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देश में मोदी यूपी में योगी, नारा कबूल

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Uttar Pardesh: मोदी मैजिक के सहारे यूपी में प्रचंड बहुमत से जीतकर सत्ता में आई बीजेपी ने सीएम के नाम पर फैसला करने में एक हफ्ता लगाया। लखनऊ से लेकर दिल्ली तक खूब मंथन हुआ। तमाम दावेदारों के नामों पर चर्चा हुई और अब Yogi Adityanath के नाम पर मुहर लग गई है।आखिर कौन सी ऐसी वजहें रहीं जिससे Yogi Adityanath यूपी की कुर्सी की रेस में सबसे आगे हो गए।

अन्य दावेदारों का कोई जमीनी आधार नहीं

यूपी सीएम की रेस में शामिल अन्य दावेदारों का कोई जमीनी आधार नहीं होना भी Yogi Adityanath के पक्ष में गया। योगी आदित्यनाथ पूर्वांचल की 60 से अधिक विधानसभा सीटों और कई लोकसभा क्षेत्रों में असर रखते हैं। जबकि केशव प्रसाद मौर्य के खिलाफ आरोपों और मनोज सिन्हा की क्षेत्र में जमीनी पकड़ नहीं होना उनके खिलाफ गया। योगी आदित्यनाथ पांच बार के सांसद हैं। गोरखपुर की लोकसभा सीट से उनके इस्तीफे के बाद भी बीजेपी के उम्मीदवार की जीत लगभग पक्की है।

प्रचंड बहुमत से BJP की हिचकिचाहट खत्म

403 में 325 सीटों पर जीतकर प्रचंड बहुमत के साथ यूपी की सत्ता में आई बीजेपी के सामने सीएम के नाम को लेकर कोई दुविधा नहीं दिखी।कारण है बहुमत इतना बड़ा मिला कि मोदी और अमित शाह के सामने किसी के पक्ष में भी फैसले लेने की आजादी थी। सबसे बड़े दावेदार राजनाथ सिंह ने अपना नाम वापस ले लिया और इसके बाद योगी आदित्यनाथ केशव मौर्य और मनोज सिन्हा जैसे दावेदारों के पीछे छोड़ते हुए सीएम की रेस में सबसे आगे हो गए।

Yogi Adityanath : कट्टर हिंदुत्ववादी की छवि

Yogi Adityanath संघ के भी करीबी माने जाते हैं। गोरखपुर से सांसद योगी आदित्यनाथ गोरखनाथ मंदिर के महंत हैं और हिंदू युवा वाहिनी के संस्थापक भी हैं। लव जेहाद और राम मंदिर जैसे मुद्दों को लेकर वे अपना कट्टर रुख अक्सर दिखाते रहे हैं। हिंदू वाहिनी के जरिए आदित्यनाथ हिन्दू युवाओं को एकजुट कर सामाजिक, सांस्कृतिक और राष्ट्रवादी मुद्दों पर पूर्वांचल में माहौल अपने पक्ष में रखने में कामयाब रहे हैं। राम मंदिर निर्माण के वादे के साथ यूपी की सत्ता में आई बीजेपी के लिए योगी आदित्यनाथ की ये छवि काफी काम आ सकती है।

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