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लेख

सुखी जीवन का आधार है योग

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विश्व का आध्यात्मिक और वैचारिक दर्शन जहां पर समाप्त होता है, भारत का दर्शन वहां से प्रारम्भ होता है। भारत आज भी कई मामलों में विश्व के अनेक देशों से बहुत आगे है। हमारा देश आज भी इतना संसाधन सम्पन्न है कि विश्व के कई देश अनेक विद्याओं की जानकारी लेने के लिए आतुर दिखाई देते हैं।

कहा जाता है कि योग स्वस्थ मानसिकता का निर्माण करता है और स्वस्थ मानसिकता वाला व्यक्ति ही दूसरों को खुश करने व खुश रखने का काम कर सकता है। भारत का दर्शन कहता है कि समस्त संसार का भला हो, विश्व के सभी लोग निरोगी हों। इसी पक्ष को ध्यान में रखते हुए 11 दिसंबर 2014 को अंतरराष्ट्रीय योग दिवस के रुप में ‘21 जून’ को संयुक्त राष्ट्र आम सभा ने घोषित किया है।

योग पर कई अध्ययन और शोध हुए, जिन्होंने मानव कल्याण में योग के विस्तृत और दीर्घकालिक फायदों को साबित किया। योग न केवल जीवन शैली को स्वस्थ रखने में मदद करता है, बल्कि हमें हमेशा के लिए बेहतर जीवन जीने में सहायता करता है। हमें अपने बच्चों को योग के लाभों को बताने के साथ ही उन्हें योग करने का नियमित अभ्यास भी कराना चाहिए।

योग के जरिए न सिर्फ बीमारियों का निदान किया जाता है, बल्कि इसे अपनाकर कई शारीरिक और मानसिक तकलीफों को भी दूर किया जा सकता है। योग प्रतिरक्षा प्रणाली को मजबूत बनाकर जीवन में नव-ऊर्जा का संचार करता है। योग शरीर को शक्तिशाली एवं लचीला बनाए रखता है, साथ ही तनाव से भी छुटकारा दिलाता है, जो रोजमर्रा की जिन्दगी के लिए आवश्यक है। योग आसन और मुद्राएं तन और मन दोनों को क्रियाशील बनाए रखती हैं।

भारत से योग का संचालित होना, मतलब पूरी दुनिया को समुन्नत कारी राह का दर्शन कराना है। योग के माध्यम से पूरे विश्व में शांति की स्थापना हो सकती है, क्योंकि जब व्यक्ति संतुष्टीपूर्वक जीवन जीता है, तब वह सबका भला ही चाहता है।

कहीं से भी राग द्वेष (बुरे व्यवहार) के स्वर नहीं आ सकते, लेकिन आज के समय में कई लोग ऐसे भी हैं, जो योग का विरोध कर रहे हैं, लेकिन वे लोग वास्तव में पूरे विश्व में अशांति फैलाने का मार्ग ही प्रशस्त कर रहे हैं। ऐसे लोग ही कट्टरपंथी होते हैं। ऐसे दिशाहीन लोग अपने देश व दुनिया की मारकाट करते हैं।

एक सफल व्यक्ति के जीवन की दिनचर्या का अध्ययन करने से पता चलता है कि उसका जीवन व्यवस्थित दिनचर्या के साथ चलता है। लेकिन वर्तमान में हम देखते हैं कि व्यक्ति केवल अर्थ केन्द्रित होता जा रहा है। इसी वजह से व्यक्ति तनाव में घिर जाता है और इस तनाव को दूर करने के लिए योग सर्वथा उपयुक्त है।

“योग” का अर्थ होता है ‘जोड़’, यानि टूटी हुई किसी भी वस्तु को सही तरीके से बनाना ही योग का दूसरा नाम है। इसके अनुसार जब व्यक्ति अपनी भौतिकतावादी दिनचर्या के तनाव व उलझनों में फंसकर टूट जाता है, तब ‘योग’ उसके लिए एक जोड़ का, जो व्यक्ति को आध्यात्मिक, मानसिक व शारीरिक रूप से एक करने का कार्य करता है। अत: निरंतर व नियमित रूप से योग करने से व्यक्ति की मानसिक चेतना बढ़ती है और मन-मस्तिष्क को सुख मिलता है।

योग की महत्ता को भारत देश भलि-भांति जानता है। प्राचीन समय से यहां के ऋषि-मुनियों ने योग के आधार पर हजारों साल की आयु प्राप्त की है। पूरी दुनिया में योग के प्रचार के लिए ऋषि-मुनियों ने प्रयास किए व वर्तमान में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के सफल प्रयासों से भले ही एक दिन (21 जून) पूरा विश्व योग करता है, लेकिन आने वाली पीढ़ियों के लिए यह एक सकारात्मक सोच है।

अत: आगामी 21 जून को जहां पूरा विश्व योग दिवस मना रहा है, ऐसे में हर व्यक्ति को इस दिन से प्रेरणा लेकर योग को अपनी दिनचर्या में शामिल करने का प्रण करना चाहिए। व्यक्ति को अपने बच्चों के अंदर बचपन से ही नियमित योग करने की आदत डालनी चाहिए, जिससे आने वाले समय में वे स्वस्थ समाज का निर्माण कर सकें।

-राहुल अरोड़ा

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