजनीतिक उथल-पुथल के लिहाज से यह वर्ष बहुत अहम रहा और वर्ष के आखिरी महीने में लोकसभा चुनाव से पहले का सेमीफाइनल माने जाते रहे पांच राज्यों के चुनावी नतीजों के बाद यह साल अगले वर्ष की भूमिका तैयार कर गया। पूरे साल माना जाता रहा कि अब देश में किसी एक दल को बहुमत के दौर की शुरूआत हो गई है किन्तु साल के अंत में एकाएक जिस प्रकार राजनीतिक परिदृश्य बदला और कई छोटी पार्टियों ने अपनी प्रासंगिकता साबित की, उससे गठबंधन की राजनीति को नई दिशा मिली तथा इन घटनाक्रमों ने कमजोर पड़े विपक्ष में नई जान फूंकने का कार्य किया। पूरे साल में कुछ उपचुनावों के अलावा 9 राज्यों के विधानसभा चुनाव हुए और तेलंगाना को छोड़कर बाकी 8 राज्यों में सत्ता परिवर्तन हुआ।

साल की शुरूआत में ही गोरखपुर तथा फूलपुर सीटों पर हुए उपचुनाव में सपा, बसपा तथा कांग्रेस ने मिलकर भाजपा से ये सीटें झटक ली थी, जिसके बाद विपक्षी एकता की मुहिम ने ऐसा जोर पकड़ा कि भाजपा को सत्ता से दूर करने के लिए एक-दूसरे की धुर विरोधी पार्टियां भी साथ खड़ी नजर आने लगी किन्तु तमाम कोशिशों के बावजूद समूचा विपक्ष एकजुट नहीं हो पाया। उत्तर प्रदेश में भले ही सपा-बसपा की नजदीकियां बढ़ी किन्तु कांग्रेस से कुछ दल लगातार दूरी बनाए रहे लेकिन पांच विधानसभा चुनावों में से तीन प्रमुख राज्यों में जीत के बाद कांग्रेस को मजबूती मिली और साल बीतते-बीतते एनडीए में बिखराब के साथ विपक्ष की मजबूती के संकेत मिलने लगे। साल के शुरूआती महीनों में ही टीडीपी और रालोसपा एनडीए का साथ छोड़ गए, वहीं शिवसेना के भी एनडीए के साथ रिश्ते अच्छे नहीं रहे।

वर्षभर आम आदमी पार्टी कभी मुख्य सचिव के साथ मारपीट मामले को लेकर तो कभी अपने विधायकों पर अयोग्यता की तलवार लटके रहने जैसे विभिन्न विवादों में घिरी रही किन्तु अंतत: उसे अधिकांश मामलों से राहत मिली। भाजपा नेत्री सुषमा स्वराज, उमा भारती तथा एनसीपी सुप्रीमों शरद पवार जैसे कुछ दिग्गज नेताओं ने 2019 का लोकसभा चुनाव न लड़ने की घोषणा कर सियासी गर्मी पैदा कर दी। गणतंत्र दिवस समारोह में आसियान संगठन के सभी 10 देशों के राष्ट्राध्यक्षों की मुख्य अतिथि के रूप में मौजूदगी के बाद भारत-आसियान संबंधों का नया दौर शुरू हुआ। पूरा साल राफेल खरीद मामला केन्द्र सरकार के गले की हड्डी बना रहा किन्तु साल बीतते-बीतते सुप्रीम कोर्ट के फैसले से सरकार को बड़ी राहत मिली। नीरव मोदी बैंक घोटाला सामने आने के बाद एक-एक कर सामने आए अनेक बैंक घोटालों ने बैंकिंग तंत्र की नींव को हिला डाला। दशहरे के अवसर पर अमृतसर में भयावह रेल हादसा हुआ। सालभर ईवीएम, महंगाई, बेरोजगारी, एससी-एसटी एक्ट, राममंदिर, सीबीआई और आरबीआई विवाद, किसान आन्दोलन तथा महिलाओं के प्रति अपराधों जैसे मुद्दे छाये रहे। मी-टू अभियान की तो ऐसी आंधी चली विभिन्न क्षेत्रों के कई दिग्गजों को उड़ा ले गई और पूर्व वरिष्ठ पत्रकार तथा विदेश राज्यमंत्री एम. जे. अकबर जैसे दिग्गज को भी अपनी कुर्सी गंवानी पड़ी। चारा घोटाला में दोषी करार दिए जाने के बाद लालू यादव को जेल की हवा खानी पड़ी।

