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नौजवानों को भलाई कार्यों व भक्ति मार्ग पर चलाने के लिए ही फिल्मों में आए : डॉ एमएसजी

‘फिल्मों से बदल रही है युवा पीढ़ी’
बुराइयों की राह छोड़ सच्चाई, नेकी भलाई व इंसानियत के मार्ग पर चलने लगे नौजवान
DharamShala, Parveen Sharma: नौजवानों को भलाई कार्यों व भक्ति मार्ग पर चलाने के लिए ही हम फिल्मों में आए तथा आज इसके सकारात्मक परिणाम भी आ रहे हैं। युवा पीढ़ी बदल रही है। नौजवान बुराइयों की राह छोड़ सच्चाई, नेकी भलाई व इंसानियत के मार्ग पर चल रहे हैं। पूज्य गुरू संत डॉ. गुरमीत राम रहीम सिंह जी इन्सां सोमवार को धर्मशाला में आयोजित एक प्रैस कांफ्रेस में पत्रकारों द्वारा फिल्में बनाने के संबंध में पूछे गए सवाल का जवाब दे रहे थे। पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि यह किसी भी धर्म में नहीं लिखा है कि संतों का कोई ड्रैस कोड है। आज के आधुनिकता के युग में लोगों को राम नाम से जोड़ने के लिए ही हमने गाना शुरू किया। हमारे गाने में राम नाम होता है लेकिन उसे आज जिस अंदाज में युवा पसन्द करते हैं उनके तरीके से उनके सामने गाया। इसी दौरान ख्याल आया कि आमतौर पर बच्चों द्वारा घर पर फिल्मों का नाम लेने पर उसे अच्छा नहीं समझा जाता तथा सभ्य परिवार फिल्मों को देखना ही पसन्द नहीं करता। इसी कारण हमने फिल्में बनाई ताकि लोगों को शुद्ध मनोरजंन व नेकी भलाई, इंसानियत की प्रेरणा मिले। इस दौरान पत्रकारों को फिल्म का ट्रेलर भी दिखाया गया तथा पूज्य गुरू जी ने फिल्म का एक डायलॉग भी बोला।

लायनहार्ट ने प्रमाणित की शास्त्रों की बात
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि अब तक रिलीज हुई तीन फिल्मों में से दो फिल्में पूरे विश्व में देखी जा चुकी हैं तथा तीसरी फिल्म में वे स्वंय बतौर एक योद्धा के किरदार में सामने आये हैं जो लोगों के बचाव में आगे आता है जबकि पहली दो फिल्मों में हमारी भूमिका एक गुरु के रूप में थी। आप जी ने फरमाया कि तीसरी फिल्म में जो एलियंस दिखाए गए हैं वह हमारे पुराने शास्त्रों के अनुसार अलग ग्रह के लोग हैं जिनका आस्तित्व इसमें दिखाया गया है जो आज प्रमाणिक भी हो रहा है।

मेरा कोई अनुभव नहीं, पूज्य गुरु जी से मिली ट्रेनिंग
फिल्मों में काम करने के अनुभव संबंधी पूछे गए सवाल पर आदरणीय साहिबजादी बहन हनीप्रीत जी इन्सां ने कहा कि फिल्म के क्षेत्र में मेरा कोई अनुभव नहीं है। सब तरह की ट्रेनिंग पूज्य हजूर पिता जी से ही मिली है। भविष्य में अगर कोई ऐसी फिल्म जिसमें अश्लीलता न हो उसमें काम करने का मौका मिलेगा तो वह कर सकती हैं।

बेटा-बेटी मेें कोई भेद नहीं
पूज्य गुरू जी ने फरमाया कि वे हमेशा से नारी का सम्मान करते रहे हैं तथा डेरा सच्चा सौदा में वेश्यावृति छोड़कर समाज की मुख्यधारा में शामिल होने वाली करीब 20 वेश्याओं का इलाज कराकर शादियां करवाई जा चुकी हैं। हर त्यौहार में उन्हें पूरा मान-सम्मान दिया जाता है। आप जी ने फरमाया कि वे कभी भी लड़का या लड़की में भेद नहीं करते। डेरा सच्चा सौदा के शिक्षण संस्थानों में जितने खेल बेटों के लिए हैं उतने ही बेटियों के लिए। हम स्वंय 32 खेल खेलते हैं।

करोड़ों लोग छोड़ चुके नशे
पूज्य गुरु जी ने फरमाया कि डेरा सच्चा सौदा में नशा छुड़वाया जाता है। करोड़ों लोग भयानक से भयानक नशे छोड़ चुके हैं, जिन लोगों के ग्राहक कम हो रहे हैं वे समय समय पर हर तरह से चरित्रहरण के प्रयास करते रहते हैं।

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