सम्पादकीय

दुर्भाग्यपूर्ण है रेलवे में दशकों पुरानी खामियां

विगत दिनों पंजाब में फिलौर के नजदीक झेलम एक्सप्रैस के पहिये पटरी से उतर गए और एक बड़ी रेल दुर्घटना हो गई। हालांकि इस हादसे में मानव जीवन की कोई हानि नहीं हुई, फिर भी चेत जाने के लिए यह एक छोटी घटना नहीं मानी चाहिए। इस बात में कोई दो राय नहीं है कि रेलवे की आधुनिकता के लिए सरकार गंभीर प्रयास कर रही है व इस दिशा में नई योजनाएं प्रगति पर हैं, लेकिन रेलवे में आये दिन हो रही दुर्घटनाओं को रोके जाने की तीव्र आवश्यकता है। यहां सबसे दुखद बात यह है कि अब भी जब रेलवे दुर्घटनाग्रस्त होती है, तब उसमें वही कारण सामने आते हैं जो कि आज से पचास साल पहले भी दुर्घटना का कारण बनते थे। गाड़ी का पहिया टूट जाना, एक ही रेल लाईन पर दो गाड़ियों का आ जाना, सिग्नल करते वक्त सिग्नल मैन की रोजमर्रा की गलती हो जाना जो कि आधुनिक युग के इस दौर में गुजर गए वक्त की बातें हो जानी चाहिए थी। फिलौर की दुर्घटना से ठीक एक सप्ताह पूर्व उड़ीसा में सिग्नल गलत हो जाने के चलते एक मालगाड़ी एक यात्री गाड़ी से टकरा गई। ऐसे ही बिहार में चरवाहों की सूझबूझ से बड़ा रेल हादसा टला जब उन्होंने देखा कि पटरी टूटी पड़ी है, व चरवाहों ने लाल कपड़ा लहरा कर गाड़ी को रोका। अब सवाल यह है कि रोजाना जांच करने वाले रेल कर्मियों की नजर में ये टूटी हुई पटरी क्यों नहीं आई? वर्ष 2016 के शुरूआती दिनों में उत्तर प्रदेश के हापुड़ में दिल्ली फैजाबाद एक्सप्रैस के आठ डिब्बे पटरी से उतर गए थे। रेलवे में ऐसे दर्जनों हादसे आये दिन कहीं न कहीं होते रहते हैं। भारत अंतरिक्ष के क्षेत्र में उपग्रह स्थापित करने वाले देशों में प्रथम छ: में अपना स्थाना बना चुका है। देश के कम्प्यूटर इंजीनियर प्रतिवर्ष अरबों रुपए के साफ्टवेयर निर्यात कर रहे हैं। महानगरों में मेट्रो, मोनो रेल का जाल बिछ रहा है, ऐसी परिस्थितियों में रेलवे के सिग्नल में होने वाली खामियों के चलते दुर्घटनाओं का शिकार बनते रहना देश के लिए काफी दुर्भाग्यपूर्ण है। रेलवे सफर व माल ढ़ोने का सस्ता परिवहन अवश्य है, लेकिन यह सुरक्षित भी होना चाहिए। देश में रेलवे की स्थापना से लेकर अब तक मानव रहित क्रासिंग भी एक बड़ी समस्या बनी हुई है। देश के रेलवे मंत्री बेहद संवेदनशील, सजग व प्रगतिशील व्यक्ति हैं। अक्सर ही सफर के दौरान यात्रियों को आने वाली समस्याओं को वह ट्वीटर व व्हाट्सप के जरिये ग्रहण कर भी मिन्टों में उसका हल कर देते है। जोकि उनकी रेलवे के प्रति समर्पण की भावना को दर्शाता है। रेलवे मंत्री सुरेश प्रभु को रेलवे की उस खामियों का भी जल्दी अंत करना चाहिए जो बार-बार दुर्घटना का कारण बन रही हैं, एवं देश के अमूल्य जीवन तथा धन की हानि करती हैं। चुनौती भले ही बड़ी दिखती है परंतु इरादा कर लेने पर यह चुनौती मिटाई जा सकती है। जिसे कि देश हित में मिटाने का अब वक्त आ गया है।

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