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न्यायिक अधिकारी बनना है तो ऐसे करें तैयारी

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प्रारंभिक परीक्षा का स्वरूप : यह परीक्षा का पहला चरण है। प्रारंभिक परीक्षा पूरी तरह से वस्तुनिष्ठ प्रकृति की होगी जिसमें मल्टीपल चॉइस प्रश्न अर्थात बहुविकल्पी प्रश्न पूछे जाएंगे। ध्यान रखने की बात यह है कि प्रारंभिक परीक्षा और मुख्य परीक्षा में भाषा योग्यता संबंधी प्रश्न को छोड़कर कोई अंतर नहीं है अर्थात् प्रारम्भिक और मुख्य परीक्षा में कानून संबंधी पाठ्यक्रम समान है।

दोनों परीक्षाओं, प्रारम्भिक तथा मुख्य परीक्षा में एक ही पाठ्यक्रम से प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रारंभिक परीक्षा 2 घंटे की होगी जिसमें 125 प्रश्न पूछे जाएंगे प्रत्येक प्रश्न के 4 अंक होंगे और प्रत्येक गलती के लिए 0.80 काटे जाएंगे। जिन प्रश्नों को हल नहीं किया जाएगा उन प्रश्नों के लिए कोई अंक नहीं काटा जाएगा।

कानूनी प्रश्नों के साथ-साथ राष्ट्रीय तथा अंतर्राष्ट्रीय महत्व की समसामयिक घटनाओं तथा करेंट अफेयर्स प्रश्न होंगे। इसके अलावा भारतीय संवैधानिक इतिहास, प्रशासन तथा कानूनी इतिहास से भी प्रश्न पूछे जाएंगे। प्रश्नों का स्तर विधि स्नातक के पाठ्यक्रम के समान होगा। प्रारंभिक परीक्षा में सामान्य वर्ग के लिए न्यूनतम 150 अंक तथा आरक्षित वर्ग के लिए सौ अंक लेना अनिवार्य है,

अन्यथा वे मुख्य परीक्षा में बैठने के पात्र नहीं होंगे। प्रारंभिक परीक्षा में प्राप्त अंकों का अंतिम चयन में कोई भूमिका नहीं होगी। मुख्य परीक्षा का स्वरूप : यह न्यायिक भर्ती के लिए दूसरा चरण है। प्रारंभिक परीक्षा में श्रेणी अनुसार परिणाम निकालकर मैरिट बनाई जाएगी। मुख्य परीक्षा में बैठने वाले अभ्यर्थियों की संख्या कुल रिक्तियों के लगभग 10 गुना तक होगी।

यदि अंतिम स्थान पर कई अभ्यर्थियों के समान अंक होते हैं तो उन सभी को मुख्य परीक्षा में बैठने की अनुमति दी जाएगी। मुख्य परीक्षा में कुल पांचप्रश्न पत्र होंगे जिसमें अभ्यर्थी को अपनी योग्यता अनुसार उत्तर लिखना है। इसमें पहले तीन प्रश्न विधिक विषयों से संबंधित होंगे। चौथा प्रश्न पत्र अंग्रेजी भाषा योग्यता परीक्षण हेतु होगा।

इन पहले चारों प्रश्न पत्रों के लिए 200 अंक निर्धारित किए गए हैं। वही पांचवा प्रश्न पत्र हिंदी भाषा योग्यता परीक्षण का होगा जिसके लिए सौ अंक निर्धारित किए गए हैं। इस प्रकार लिखित परीक्षा कुल 900 अंकों की होगी और इसके बाद साक्षात्कार का चरण होगा जिसके लिए 200 अंक निर्धारित किए गए हैं। यहां ध्यान रखना आवश्यक है कि मुख्य परीक्षा केवल अंग्रेजी माध्यम में ही दी जा सकती है। हिंदी भाषा में उत्तर देने का विकल्प हरियाणा में उपलब्ध नहीं है।

हिंदी भाषा योग्यता परीक्षण हेतु प्रश्न पत्र को हिंदी भाषा अर्थात् देवनागरी लिपि में ही लिखा जाएगा। मुख्य परीक्षा के दौरान अभ्यर्थियों को बेयर एक्ट परीक्षा भवन में उपलब्ध कराए जाएंगे। मुख्य परीक्षा में प्रत्येक प्रश्न पत्र के लिए 3 घंटे का समय निर्धारित किया गया है। भाषा संबंधी प्रश्न पत्रों का स्तर हरियाणा बोर्ड की दसवीं परीक्षा में आयोजित किए जाने वाले भाषा प्रश्न पत्रों के समान होगा।

मुख्य परीक्षा में प्रत्येक प्रश्नपत्र में न्यूनतम अंक 33 निर्धारित किए गए हैं। इसका अर्थ यह है कि अगर किसी अभ्यर्थी ने चार प्रश्नपत्रों में बहुत अच्छे अंक प्राप्त किये हैं परन्तु एक प्रश्नपत्र में उसे 33 से कम अंक प्राप्त हुए हैं तो उसे असफल घोषित किया जाएगा। साक्षात्कार का स्वरूप : मुख्य परीक्षा पास करने के लिए सामान्य वर्ग तथा पूर्व सैनिकों के आश्रित श्रेणी के अभ्यर्थियों को सभी प्रश्न पत्रों में मिलाकर 50 प्रतिशत अंक प्राप्त करना अनिवार्य है।

वही अन्य आरक्षित श्रेणियों के लिए यह अंक सीमा 45 प्रतिशत निर्धारित की गई है। मुख्य परीक्षा में कुल रिक्तियों के तीन गुना अभ्यर्थियों को उत्तीर्ण घोषित किया जाएगा जिन्हें साक्षात्कार के लिए बुलाया जाएगा। इस बार साक्षात्कार के लिए लगभग 327 अभ्यर्थियों को बुलाए जाने की सम्भावना है। यदि मुख्य परीक्षा में अंतिम स्थान पर कई अभ्यर्थियों के समान अंक होते हैं

तो उन सभी को साक्षात्कार हेतु आमंत्रित किया जाएगा, जिससे साक्षात्कार में शामिल होने वाले अभ्यर्थियों की संख्या में परिवर्तन हो सकता है।

हाल ही में हरियाणा लोक सेवा आयोग द्वारा 109 पदों पर न्यायिक अधिकारियों की नियुक्ति के लिए विज्ञापन आमंत्रित किए गए हैं। माननीय पंजाब एवं हरियाणा उच्च न्यायालय द्वारा गठित एक चयन समिति ही लोक सेवा आयोग के माध्यम से इन पदों पर भर्ती करेगी। न्यायिक अधिकारी की परीक्षा के लिए तैयारी कैसे करें, विस्तार से बता रहे हैं डॉ. कुलदीप मेंहदीरत्ता।

 

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