सम्पादकीय

बिल्डरों के लोभ की सजा आमजन को

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बिल्डर अवैध ढंग से ईमारतें खड़ी कर करोड़ों रूपये कमा लेते हैं लेकिन इन नियमों के उल्ट बनी जब यह ईमारतें गिरती हैं तो लाशें वहां आम लोगों, गरीबों-मजदूरों की उठाई जाती हैं। यह लगभग हर पांचवें-दसवें दिन हो रहा है लेकिन इसे कोई रोकने वाला नहीं। नोएडा के शाहबेरी क्षेत्र में 6 मंजिला दो ईमारते इस तरह से ढह गई जैसे ताजा-ताजा हवाई हमला हुआ हो। तीन जिंदगियां तो खत्म हो चुकी हैं व मलबे के नीचे दबे 15 के करीब अन्य व्यक्तियों के मारे जाने का डर है। आलम यह है कि शाहबेरी क्षेत्र में अवैध तरीके से नक्शा पास कर कमजोर मटीरियल वाली ईमारतों का निर्माण किया जा रहा है।

कुछ समाज सेवियों ने अथॉरिटी के अधिकारियों तक अवैध निर्माण रोकने के लिए आवाज भी उठाई लेकिन एक वर्ष बीत जाने के बावजूूद कोई कार्रवाई नहीं हुई। पुलिस भी कार्रवाई की घोषणा कर बात गोलमोल करती रही। सोशल मीडिया पर भी यह मुद्दा छाया रहा लेकिन लगता ही नहीं कि कानून को लागू करने वाला कोई है। राजनेताओं को आम लोगों की जरूरत सिर्फ अपनी रैलियों व मार्च कामयाब बनाने तक ही है। इससे दूर आमजन की सलामती की किसी को कोई चिंता नहीं।

उक्त मामले में ईमारत के मालिक सहित कुछ अन्य व्यक्तियों को गिरफ्तार किया गया है, जिससे पीड़ित परिवारों के आंसू पोंछने का प्रयास किया जाएगा, कुछ दिनों बाद मामला शांत हो जाएगा। फिर कोई न कोई ऐसा हादसा और घटित होगा। पैसे व पहुंच वाले तंत्र में मारे गए व्यक्तियों के परिवारों के लिए अपने बिछुड़े सदस्यों की अंतिम क्रियाएं करने से अधिक कोई चारा नहीं। बीते कुछ महीनों में जीरकपुर(पंजाब) में एक ईमारत गिरी, जिसके मालिकों के खिलाफ एक मंत्री ने खुद थाने जाकर रिपोर्ट दर्ज करवाई।

महीनोें बाद भी किसी आरोपी की गिरफ्तारी नहीं हो सकी। हजारों जिंदगियां दिल्ली सहित अन्य महानगरों में ईमारतें गिरने से मौत के मुंह में जा चुकी हैं। गरीब वर्ग का हाल यह है कि वह महानगरों में अपना सिर छुपाने के लिए अवैध व खस्ताहाल ईमारतों में जीवन-यापन करने को मजबूर हैं। वे चाह कर भी ईमारत का नक्शा पास होने या अन्य किसी सरकारी स्वीकृति संबंधी जानना नहीं चाहते।

गरीब व मध्यवर्ग की यह मजबूरी बिल्डरों के मुनाफे वाले धंधे की बड़ी वजह है। सत्ता के उच्च पदों पर बैठे राजनेता लोगों को लालची बिल्डरों के रहम पर न छोडेÞं। देश में अवैध ईमारतें गिरने से इतनी बड़ी संख्या में कीमती जिंदगियां मौत के मुंंह में समा चुकी हैं कि इन दुर्घटनाआें का दोहराव होना देश के माथे पर कलंक है। आरोपियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई होनी चाहिए क्योंकि मलबे नीचे दबे वाले लोग भी देश का हिस्सा हैं।

 

 

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