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तीन तलाक शादी खत्म करने का सबसे खराब तरीका है: सुप्रीम कोर्ट

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New Delhi: तीन तलाक के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट में आज भी सुनवाई जारी है। सर्वोच्च न्यायालय के पांच जजों की संविधान पीठ इस मामले में 19 मई तक रोज सुनवाई करने जा रही है। बेंच में चीफ जस्टिस जेएस खेहर के अलावा जस्टिस जोसेफ कुरियन, आरएफ नरीमन यूयू ललित और अब्दुल नजीर शामिल हैं।

 असंवैधानिक है तीन तलाक- जेठमलानी

सुनवाई के दौरान सीनियर वकील राम जेठमलानी भी तीन तलाक की एक पीड़िता की ओर से पेश हुए। उन्होंने कहा कि संविधान के अनुच्छेद 14 और 15 सभी नागरिकों को बराबरी का हक देते हैं और इनकी रोशनी में तीन तलाक असंवैधानिक है। जेठमलानी ने दावा किया कि वो बाकी मजहबों की तरह वो इस्लाम के भी छात्र हैं। उन्होंने हजरत मोहम्मद कोJ ईश्वर के महानतम पैगंबरों में से एक बताया और कहा कि उनका संदेश तारीफ के काबिल है। जेठमलानी ने कहा, ‘कुरान कहती है कि आप अगर ज्ञान की तलाश में हैं तो अल्लाह की राह पर हैं। एक ज्ञान के साधक की स्याही शहीद के खून से ज्यादा महान है।’ जेठमलानी की राय में महिलाओं से सिर्फ उनके लिंग के आधार पर भेदभाव नहीं हो सकता और सुप्रीम कोर्ट में तय होने वाला कोई भी कानून भेदभाव को बढ़ावा देने वाला नहीं होना चाहिए।

मुस्लिम महिलाओं को इस तरह उम्मीद

गाजियाबाद के शब्बीर की बेटी को दहेज के लिए ससुरालवालों ने टॉर्चर किया। इसके बाद पति ने तीन बार तलाक बोलकर उससे रिश्ता तोड़ लिया। शब्बीर को लगा कि लोकल एमएलए अतुल गर्ग उसकी मदद कर सकते हैं। शब्बीर उनके पास पहुंचा तो गर्ग ने उसे दामाद के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की सलाह दी। न्यूज एजेंसी के मुताबिक, गर्ग ने शब्बीर से कहा कि उनकी बेटी और उसके दो साल के बेटे को सिक्युरिटी भी मिलेगी। गर्ग मंत्री भी हैं। उनके मुताबिक कोर्ट जाने के अलावा कोई रास्ता भी नहीं था, क्योंकि मुस्लिम पर्सनल लॉ ट्रिपल तलाक को जायज मानता है। इसलिए सरकार तब तक कुछ नहीं कर सकती, जब तक कानून नहीं बदल जाता। अब उनकी उम्मीद गुरुवार से सुप्रीम कोर्ट में शुरू हो रही सुनवाई पर टिकी है।

 

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