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अपनी असफलता सवालों से छुपाते हमारे नेता

भारत का एक गौरवशाली इतिहास रहा है, जहां हम अपने देश को मां का दर्जा देते हैं। महाभारत का एक प्रसंग याद आ रहा है, जब एक बार दुर्योधन को कुछ आदिवासी बंधी बना लेते हैं, तो उस समय उसी वन में पाण्डव वनवास काट रहे थे। पाण्डवों को जब इस बात का पता चलता है, तो युद्धिष्ठिर अपने भाइयों के साथ जाकर दुर्योधन को छुड़ा लाते हैं। भीम द्वारा विरोध करने पर वह कहते हैं कि भले ही वे सौ और हम पांच हैं, लेकिन दुनिया के सामने हम एक सौ पांच ही हैं।
वर्षों पुरानी यह कहानी आज हमारे देश के नेताओं को याद दिलानी आवश्यक हो गई है। उन्हें यह याद दिलाना आवश्यक है कि देश पहले आता है स्वार्थ बाद में। राष्ट्रहित पहले आता है निज हित बाद में। राष्ट्र के प्रति निष्ठा पहले होती है, पार्टी के प्रति निष्ठा बाद में।
क्यों आज हमारे देश में राजनीति और राजनेता दोनों का ही स्तर इस हद तक गिर चुका है कि कर्तव्यों के ऊपर अधिकार और फर्ज के ऊपर स्वार्थ हावी है? कर्म करें न करें, श्रेय लेने की होड़ लगी हुई है। हर बात का राजनीतिकरण हो जाता है, फिर चाहे वह देश की सुरक्षा से जुड़ी हुई ही क्यों न हो और अपने राजनैतिक फायदे के लिए सेना के मनोबल को गिराने से भी नहीं चूकते।
हमारे लोकप्रिय पूर्व प्रधानमंत्री स्व लाल बहादुर शास्त्री जी ने नारा दिया था “जय जवान जय किसान”, लेकिन कितने शर्म की बात है कि आज उसी जवान की शहादत पर प्रश्न चिह्न लगाया जा रहा है! जिस जवान के रातभर जाग कर हमारी सीमाओं की निगरानी करने के कारण आप चैन की नींद सो रहे हैं, उसी को कटघरे में खड़ा कर रहे हैं?
सर्जिकल स्ट्राइक का अधिकारिक ब्यान डीजीएमओ की ओर से आया था, सरकार की ओर से नहीं और इस ब्यान में उन्होंने यह भी कहा था कि उन्होंने पाक डिजिएमओ को भी इस स्ट्राइक की सूचना दे दी है। तो हमारी सेना के सम्पूर्ण विश्व के सामने दिए गए इस ब्यान पर हमारे ही नेताओं द्वारा प्रश्नचिन्श्र लगाने का मतलब क्या है?
विडम्बना तो देखिए, हमारी सेना की कार्यवाही के बाद पाकिस्तान की स्थिति उसके नेताओं के ब्यानों से ब्यां हो रही है।
नवाज शरीफ: हम भी कर सकते हैं सर्जिकल स्ट्राइक।
हाफिज सैइद (बौखलाहट में): सर्जिकल स्ट्राइक क्या होती है यह भारत को हम बताएंगे।
राहेल शरीफ (घबराहट में): पाक के सामने भारत के साथ युद्ध की चुनौती है और हमने परमाणु हथियार केवल दिखाने के लिए नहीं बनाए हैं।
परवेज मुशर्रफ: पाक अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर अलग-थलग पड़ रहा है।
अब जरा भारत के नेताओं को देखें।
अरविंद केजरीवाल ने बहुत ही नफासत के साथ अपने खूंखार पंजे को मखमल की चादर में लपेटते हुए पाकिस्तान और अन्तर्राष्ट्रीय मीडिया की आड़ में भारत सरकार से सर्जिकल स्ट्राइक के सुबूत मांगे हैं।
कांग्रेस नेता संजय निरुपम: सरकार जिन सर्जिकल स्ट्राइक्स का दावा कर रही है, वह तब तक सवालों में घिरी रहेगी, जब तक कि सरकार सुबूत नहीं पेश कर देती।
दरअसल यह इस धरती का दुर्भाग्य है कि जैसे सालों पहले ब्रिटिश और मुगलों को भारत में सोने की चिड़िया दिखाई देती थी और उसे लूटने आते थे वैसे ही आज हमारे कुछ नेताओं को भारत केवल भूमि का एक टुकड़ा दिखाई देता है जिसका दोहन वे अपने स्वार्थ के लिए कर रहे हैं ।
काश कि उन्हें धरती के इस टुकड़े में, इसके लहलहाते खेतों में, नदियों और पहाड़ों में, बरसातों और बहारों में, सम्पूर्ण प्रकृति में दोनों हाथों से अपने बच्चों पर प्यार लुटाने वाली माँ नजर आती, हमारी सीमाओं पर आठों पहर निगरानी करने वाले सैनिकों में अपने भाई नजर आते!
लेकिन उक्त किस्म के नेताओं को न तो अपने देश की जनता द्वारा चुनी हुई सरकार पर भरोसा है, न प्रधानमंत्री पर और न ही सेना पर, तो बेहतर यही होगा कि अगली बार जब इस प्रकार की कार्यवाही की जाए तो पहली गोली इन्हीं के हाथों से चलवायी जाए। डॉ नीलम महेंद्र 

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