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सुमिरन करके दिमाग का 100 प्रसेंट इस्तेमाल करो

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Saint Dr. MSG | Ruhani Satsang | Anmol Vachan

रूहानी सत्संग। इन्सान को शैतान बना देते हैं नेगिटिव काम, पॉजिटिव काम बनाते हैं इन्सान को
इन्सान से महान, मिलाते हैं भगवान: पूज्य गुरु जी

सरसा। गत रविवार को पूज्य गुरु संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां ने शाह सतनाम जी धाम में रुहानी सत्संग फरमाया। रूहानी सत्संग में हरियाणा, पंजाब, यूपी, दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड सहित देश के विभिन्न राज्यों से साध-संगत ने शिरकत की व पूज्य गुरु जी से पावन आशीर्वाद प्राप्त किया। इस अवसर पर पूज्य गुरु जी ने 2275 नए लोगों को गुरुमंत्र की अनमोल दात प्रदान कर मोक्षमुक्ति का अधिकारी बनया।

रूहानी सत्संग के दौरान हजारों श्रद्धालुओं ने रूहानी जाम ‘जाम-ए-इन्सां’ ग्रहण कर इन्सानियत के रास्ते पर चलने का संकल्प लिया। सत्संग की समाप्ति पर डेरा सच्चा सौदा की मर्यादा के अनुसार एक युगल दिलजोड़ माला पहनाकर परिणसूत्र में बंधा व साध-संगत ने श्रद्धापूर्वक लंगर-भोजन ग्रहण किया।

रूहानी सत्संग में साध-संगत को अपने अमृतमयी वचनों से निहाल करते हुए पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इस कलियुग के समय में मन-इंद्रियां बड़े फैलाव में हैं। इन्सान सोचता कुछ और है, हो जाता कुछ और है। कई बार इन्सान के अंदर कुछ और होता है, बाहर कुछ और। यह दोगलापन कलियुग की नीति है और सब लोग इसी को फॉलो किए जा रहे हैं। मन का सब्जबाग दिखाना, इन्सान को मालिक से दूर ले जाना, भटकाना है।

मन क्या है? आदमी के दिमाग को जो नेगेटिव, गलत विचार देता है, उसे ही मन की सोच कहा जाता है। और इन्सान के अंदर जो पॉजिटिव विचार आते हैं, उसे आत्मा की सोच कहा जाता है। इस कलियुग में नेगिटिविटी चारों तरफ फैली हुई है। आप कोई भी छोटे से छोटा काम करने जाते हो, तो मन में यह भय पहले आ जाता है कि मैं ये करूंगा, कहीं फेल न हो जाऊं! कोई नुक्सान न हो जाए! कहीं गलती न हो जाए! ऐसा हो जाएगा! ये हो जाएगा! वो हो जाएगा! यानि नेगिटिव थोट (गलत विचार) पहले आते हैं और पॉजिटिव विचार आने का नाम ही नहीं लेते जल्दी से। इसका कारण यह है कि यह कलियुग का समय है और यहां मन का बोलबाला है। हर समय बुरी सोच इन्सान के अंदर चलती रहती है और इसी वजह से इन्सान परेशान, दु:खी रहता है।

सेवा, सुमिरन से खत्म होंगे बुरे विचार

सुखी रहने व बुरे विचारों को दूर करने का टॉनिक बताते हुए पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि इन्सान सुखी रह सकता है! इन्सान नेगिटिव थोट्स को खत्म कर सकता है अगर इन्सान सेवा और सुमिरन करे। कितने भी बुरे विचार आपके अंदर आ गए, अगर आपने पांच मिनट भी सुमिरन कर लिया, तो आए हुए बुरे विचारों का फल आपको नहीं मिलेगा और आपकी जिंदगी पर भी उन बुरे विचारों का असर नहीं होगा। लेकिन ध्यान रखना चाहिए कि अगर नेगिटिव विचारों को आप फॉलो करने लग गए, तो उसका असर जिंदगी पर लाजमी होता है।

मन का काम होता है छोटी-छोटी बातों पर भी बुरे विचार देना

आप जी ने फरमाया कि मन का काम होता है छोटी-छोटी बातों पर भी बुरे विचार देना। अब जैसे सत्संग में किसी को छींक आ गई, तो कहता है कि मैं तो भक्ति में आया था, छींक कैसे आ गई! मुझे जुकाम क्यों हो गया! मेरा सिरदर्द क्यों हुआ! …तो क्या ये गारंटी होती है कि आप राम-नाम में आओगे, तो ये नहीं होगा। दुनिया में रहते हुए तो आप उल्हाना नहीं देते! इसलिए यह सब आपकी वजह से भी तो हो सकता है! आपने खान-पान में ऐसा कुछ ले लिया हो, शरीर को इस तरह का बना रखा हो कि गर्मी-सर्दी जैसे चेंज होता है, तो नेच्युरैली वैसा हो जाता है।

