सम्पादकीय

ट्रम्प का कड़ा निर्णय

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Donald Trump अमेरिका के गर्म मिजाज राष्ट्रपति ने अफगानिस्तान में आईएस खिलाफ सबसे बड़े बम का प्रयोग कर आतंकवाद को कड़ा संदेश दिया है। दरअसल राष्ट्रपति चुनावों के दौरान ट्रम्प को इस बात का एहसास हो गया था कि आतंकवाद चरम पर पहुंच चुका है जिसके खात्मे के लिए किसी बड़ी कार्रवाई की जरूरत है। अंतरराष्ट्रीय मामलों के विशेषज्ञ भी इस बात को स्वीकार कर रहे थे कि ट्रम्प के राष्ट्रपति बनने के बाद कड़े फैसले आ सकते हैं।

रूस की रुकावटों के बावजूद अमेरिका ने सीरिया में रसायनिक हमलों के खिलाफ बड़ी कार्रवाई की। हालांकि एक बार ऐसा भी प्रतीत हो रहा था कि ट्रम्प विश्व के अन्य देशों में अमेरिकी सेना को झोंकने की बजाय सबसे अधिक जोर अमेरिकी आर्थिकता को देंगे लेकिन पिछले महीनों में आईएस की गतिविधियों ने अमेरिकी नीतियों को अचानक नया मोड़ दे दिया है। सीरिया के बाद अमेरिका ने एबटाबाद की कार्रवाई की तरह धड़ल्ले से अफगानिस्तान में आईएस को हाथ दिखा दिए।

Donald Trump इस हमले में 36 आतंकवादी मारे जाने की खबर है और बगदादी को भी खत्म करने के लिए पूरी ताकत झोंकी जा रही है। नि:संदेह आईएस सहित अन्य आतंकवादी संगठन पूरी मानवता के लिए कहर बने हुए हैं। रोजाना लाखों लोग आतंकवाद के सताए रिफ्यूजी कैंपों में रहने व अन्य देशों में शरण लेने के लिए कंटीली तारों में लग लगकर जख़्मी हो रहे हैं।

बच्चों की शिक्षा बुरी तरह प्रभावित हो रही है और स्वास्थ्य सेवाएं की भारी कमी है। खुशहाल घरों में सन्नाटा पसरा हुआ है। ऐसे हालत में अमेरिकी कार्रवाई मजबूरी व जरूरी है। आतंकवाद खिलाफ सख्त कार्रवाई समय की जरूरत है। यह आतंकवाद के खिलाफ सख्त कार्रवाई न होने का परिणाम है कि पाकिस्तान जैसे देश आतंकवाद पर दोहरी नीति अपना रहे हैं। एक तरफ जम्मू कश्मीर में जारी हिंसा का समर्थन किया जा रहा है।

Donald Trump आतंकवाद का सीधा समर्थन कर रहा हाफिज मौहम्मद सईद सरेआम भारत के खिलाफ जहर उगल रहा है। पाकिस्तान पर भी शिकंजा कसने की जरूरत है। रूस व चीन जैसे देशों को आतंकवाद के मामले में स्पष्ट दृष्टिकोण अपनाने व स्वार्थी नीतियों से ऊपर उठने की जरूरत है। सीरिया में रूस व पाकिस्तान में चीन की नीतियां आतंकवाद के खिलाफ कार्रवाई में बाधा बन रही हैं। पूरी दुनिया आतंकवाद का भयानक चेहरा देख चुकी है।

निर्दोषों के खिलाफ हिंसा निंदनीय है। दुनिया के मजबूत देश आतंकवाद पर स्वार्थों की पूर्ति करने की बजाय अपनी ताकत मानवता को बचाने में लगाएं।

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