सम्पादकीय

शराबबंदी की लहर

alcoholism

alcoholism शराब के खिलाफ पूरे देश में लहर दौड़ पड़ी है। सन् 2015 में बिहार से चली इस लहर से कई सामाजिक व आर्थिक परिवर्तन देखने को मिले हैं, जिसका परिणाम यह है कि मध्य प्रदेश व छत्तीसगढ़ की सरकारों ने भी शराब को बंद करने के लिए कमर कस ली है। बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार तो पूरे देश में शराबबंदी की वकालत कर रहे हैं।

alcoholism होना भी यही चाहिए। यह हकीकत है कि धर्म महाविज्ञान है। धार्मिक महापुरूषों ने हजारों साल पहले कह दिया था कि शराब मनुष्य का नहीं बल्कि राक्षसों का खानपान है। शराब मानव की आध्यात्मिक सफलता में बाधा तो बनती ही है, साथ ही मानवीय स्वास्थ्य, आर्थिकता व मानसिकता के लिए भी घातक है।

आज वैज्ञानिक भी शराब को स्वास्थ्य के लिए खतरा मान रहे हैं लेकिन तथाकथित आधुनिकता के प्रचारकों ने धर्म की शिक्षा को बीते जमाने की बातें करार देकर शराब के सेवन को आधुनिकता व नई सभ्यता के प्रतीक के तौर पर पेश किया। परिणाम के तौर पर शराब भारतीय समाज की तबाही का कारण बनी। हर साल लाखों मौतों का कारण शराब बन रही है। बीमारियों के अलावा  शराब के कारण लड़ाई-झगड़े व सड़क हादसे बढ़ रहे हैं।

alcoholism आखिर सुप्रीम कोर्ट को राष्ट्रीय व राजमार्गों से शराब के ठेके हटाने के आदेश देने पड़े लेकिन सरकारों ने शराब से प्राप्त राजस्व के लोभ में देश की संस्कृति, लोगों के स्वास्थ्य पर आर्थिकता को दांव पर लगा दिया। सरकार ने शराब से बर्बादी को केवल बोतलों पर ‘शराब सेहत के लिए हानिकारक है’ लिखकर स्वीकार तो कर लिया लेकिन शराब की बिक्री को बढ़ाने में कोई कसर नहीं छोड़ी।

आखिर जनता ही शराब के खिलाफ खड़ी हुई तो कुछ राजनेताओं ने भी पहल की। बिहार जैसा राज्य जो बुरी तरह पिछड़ा हुआ था, शराबबंदी के लिए मिसाल बन गया, जहां शराब बंद होने से सरकार की आमदन बढ़ी है और अपराध दर में गिरावट आई है। महिलाएं शराब के खिलाफ आगे आ रही हैं। पंजाब में सैंकड़ों पंचायतों ने गांवों से ठेके हटाने के लिए प्रस्ताव पास किए हैं। पंजाब, हरियाणा, राजस्थान, उत्तरप्रदेश शराब की ज्यादा बिक्री वाले राज्यों में शामिल हैं।

alcoholism चिंताजनक पहलू तो यह है कि सरकारें शराब के ठेकोें को बचाने के लिए राजमार्गों के दर्जे वापस लेकर अपनी लोक विरोधी सोच का परिचय दे रही हैं। इन राज्यों की सरकारों को चाहिए कि शराबबंदी के माहौल का लाभ उठाकर जनता की बेहतरी के कदम उठाएं।

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