सुप्रीम कोर्ट के भी कई ऐसे महत्वपूर्ण फैसले आए, जो साल की प्रमुख सुर्खियां बने। साल की शुरूआत में सुप्रीम कोर्ट ने सिनेमाघरों में राष्ट्रगान गाए जाने की अनिवार्यता समाप्त कर इसे स्वैच्छिक बनाए जाने का अपना ही संशोधित आदेश सुनाया। 15 फरवरी को कावेरी जल विवाद मामले में अपने अहम फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि नदी के पानी पर किसी भी स्टेट का मालिकाना हक नहीं है। 20 मार्च को सुप्रीम कोर्ट ने एससी-एसटी एक्ट में बदलाव करते हुए फैसला सुनाया कि केवल शिकायत के आधार पर ही किसी की गिरफ्तारी नहीं होगी बल्कि साक्ष्यों के आधार पर ही होगी लेकिन सरकार द्वारा अदालत के फैसले को पलट दिया गया। बहुचर्चित निर्भया कांड पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट ने तीनों दोषियों की याचिका खारिज करते हुए उनकी फांसी की सजा को बरकरार रखा। 6 सितम्बर को समलैंगिकता पर अपने फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने धारा 377 को रद्द करते हुए कहा कि समलैंगिकता अपराध नहीं है। इसी प्रकार विवाह के बाद अवैध संबंधों पर सुनाए गए महत्वपूर्ण फैसले में एडल्ट्री संबंधी कानून की धारा 497 को खारिज करते हुए एडल्ट्री को अपराध मानने से इन्कार कर दिया गया। आधार कार्ड के उपयोग को लेकर मंडराते संशय के बादलों को दूर करते हुए अदालत की पांच सदस्यीय संविधान पीठ ने लंबी जद्दोजहद के बाद आधार की विस्तृत व्याख्या करते हुए अपने निर्णय में स्पष्ट किया कि आधार कहां इस्तेमाल किया जाना अनिवार्य होगा और कहां स्वैच्छिक।

वर्ष 2018 में मनोरंजन जगत से लेकर साहित्य जगत और राजनीति सहित विभिन्न क्षेत्रों की कई दिग्गज हस्तियां दुनिया को अलविदा कह गई। 11 फरवरी 2018 को 84 वर्ष की आयु में महिला फिल्म निर्माता प्रबाती घोष, 26 फरवरी 2018 को 54 साल की उम्र में प्रख्यात बॉलीवुड अभिनेत्री श्रीदेवी, 28 फरवरी 2018 को कांची कामकोटि पीठ के प्रमुख श्री श्री जयेंद्र सरस्वती शंकराचार्य, 19 मार्च 2018 को 83 साल की उम्र में साहित्य अकादमी पुरस्कार से सम्मानित केदारनाथ सिंह, 9 जुलाई को प्रसिद्ध टीवी धारावाहिक तारक मेहता में डॉ. हाथी का किरदार निभाने वाले कवि कुमार आजाज, 17 जुलाई को 62 वर्ष की आयु में अभिनेत्री रीता भादुड़ी, 19 जुलाई 2018 को कवि गोपाल दास नीरज, 1 अगस्त 2018 को 85 वर्ष की आयु में तमिलनाडु तथा असम के पूर्व राज्यपाल भीष्म नारायण सिंह, 6 अगस्त 2018 को 81 वर्ष की आयु में पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के सचिव रहे वरिष्ठ नेता आर के धवन, 7 अगस्त 2018 को 94 साल की उम्र में तमिलनाडु के पूर्व मुख्यमंत्री तथा डीएमके प्रमुख एम करूणानिधि, 10 अगस्त 2018 को 41 साल की आयु में बजाज इलैक्ट्रिकल्स लिमिटेड के निदेशक अंतत बजाज, 13 अगस्त 2018 को पूर्व लोकसभा अध्यक्ष सोमनाथ चटर्जी, 14 अगस्त 2018 को 91 वर्ष की उम्र में छत्तीसगढ़ के राज्यपाल बलरामजी दास टंडन, 15 अगस्त 2018 को 77 साल की आयु में क्रिकेटर अजीत वाडेकर, 16 अगस्त 2018 को 93 साल की आयु में पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी तथा 14 दिसम्बर को फिल्म निर्देशक तुलसी रामसे दुनिया को अलविदा कहते हुए अनंत यात्रा पर चले गए।

