विकास पर खर्च हुए 2.60 करोड़, अब भी खल रही बुनियादी सुविधाओं की कमी

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Village-Nayawala
प्रदेश में होने वाले पंचायती राज संस्थाओं के चुनावों को लेकर आजकल ग्रामीण सत्ता की राजनीति गरमाने लगी है। वर्तमान ग्राम पंचायतों ने अपने कार्यकाल में गांवों में क्या-क्या विकास करवाया, इस पर सच-कहूँ अपने पाठकों को हर रोज एक गांव के विकास की ग्राउंड रिपोर्ट से अवगत करवा रहा है। इसी के अंतर्गत आज आपको रानियां खंड के छोटे से गाँव नाईवाला की मौजूदा ग्राम पंचायत के कार्यकाल मेंं हुए विकास कार्यांे से रू-ब-रू करवा रहे हंै। नाईवाला में अब तक चुने गए सबसे युवा व शिक्षित सरपंच महेश कुमार सेतिया के नेतृत्व में गाँव के विकास पर करीब 2.60 करोड़ रूपयों की ग्रांट खर्च करने का दावा किया जा रहा है। इन दावों में क्या है सच्चाई पढ़िये खारियां संवाददाता सुनील कुमार की खास रिपोर्ट:
सच कहूँ/सुनील कुमार  खारियां। खंड रानियां से 10 किमी व जिला मुख्यालय से करीब 30 कि.मी. दूर 1857 की क्रांति से पूर्व विराने में बसे गांव नाईवाला को काला पानी के नाम से पहचाना जाता था। विकास कार्यों में वर्षों से पिछड़े इस गांव में वर्तमान ग्राम पंचायत द्वारा करीब विकास कार्यों पर 2.60 करोड़ रूपए खर्च करने का दावा किया जा रहा है। लेकिन फिर भी अभी तक ग्रामीणों को बुनियादी सुविधाओं की कमी खल रही है। पिछले पांच वर्षों में प्रशासन, पंचायत व ग्रामिणों के सहयोग से लिंगानुपात व शिक्षा के स्तर में काफी सुधार देखने को मिला है। जिसके चलते गांव का वर्तमान लिंगानुपात 1000 लड़कों के पीछे 1005 लड़कियां है। पंचायत के इन्हीं प्रयासों के लिए नाईवाला को वर्ष 2018-19 में शन्ति व सद्भावना तथा वर्ष 2019-20 में गांव के शिक्षा स्तर में हुए सुधार के लिए प्रशासन ने ग्राम पंचायत को एक-एक स्टार पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

विकास कार्यों से बदला गांव का रूख

गांव में युवाओं को खेलोें में आगे बढ़ाने के लिए 60 लाख से क्रिकेट स्टेडियम, वॉलीबाल, जीम हाल, फुटपाथ व चार दिवारी का निर्माण किया गया है। 25 लाख से पाँच आईबीपी गलियां, 15 लाख की लागत से शमशान घाट का मुख्य द्वार, बरामदा, पार्क, शैड, पानी का टैंक तथा चारदिवारी बनाई गई है। इसके अलावा पेयजल समस्या को देखते हुए 90 लाख से जलघर में भूमिगत पानी का टैंक, 30 लाख से राजकीय स्कूल का मुख्य प्रवेश द्वार, पार्क, चार कमरे, आईबीपी रास्ते व रंगाई का कार्य पूर्ण किया गया है। 6 लाख से एससी चौपाल का निर्माण, गांव के गंदे पानी के फील्टर के लिए 30 लाख की ग्रांट से फाइव पॉड जोहड़, विभिन जगहों पर 6 स्ट्रीट लाईटें, बिजली आपूर्ति के लिए सौलर सिस्टम व सभी सार्वजनिक संस्थाओं का सौंदर्यकरण किया गया।

वॉल पेंटिंग व पोल पेंटिंग दे रही जागरुकता का संदेश

पर्यावरण संरक्षण, बेटी बचाओ बेटी पढाओ, स्वच्छता, शिक्षा, जल संरक्षण, नशा मुक्ति व योगा के लिए गाँव में वॉल पेंटिंग व पॉल पेंटिंग के माध्यम से जागरुकता फैलाई जा रही है। वहीं जागरुकता कार्यक्रमों में अग्रणी भूमिका निभाने वाले युवाओं को प्रोत्साहित करने के लिए समय-समय पर उन्हें सम्मानित भी किया गया है। इसके अलावा गाँव की हरियाली को चार-चांद लगाने के लिए गांव के चारों ओर हजारों की संख्या में पौधा रोपण भी किया गया है।