हां, यह जरूर है कि राम-नाम के निरंतर जाप से ये गारंटिड है कि आने वाले पहाड़ जैसे कर्म, बीमारियां कंकर में बदल जाया करती हैं। हमने 6 करोड़ लोगों को गुरुमंत्र बताया और करोड़ों लोग उनमें से बताते हैं कि उनके साथ ऐसा अनुभव होता है। बहुत लोग तो अपने प्रमाण-पत्र साथ लेकर आए कि चौथे स्टेज का कैंसर था। राम-नाम से जुड़ गए। दिन-रात राम का नाम जपा और दोबारा जाकर चैकअप करवाया तो वो कैंसर नाम की कोई चीज ही नहीं थी।

डॉक्टर हैरान रह गए। सार्इंस के लिए ये पॉसिबल नहीं, लेकिन राम के लिए ये सब पॉसिबल है। अगर वो दो बूंद से इन्सान बना सकता है, तो उसी के शरीर में से किसी रोग को लगाना, हटाना राम के लिए तो ऐसे है, जैसे मक्खन से बाल निकालना। ऐसा कोई बाईचांस नहीं होता।

यह कोई भुलेखा नहीं होता। किसी की जिंदगी बच जाए, यह भुलेखा कैसे हो सकता है? यहां ऐसे-ऐसे डॉक्टर साहिबान आते हैं, जिनके खुद के साथ ऐसा अनुभव हुआ है। वो सार्इंस को मानने वाले, पढ़े-लिखे डॉक्टर हैं, उनके साथ ऐसा हुआ है। वो क्यों झूठ बोलेंगे? यहां हम अपनी बड़ाई नहीं कर रहे, ये सारी बड़ाई उस ओंकार, ओम, हरि, अल्लाह, वाहेगुरु, राम की है, जिसका नाम आप लोग जपते हैं और हाथों-हाथ रिजल्ट आता चला जाता है।

टीचर की तरह होते हैं संत, पीर, फकीर

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि फकीर, संत एक टीचर, मास्टर की तरह होता है। टीचर खड़ा होकर इसलिए पढ़ाता है, क्योंकि अगर वो खड़ा नहीं होगा, तो पीछे बैठे बच्चों को वो दिखेगा नहीं और जब तक वक्ता दिखाई नहीं देता, सुनने वाले को अच्छा सा नहीं लगता। इसीलिए हमको ऊंची जगह पर बैठना पड़ता है।

वरना हममें ऐसा कुछ नहीं कि हम आपसे ऊंचा बैठें। दूसरा कारण यह भी है, पवित्र रामायण में एक जगह लिखा है कि कलियुग में कोई राम-नाम में आकर बैठेंगे, उस समय भगवान जी वहां हर किसी को कृपा-दृष्टि से नवाज रहे होंगे। …तो हम ऊंचे इसलिए भी बैठते हैं कि भगवान जी भी दिखें और आप लोग, जो इस कलियुग में राम-नाम में बैठे हैं, आप भी हमें दिखें।

प्रभु के नाम से बढ़ता है आत्मबल

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि जब आप सत्संग में चलकर आते हो, तो ध्यान से जरूर सुना करो। आदमी की दिमाग की शक्ति बड़ी जबरदस्त है। हम मानकर चलते हैं कि लोगों ने 5-10 प्रसेंट अपने दिमाग का इस्तेमाल किया और सुपर कम्प्यूटर तक बन गए, मिसाइलें बन गई, खात्में का सामान बन गया।

कहीं 50 प्रसेंट दिमाग का इस्तेमाल होने लग जाए, तो जिंदगी जीने का आसान और बहुत ही आरामदायक पहलू सामने आ जाए और हर कोई आराम से खुशी-खुशी जिंदगी व्यतीत कर सके, बेगम हो जाए। यह संभव तभी है, जब ग्राफ 50 प्रसेंट तक जाए और जाए भी पॉजिटिव तरीके से। यानि अच्छाई की तरफ सोचे और यह तभी संभव है, जब आत्मबल बढ़ेगा और आत्मबल बढ़ता है प्रभु का नाम लेने से।

आप जी ने फरमाया कि आत्मबल इन्सान के अंदर होता है, यह कहीं बाहर से खरीदा नहीं जाता। आप सबके अंदर आत्मबल और दिमाग की 100 प्रसेंट शक्ति है। अब कौन, कितनी इस्तेमाल करता है, यह अलग बात है।

