सम्पादकीय

कश्मीर में आतंकवादी हमले

Terrorist

Terrorist कुपवाड़ा के आर्मी कैंप में हुए फिदायीन हमले में एक कैप्टन सहित तीन जवान शहीद हो गए। दीनानगर, पठानकोट व उड़ी हमले के बाद हमलों का यह सिलसिला निरंतर जारी है। उक्त हमले में विदेशी आतंकवाद की साजिश स्पष्ट समझ आती है।

आतंकवादी संगठन सेना के कैंपों पर हमला करने के साथ स्थानीय नागरिकों को भड़काने का काम भी कर रहे हैं, ताकि सेना को आतंकवाद के साथ-साथ लोगों के विरोध का सामना करना पड़े। आतंकवादी पुलिस थानों व सेना के कैंप में दाखिल होने की कोशिश कर रहे हैं।

इन हालातों में सुरक्षा बलों को मजबूत करने के लिए बड़े कदम उठाने होंगे। पिछले साल भी कुपवाड़ा में सुरक्षा बलों की आतंकवादियों से झड़प हुई। लाईन आफ कंट्रोल के साथ-साथ सुरक्षा रणनीति में सुधार करने की जरूरत है। जांच एजेंसियों को सक्रियता से काम करना होगा।

Terrorist स्थानीय लोगों का सहयोग लेना भी जरूरी है। हमें वह हालात फिर पैदा करने होंगे जब भटके युवा, हिंसा की राह त्यागकर मुख्य धारा में शामिल हो गए थे। भारत के लिए पाकिस्तान पर आतंकवाद के खात्मे के लिए दबाव बनाना जरूरी है, किंतु पिछले साल अलगाववादियों व विदेशी आतंकवाद के गठजोड़ ने पथराव कर यह साबित कर दिया था कि अलगाववादी स्थानीय लोगों को अपने साथ जोड़ने की कोशिश कर रहे हैं। सैन्य कार्रवाई में निर्दोष लोगों के मारे जाने का अलगाववादियों ने झूठा प्रचार किया।

अलगाववादियों ने विद्यार्थियों को भी भड़काने की हर कोशिश की। इस हालत में सरकार के लिए आतंकवाद के खिलाफ सख्त मुहिम छेड़ने की जरूरत है। आम नागरिकों की सुरक्षा के साथ-साथ देश विरोधी तत्वों के खिलाफ प्रचार भी करना होगा। विदेशी आतंकवाद आईएस की सरगर्मियों से ओर पेचीदा हो गया है जिसने तकनीक से कई देशों तक अपनी पहुंच बनाई है।

Terrorist ऐसे हालातों में युवा पीढ़ी को गुमराह होने से बचाने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। जम्मू कश्मीर की राजनैतिक पार्टियों को भी चाहिए कि वह सत्ता प्राप्ति के लिए युवाओं की जान दांव पर लगाने से गुरेज करें।

Hindi News से जुडे अन्य अपडेट हासिल करने के लिए हमें Facebook और Twitter पर फॉलो करें।

लोकप्रिय न्यूज़

To Top