अब बात करते हैं खेलों की तो खेल जगत के लिए यह वर्ष कई मायनों में ऐतिहासिक रहा। अप्रैल माह में गोल्डकोस्ट में हुए 21वें राष्ट्रमंडल खेलों में भारत ने 26 स्वर्ण, 20 रजत और 20 कांस्य पदकों के साथ कुल 66 पदक जीतकर दुनिया में तीसरा स्थान हासिल किया, जो इन खेलों में इतिहास में भारत का तीसरा बेहतरीन प्रदर्शन रहा। 18 अगस्त से 2 सितम्बर तक जकार्ता में हुए एशियाई खेलों में ऐतिहासिक प्रदर्शन करते हुए भारत ने 15 स्वर्ण पदक सहित 69 मेडल जीतकर 67 वर्षों के एशियाई खेलों के इतिहास में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रदर्शन किया। हालांकि महिला क्रिकेट में मिताली राज को टीम से बाहर रखे जाने के चलते कुछ विवाद अवश्य उठे किन्तु नए कोच की नियुक्ति के साथ इस विवाद पर लगाम लगा दी गई। कई खिलाडिय़ों ने अपने स्वर्णिम प्रदर्शन से देश को गौरवान्वित किया। महेन्द्र सिंह धोनी ने 200 वनडे में कप्तानी करने वाले पहले भारतीय होने का कीर्तिमान बनाया तो मिताली राज ने कुछ रिकॉर्डों के मामले में विराट कोहली सहित कई दूसरे पुरूष खिलाडिय़ों को भी पीछे छोड़ दिया। विराट सबसे तेज गति से सबसे कम मैचों में सर्वाधिक शतक और सर्वाधिक रन बनाने का कीर्तिमान बनाने में सफल हुए तो हरमनप्रीत कौर टी-20 अंतर्राष्ट्रीय मैच में भारत की ओर से शतक जड़ने वाली पहली भारतीय महिला खिलाड़ी बनी।

2018 में कुछ ऐसी शादियां भी हुई, जिन्होंने खूब सुर्खियां बटोरी। 12 दिसम्बर को प्रख्यात व्यवसायी मुकेश अंबानी और नीता अंबानी की बेटी ईशा अंबानी की शादी मुंबई में स्थित एंटीलिया में पिरामल समूह के आनंद पिरामल के साथ हुई, जिसमें देश-विदेश से अनेक जानी-मानी हस्तियां सम्मिलित हुई। अम्बानी परिवार में हुई यह शादी साल की सबसे महंगी शादी रही। बॉलीवुड के क्यूट कपल के रूप में जाने जाते रहे दीपिका पादुकोण और रणवीर सिंह 14-15 नवम्बर को इटली में कोंकणी हिन्दू रीति-रिवाजों के साथ शादी के बंधन में बंध गए। प्रियंका चोपड़ा और निक जोंस ने 1-2 दिसंबर को ईसाई और हिन्दू रीति रिवाज से शादी की। सोनम कपूर और आनंद अहुजा इसी साल 8 मई को शादी के पवित्र बंधन में बंध गए।

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