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योग के ‘इलम’ ने दिलाई अंतरराष्ट्रीय पहचान

साक्षात्कार जवान रहना है तो कीजिए नियमित योगाभ्यास, बीमारियां नहीं फटकेंगी पास
– अब तक राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय स्तर पर झटक चुके 234 मेडल
– पूज्य गुरु जी को दिया उपलब्धियों का श्रेय

Sirsa, Sachkahoon News: कुछ करने की जिद हो, उमंग हो तो उस काम को करने में उम्र कभी आड़े नहीं आती। यह साबित कर दिखाया है 82 वर्षीय वयोवृद्ध योगा कोच व अंतरराष्ट्रीय योग खिलाड़ी इलम चंद इन्सां ने। नेशनल व इंटरनेशनल स्तर पर गोल्ड, सिल्वर व कांस्य के दर्जनों मेडल झटक कर उन्होंने यह साबित कर दिखाया है कि आज भी उनका जोश युवाओं से कम नहीं है।
मूल रूप से उत्तर प्रदेश के जिला बागपत के बड़ौत अंतर्गत गांव रंछाड़ में हरदेव सिंह के घर जन्मे इलम चंद इन्सां वर्तमान में सरसा स्थित शाह सतनाम जी पुरा गांव में रह रहे हैं। वे अब अब तक योग व एथलेटिक्स की स्टेट, राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय प्रतियोगिताओं में 234 मेडल हासिल कर देश व हरियाणा का नाम रोशन कर चुके हैं। सच कहूँ प्रतिनिधि हितेन्द्र इन्सां ने उनसे बातचीत की। प्रस्तुत हैं बातचीत के कुछ अंश :-
प्रश्न:- आपने खेलकूद शुरु कब किए व क्यों?
उत्तर:- वर्ष 1996 में जब शाह सतनाम जी बॉयज स्कूल, सरसा की शुरुआत में प्रिंसीपल के रूप में चयनित हुआ तो उस वक्त मैं मधुमेह, अनिद्रा, कमजोरी, चिंता और टीबी जैसी बीमारियों से पीड़ित था। वर्ष 2001 में गुरु जी हॉस्टल में आए और बच्चों को योग कराने के वचन किए। मैंने योग के साथ-साथ दौड़ना-कूदना शुरु किया। मैंने अनुभव किया कि मेरा स्वास्थ्य लगातार सुधर रहा था। मैंने प्रतियोगिताओं में हिस्सा लेना शुरु किया और जवानों के साथ खेलकर भी मैं जीत हासिल करने लगा। पहले साल में ही जिला स्तर से लेकर अंतराष्टÑीय स्तर तक पदक जीते और अब तक लगातार जीतता आ रहा हूँ।
प्रश्न:- खेलकूद से पहले आप क्या करते थे?
उत्तर: खेलकूद से पहले मैं तीन इन्टर कॉलेजों में प्रधानाध्यापक रहा हूँ जिसमें दो कॉलेज मेरे अपने थे और एक कॉलेज में 1960 एलटी की परीक्षा पास कर अध्यापक व बाद में उत्तर प्रदेश माध्यमिक सेवा आयोग, इलहाबाद द्वारा प्रधानाध्यापक के रूप में चयनित किया गया।
प्रश्न:- खेलकूद में आपक ी क्या उपलब्धियाँ हैं?
उत्तर:- मैं योग और ऐथ्लेटिक्स का खिलाड़ी हूँ, दोनों खेलों में वर्ष 2001 से अब तक अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर कुल 45 पदक सहित कुल 234 पदक प्राप्त कर चुका हूँ।
प्रश्न:- आपको किन-किन अवार्डस से सम्मनित किया जा चुका है?
उत्तर:- 15 अगस्त 2016 को शहीद भगत सिंह खेल परिसर में हरियाणा के मुख्यमंत्री मनोहर लाल ने योग क्षेत्र में उत्कृष्ट योगदान पर सम्मानित किया। इससे पहले 3 दिसंबर 2015 को अंतर्राष्टÑीय वृÞद्धजन दिवस पर द्वितीय वर्ग में आजीवन उपलब्धि का सम्मन मिला तो 23 जनवरी 2015 को मुझे जिन्दगी का सबसे बड़ा अवार्ड पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां द्वारा ड़ायमंड मैडल प्राप्त हुआ। इसके अलावा 15वीं अंतर्राष्टÑीय प्रतियोगिता में थ्यारी, वाइवा और आसन प्रतियोगिता में प्रथम आने पर पॉड़िचेरी सरकार के जनरल सेक्रेटरी द्वारा अवार्ड आॅफ आॅनर से सम्मानित किया जा चुका है।
प्रश्न:- आप खेलकूद के अलावा और क्या करते हैं?
उत्तर:- फिलहाल एक खिलाड़ी हूँ, इसके अलावा मैं एक विद्यार्थी भी हूँ। शाह सतनाम जी मल्टीस्पेस्लिटी हॉस्पिटल में डॉ. और शाह सतनाम जी शिक्षण संस्थान में कोच हूँ। मेरे द्वारा प्रशिक्षित शाह सतनाम जी बॉयज स्कूल व कॉलेज के खिलाड़ी रामदास, उमाशंकर, हितेन्द्र और अजय अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर अपना दम दिखा चुके हैं।
प्रश्न:- “सच कहूँ” के पाठकों को क्या संदेश देना चाहते हैं?
उत्तर:- “सच कहूँ” समाचार पत्र एक ऐसा समाचार पत्र है जो समाज में गन्दे और घटिया समाचारों की बजाय स्वच्छ और आध्यात्मिक खबरों के साथ जीवन जीने की उत्कृष्ट राह दिखाता है। मैं समाचार पत्र का आभार व्यक्त करता हूँ। मैं यही कहना चाहता हूँ, यदि आप मेरी तरह स्वस्थ और जवान रहना चाहते हैं तो योगाभ्यास को अपनी दिनचर्या का हिस्सा बना लीजिए। योग करने से अनेकों बीमारियों से बचा जा सकता है।

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