गांव में शान्ति सदभावना, शिक्षा स्तर व लिंगानुपात रहा सराहनीय

वर्तमान सरकार व प्रशासन के सहयोग से गांव के युवा व शिक्षित सरपंच ने समस्त पंचायत व युवाओं को साथ लेकर ग्रामिणों में समय समय पर जागरूकता अभियानों के माध्यम से गांव का लिंगानुपात में काफी बड़ा सुधार किया जो वर्तमान में 1000/1005 लड़कियां है तो वहीं वर्ष 2018-19 में शन्ति व सद्भावना तथा वर्ष 2019:20 में गांव के शिक्षा सतर में हुए सुधार के लिए प्रशासन ने ग्राम पंचायत को एक-एक स्टार पुरस्कार से सम्मानित किया गया।

इन बुनियादी सुविधाओं के लिए जूझ रहे ग्रामीण

ग्रामीणों के समक्ष सबसे बड़ी समस्या गाँव में ग्राम सचिवालय का न होना है, जिस कारण ग्रामीणों को अनेक परेशानियों का सामना करना पड़ता है। इसके अलावा नाईवाला गांव के करीब 150 परिवार ढाणियों में निवास करते हैं। जिनके पास अभी तक ना तो 24 घंटे बिजली, ना जलघर से स्वच्छ पानी की आपूर्ति व सीएम की घोषणाआें के बाद भी आईबीपी रास्तों जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं है। गाँव पूर्णतय कृषि पर निर्भर है। लेकिन किसानों को खेती के लिए फल्डी चैनल की खुदाई तो हो गई लेकिन ना तो अभी तक बरसाती पानी की शुरूआत हुई और ना ही भाखड़ा के पानी के लिए पक्के खाल का नव निर्माण हुआ।
इसके अलावा बड़ी समस्याओं में स्कूल के मिडल स्कूल का अपग्रेड न होना भी है और शहर के लिए स्थाई यातायात सुविधा नहीं है। ग्रामीण खेती के साथ साथ पुशपालन का कार्य भी करते हैं जिनके पास न तो गांव में पशु अस्पताल बना है और ना ही खुद के स्वास्थ्य के लिए स्वस्थ्य केन्द्र। गांव में लगी बिजली की तारों की हालात खस्ता है वहीं गांव में स्वच्छ पानी की आपूर्ति के लिए पाईप लाईनों के बदलाव की बहुत जरूरत है।
भाजपा सरकार द्वारा प्रदेश में शिक्षित पंचायत का लिया गया निर्णय बहुत ही उचित था। जिसके परिणाम स्वरूप गांव का मौजूदा सरपंच अब तक नाईवाला का सबसे कम आयु व उच्चतर शिक्षा प्राप्त है। जिसने समस्त पंचायत सदस्यों व प्रशासन के सहयोग से ग्रामिणों को करोड़ों की लागत से बहुत सारी बुनियादी सुविधाएं मुहैया करवाने का कार्य किया है। जो सराहना के काबिल है। इससे पहले मैंने अपने 6 वर्ष के कार्यकाल में सरकार व प्रशासन के सहयोग से केवल 70 लाख की ग्रांट प्राप्त कर पाया जिसमें गांव में एक जलघर, खेतों के कुछ खाल व कई आईबीपी गलियों का निर्माण ही करवा सका।
– सदासुख, पूर्व सरपंच, नाईवाला।
देखिए मैं ग्रामिणों का बहुत आभारी हूँ जिन्होंने मुझे इस आयु में गांव के इतने बड़े पद के काबिल समझा। मेरे पास सरपंच पद का कोई अनुभव नहीं था फिर भी जितना हो सका मैने ग्रामिणों की हर मुख्य समस्या का समाधान करने की कोशिश की। इसके बावजुद गांव में स्कूल अपग्रेड, ढाणियों में बिजली, पानी व पक्के रास्ते, खेतों के पक्के खाल, गलियां के पुर्न निर्माण, किसानों को फल्डी का पानी, ग्राम सचिवालय, यातायात सुविधांओं, पशु अस्पताल व स्वस्थ्य केन्द्र तथा स्वच्छ जल आपूर्ति के लिए नई पाईप लाईनों जैसी समस्यों को पंचायत के रेजुलेशन द्वारा कई बार अवगत करवा चुका हूँ, लेकिन अभी तक कोई समाधान नहीं हुआ।
– महेश कुमार सेतिया, सरपंच नाईवाला।

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