सम्पादकीय

सर्व सहमति से ही चुना जाए अगला राष्ट्रपति

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दोनों बड़े राजनीतिक दल भजपा व कांग्रेस राष्ट्रपति चुनावों के लिए सहमति बनाने की ओर बढ़ रहे हैं इसे लेकर दोनों ने आपसी चर्चा भी की है। देश की राजनीति में यह अच्छा वक्त कहा जाएगा कि भाजपा जो अभी देश में पूर्ण बहूमत की स्थिति में है फिर भी वह राष्ट्रपति चुनाव के लिए विपक्षी दलों से चर्चा कर रही है। हालांकि इस दिशा में कांग्रेस की कार्यशैली काफी उदासीन लग रही है।

भाजपा ने कांग्रेस से उनके राष्ट्रपति उम्मीदवार के लिए जाना, लेकिन कांग्रेस किसी भी नेता का इस पद के लिए नाम नहीं बता पाई। इससे स्पष्ट है कि कांग्रेस व उसके सहयोगी दल अभी तक अपना कोई सांझा उम्मीदवार तय नहीं कर पाये। भाजपा की यदि बात करें तब शायद उसने राष्ट्रपति पद के लिए अपना उम्मीदवार तय कर लिया है, जिस पर वह विपक्षी दलों की सहमति के लिए उनसे विचार कर रही है।

राष्ट्रपति पद पर यूं तो हर भारतीय नागरिक चुने जाने का अधिकार है बशर्तेें वह कुछ निर्योग्ताओं के अधीन न हो। लेकिन अधिकतर इस पद पर राजनीतिक पृष्ठभूमि के लोगों को ही अधिक चुना गया है। बहुत सारे ऐसे व्यक्ति भी हैं, जिन्होंने खेल, साहित्य, कला, विज्ञान, कृषि व चिकित्सा के क्षेत्र में बेमिसाल काम किया है।

जोकि राष्ट्रपति पद के लिए सर्वसम्मति भी पा सकते हैं, पहले भी डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के नाम पर यह सहमति बन चुकी है। परन्तु ऐसा व्यक्ति खोजकर लाने का श्रेय इस बार किस पार्टी को मिलता है यह देखा जाना होगा। राष्ट्रपति देश व संविधान का प्रमुख होने के साथ-साथ एक विलक्षण प्रतिभा व रूचि की मांग करने वाला पद भी है।

इस पद पर चुने जाने वाले व्यक्ति का चयन राजनीतिक सोच से ऊपर उठकर किया जाना ही स्वीकृत है। राष्ट्रपति के पद पर आसीन होने वाले पूर्व के सभी व्यक्तियों ने देश के कठिन समय में पार्टीबाजी से ऊपर रहकर देश का मार्गदर्शन किया है एवं पद की गरिमा को बरकरार रखा है।

राष्ट्रपति रहे गैर राजनीतिक व्यक्तियों ने भी देशवासियों के दिलों दिमाग में अपनी ऐसी छाप छोड़ी है कि वह दोबारा चुने जाने तक की भी लोकप्रियता बरकरार रखते हुए रायसीना की पहाड़ियों में स्थित इस भव्य राजप्रसाद से विदा हुए है। अभी हरित क्रांति के जनक डॉ. स्वामीनाथन व कुशल प्रबंधक, नामचीन इंजीनियर ई. श्रीधरन की चर्चा चली है।

दोनों ही व्यक्ति गैर राजनीतिक हैं, लेकिन इनके द्वारा अपने-2 क्षेत्र में देश को दी गई सेवाएं अमूल्य है, बेमिसाल हैं। लोकतंत्र में चुनाव उसकी आत्मा है, सर्वसम्मति हो जाना तो साक्षात् ईश्वरीय अनुभव है।

अब यदि भाजपा पुन: डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम जैसा व्यक्तित्व आगे लाती है तब अन्य दलों को उस पर सहमति बनानी चाहिए। इस तरह की सहमति से विपक्षी दलों का भी सम्मान बढ़ेगा। अभी देश का सर्वोच्च पद किसी चुनावी प्रक्रिया की घोषणा नहीं बने बल्कि इसे पूरा राष्ट्र अपनी हार्दिक भावनाओं से एक होकर ही चुने।

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