एक सज्जन था और उससे पूछा गया कि अगर दिमाग की कीमत चुकानी हो, तो कैसे चुकाएगा? जैसे कोई बहुत बड़ा आॅफिसर है, उसके नीचे बहुत लोग काम करते हैं, सारी कंपनी की जिम्मेदारी उस पर है, अगर मानें तो 100 रुपए में से उसे कितने रुपए देगा? वो कहता कि मैं 50 रुपए उसको दे दूंगा। फिर उसने पूछा कि अगर कोई वक्ता है, वकील है, सारा दिन बोलने वाला है, उसे कितने देगा?

वो कहता कि उसे मैं 25 रुपए दे दूंगा। दूसरा कहने लगा कि एक इन्सान ऐसा है जो काम तो करता है, लेकिन बोलता कम है, ज्यादा काम नहीं करता? वो कहने लगा कि उसको मैं 75 रुपए दे दूंगा। फिर उसने पूछा कि जो काम करता ही नहीं, मजे से सोता है, खाता-पीता है? वो कहता कि उसे 100 रुपए दे दूंगा।

दूसरा हैरान हो गया। उसने कहा कि मैंने तुझे कहा था कि दिमाग का मूल्य लगाना! ये तुने कैसे जवाब दिए? वो कहने लगा कि जो सारा दिन बोलता है, काम करता है, उन्होंने तो अपना दिमाग खर्च कर लिया। मैं खरीदूंगा, तो उनमें बचा क्या है! और जो सारा दिन सोता है, खाता-पीता है, करता कुछ नहीं, उसका दिमाग तो नए का नया पड़ा। इसलिए मैं उसका 100 रुपए मूल्य लगाता हूं।

… तो हम कहते हैं कि हम नहीं चाहते कि आपका दिमाग 100 रुपए मूल्य लगाने के काबिल रह जाए! जैसे लाए हो, वैसा ही वापिस मत ले जाना! दुनिया में आए हो, इससे काम लो, बहुत ताकत है इस मार्इंड में। इससे अच्छे, भले विचार लो और काम करो। नेगिटिव काम इन्सान को शैतान बन देते हैं और पॉजिटिव इन्सान को इन्सान से महान् बना देता है, यहां तक कि भगवान से मिला देता है। इसलिए अपने दिमाग से अच्छे काम लिया करो।

भक्ति-इबादत से बढ़ती है सोचने की शक्ति

आप जी ने फरमाया कि आप अपने दिमाग को जितना इस्तेमाल में लाओगे, जितना इससे काम लोगे, उतना ही ये आपके लिए बढ़ता जाएगा, आपके और ज्यादा काम आता रहेगा। कोई भी पहेली आप बूझो। एक बार दिमाग लगाओ, हल नहीं मिला! फिर दिमाग लगाओ, हल नहीं मिला! फिर दिमाग लगाओ! फिर लगाओ और आखिर में समझ आ जाती है, तो समझ लो कि दिमाग की शक्ति थोड़ी बढ़ गई। एक बार दिमाग लगाकर छोड़ दिया कि हट, कौन मत्था मारे…! तो आपका दिमाग जितना है, उतना ही रहेगा। आप सुमिरन, भक्ति-इबादत करो, तो सोचने की शक्ति बढ़ती है और सोचने की शक्ति बढ़ने से आप दिमाग को ज्यादा इस्तेमाल में लाते हैं और मालिक की कृपा-दृष्टि आप पर ज्यादा बरसती है।

जरूर लगाएं ईश्वर की याद में समय

पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि यह बहुत जरूरी है कि आप ईश्वर की याद में समय जरूर लगाएं। सुबह फ्रेश होने के बाद चाहे दस मिनट ही सही, दोपहर के खाने से आधा घंटा पहले, रात की रोटी से आधा घंटा पहले 5-5 मिनट ही सुमिरन कर लो। आप नियम बनाओ कि भक्ति में बैठूंगा। …तभी आपको भक्ति का पता चलेगा। वरना आपके सामने घी, दूध, मेवे, मिठाई सब कुछ है, सिर्फ नमस्कार करने से तो कुछ होने वाला नहीं। उन्हें उठाकर खाओगे, तो ताकत भी आएगी और स्वाद भी आ जाएगा। वैसे ही राम का नाम है, अगर जाप करोगे, तो अंदर से शक्ति भी आएगी और गम, दु:ख, दर्द, चिंताएं भी मिटती जाएंगी।

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